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हरदोई: महिला की हत्या के आरोप में तीन सगे देवरों को आजीवन कारावास, एक हजार रुपये की उधारी को लेकर हुई थी घटना

Thu, 03 Sep 2026 07:32 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई Published by: Shikha Pandey Updated Thu, 03 Sep 2026 07:32 PM IST
सार

एक हजार रुपये की उधारी को लेकर 10 साल पहले घटना हुई थी। नाबालिग आरोपी की पत्रावली अलग की गई। सुनवाई के दौरान ससुर की मौत हो चुकी है। 

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Hardoi: Three brothers-in-law sentenced to life imprisonment for the murder of a woman
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तकरीबन 10 साल पहले एक हजार रुपये की उधारी को लेकर महिला की हत्या के आरोप में उनके तीन सगे देवरों को अपर जिला जज (कोर्ट संख्या-3) ने दोषी करार दिया। तीनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए तीनों पर 13-13 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने की आधी रकम मृतका के परिजन को देने के आदेश भी अपर जिला जज ने दिए। मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के ससुर की मौत हो चुकी जबकि एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसकी पत्रावली अलग की गई।
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कछौना कोतवाली क्षेत्र के मंडलहिया के मजरा गौहानी निवासी श्रीराम ने दो नवंबर 2016 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि दो नवंबर की सुबह उसके सगे भाई पप्पू, नीरज, छोटू उर्फ धीरज, पिता रामपाल और भतीजा उसके दरवाजे पर आए थे। आराेपियों के हाथों में लाठी, डंडे और तबल थे। पांचों ने उधार दिए एक हजार रुपये वापस मांगे थे। श्रीराम ने 10 दिन बाद रुपये देने की बात कही थी। इस पर आरोपी गाली-गलौज करने लगे थे।
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श्रीराम की पत्नी रेशमा शोर सुनकर बाहर आईं और विरोध करने लगी थीं। इस पर आरोपियों ने रेशमा पर हमला कर दिया था। मौके पर ही रेशमा की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर की हड्डी टूटने और मस्तिष्क में सबड्यूरल हेमेटोमा (खोपड़ी और मस्तिष्क के बीच रक्त का थक्का जमने या रक्तस्राव की एक गंभीर स्थिति) बनने से रेशमा की मौत हो गई थी। आरोपियों को पुलिस ने तीन नवंबर को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान रामपाल की मौत हो गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाहों को पेश किया गया। 16 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज कुसुमलता ने फैसला सुनाया।
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पति बयानों में मुकरा, बेटे की गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों से मिली सजा
घटना की प्राथमिकी दर्ज कराने वाला मृतका का पति श्रीराम मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस को दिए गए बयानों से पलट गया। न्यायालय में गवाही के दौरान अपने भाइयों और पिता के पक्ष में श्रीराम ने गवाही दे दी। हालांकि मृतका के पुत्र मोहित ने चश्मदीद होने के नाते गवाही दी और प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों का समर्थन किया। इसके अलावा पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. अशोक प्रियदर्शी के बयान भी सजा सुनाने का आधार बने। इससे इतर एफएसएल की रिपोर्ट में मृतका के कपड़ों और घटना में इस्तेमाल हथियारों में लगे खून के धब्बे भी मेल खा गए थे। सजा दिलाने में इस रिपोर्ट की भी अहम भूमिका रही।
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