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अदालतों में मुकदमों की सुनवाई पक्षकारों का खेल नहीं : कोर्ट

Thu, 12 Mar 2026 02:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 02:05 AM IST
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Hearing of cases in courts is not a game of parties: Court
कानपुर। दामाद पर छेड़छाड़ की झूठी रिपोर्ट लिखाने वाले ससुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश बुधवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट रश्मि सिंह ने दिए हैं। साली के सपने में जीजा के छेड़ने की बात कहने पर कोर्ट आरोपी एयरफोर्स कर्मी को पहले ही बरी कर चुकी है। कोर्ट ने कहा कि अदालतों में मुकदमों की सुनवाई पक्षकारों का खेल नहीं है और न ही एक-दूसरे पर दबाव बनानेे या सुलह का माध्यम है। रिश्तों की गरिमा बचाने के लिए जघन्य अपराध में सुलह की बात करना, बात न बनने पर पांच माह बाद रिपोर्ट लिखाना फिर समझौता हो जाने पर अदालत में बयान से मुकर जाना और पूछने पर दबाव और सुलह की बात कहना सही नहीं है। वादी ने झूठी गवाही देकर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया और उसका मजाक बनाया। अदालत पारिवारिक दुश्मनी को निभाने का माध्यम नहीं है।
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नौबस्ता के अर्रा निवासी एयरफोर्स कर्मी पर उसकी साली ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। घटना के पांच महीने बाद पीडि़ता के पिता ने नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें एयरफोर्स कर्मी को 19 दिन जेल में रहना पड़ा था। कोर्ट में जब पीडि़ता के बयान हुए तो वह बयान से मुकर गई और उसकी जानकारी के बिना ही पिता के रिपोर्ट लिखाने की बात कही। जब पिता के कोर्ट में बयान हुए तो उन्होंने कहा कि बड़ी बेटी के वैवाहिक व सामाजिक जीवन को बचाने के लिए और पारिवारिक समझौते के आधार पर अदालत में गवाही के दौरान झूठा बयान दिया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पीड़िता थाने पर रिपोर्ट लिखाने पिता के साथ नहीं गई। पुलिस और कोर्ट में हुए पीड़िता के बयानों में अंतर था। पीडि़ता का मेडिकल भी नहीं कराया गया। घटना के पांच महीने बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पति-पत्नी के बीच मुकदमेबाजी में दबाव बनाने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। इन सभी आधारों पर कोर्ट ने आरोपी एयरफोर्स कर्मी को दोषमुक्त करार दिया था।
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पीडि़ता ने पिता पर ही मढ़ दिया था दोष

पीडि़ता ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने मेरा बयान लिखकर हस्ताक्षर बनवाए थे। बयान में क्या लिखा था मुझे नहीं मालूम। मुकदमा मुझसे पूछकर नहीं लिखवाया गया था। मुकदमे में क्या लिखा है, मुझे नहीं मालूम। मुकदमा मेरे पापा ने कराया था। एफआईआर कब लिखी गई मुझे नहीं मालूम। जब मेरे बयान हुए तब मुझे मुकदमे का पता चला। पुलिस ने कहा था कि जो बयान हैं वही कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने बोलना है।
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