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Kanpur News: उमरन से हटवाएं जाएंगे हैंडपंप, खानचंद्रपुर में पानी टंकी बनाने की जरूरत
Wed, 18 Feb 2026 01:37 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 18 Feb 2026 01:37 AM IST
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कानपुर देहात। रनियां के क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्वे कराया तो सबसे बड़ी समस्या शुद्ध पानी की निकल कर सामने आई है। कई जगह लोग हैंडपंप से निकलने वाले दूषित पानी इस्तेमाल करते पाए गए हैं। इस पर विभाग ने उमरन गांव में लगे हैंडपंप हटवाने और खानचंद्रपुर में नई पानी की टंकी बनाने की जरूरत समझते हुए रिपोर्ट तैयार की है। इसे जिला प्रशासन को भेजा जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्र रनियां के सटे खानचंद्रपुर में क्रोमियम डंप होने से यहां का भूजल दूषित हो गया है। इसका असर आस-पास के गांव तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्रोमियम, फ्लोराइड लोगों के शरीर में मानक से अधिक पाया गया है। ग्रामीणों डीप (गहरी) बोरिंग से निकलने वाले पानी का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके बाद भी लोग घरों के बाहर व अंदर लगे हैंडपंप का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं। कई हैंडपंप व सबमर्सिबल की बोरिंग 10 से 120 फीट तक है। पानी भले ही निकलने में साफ दिख रहा हो लेकिन दूषित होने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों को शुद्ध पानी मिल सके इसके लिए जांच व लोगों को जागरूक करने के लिए एनजीटी के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्वे शुरू किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मनोज चौरसिया ने बताया कि विशेषज्ञों के साथ चार फरवरी को खानचंदपुर के यादवपुरवा, चौहानपुरवा और पालपुरवा से 10 पानी के सैंपल लिए थे। वहीं दूसरे दिन पांच फरवरी को उमरन, रहीमपुर, रामदीन का पुरवा से चार पानी सैंपल लेकर जांच के लिए विभागीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इसके साथ ही लोगों से पानी के स्रोत व आ रही समस्या के बारे में जानकारी जुटाई गई। टीम को उमरन गांव में कई हैंडपंप लगे मिले। जिनसे लोग पानी का इस्तेमाल कर रहे थे। इस पर टीम ने हैंडपंप से पानी इस्तेमाल न किए जाने की सलाह दी थी। वहीं ग्रामीणों ने टंकी से पर्याप्त पानी न मिलने की समस्या बताई थी।
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क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि उमरन में लगे हैंडपंप हटवाने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र लिखा गया है। साथ ही लोगों की समस्या को देखते हुए खानचंद्रपुर में एक नई टंकी बनाने की जरूरत समझी गई है। जिससे लोगों को पर्याप्त पानी मिल सके। इसको लेकर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी जा रही है। जिसमें जल निगम से टंकी निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराया जा सके।
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वर्जन..................
क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में नियमित 15-15 दिन में पानी की जांच की जा रही है। जहां हैंडपंप लगे हैं, उन्हें पूरी तरह बंद कराने की जरूरत है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के साथ हैंडपंप हटवाने के लिए डीपीआरओ को पत्र लिखा गया है। अभी पानी की जांच रिपोर्ट आनी है, जो सैंपल लेकर भेजे गए हैं उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नगर निकाय को भी नियमित पानी की आपूर्ति कराने व टंकी की साफ सफाई के लिए पत्राचार किया गया है। - मनोज चौरसिया, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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दूषित पानी पर पूरी तरह से लगवाना है प्रतिबंध
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विभाग के सर्वे में ग्रामीणों ने गांव व घर में लगे हैंडपंप का पानी इस्तेमाल करते मिले लेकिन किसी ने कोई दिक्कत व बीमारी न हाेने की बात कही। क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि यही वजह है कि लोग हैंडपंप से निकल रहे दूषित पानी का कपड़े धोने, पशुओं को पिलाने के साथ अन्य कार्यों में इस्तेमाल कर रहे है लेकिन इसका पूरी तरह से प्रतिबंध लगवाना है। जिससे किसी भी तरह से दूषित पानी का प्रयोग न किया जा सके। जबकि ग्रामीणों को सिर्फ टैंकर व टंकी से मिलने वाले पानी का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है।
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समय से मिले पानी, रखे जीपीएस रिकार्ड
सर्वे में खानचंद्रपुर व उमरन के ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को बताया कि उन्हें शुद्ध पानी पर्याप्त नहीं मिल रहा है। खानचंद्रपुर के लोगों ने बताया कि टंकी का पानी भी कभी कभी गंदा आता है। उमरन में एक घंटे के लिए आपूर्ति की जाती है। इस पर क्षेत्रीय अधिकारी ने नगर निकाय रनियां को पत्र लिख टंकी की समय समय पर सफाई कराने व टैंकर से आपूर्ति करते समय जीओ टैग (जीपीएस) रिकार्ड रखने के लिए कहा है। साथ ही उमरन में आपूर्ति का समय बढ़ाते हुए डेढ़ से दो घंटे किए जाने की बात कही है।
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औद्योगिक क्षेत्र रनियां के सटे खानचंद्रपुर में क्रोमियम डंप होने से यहां का भूजल दूषित हो गया है। इसका असर आस-पास के गांव तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्रोमियम, फ्लोराइड लोगों के शरीर में मानक से अधिक पाया गया है। ग्रामीणों डीप (गहरी) बोरिंग से निकलने वाले पानी का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके बाद भी लोग घरों के बाहर व अंदर लगे हैंडपंप का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं। कई हैंडपंप व सबमर्सिबल की बोरिंग 10 से 120 फीट तक है। पानी भले ही निकलने में साफ दिख रहा हो लेकिन दूषित होने की आशंका बनी हुई है।
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ग्रामीणों को शुद्ध पानी मिल सके इसके लिए जांच व लोगों को जागरूक करने के लिए एनजीटी के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्वे शुरू किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मनोज चौरसिया ने बताया कि विशेषज्ञों के साथ चार फरवरी को खानचंदपुर के यादवपुरवा, चौहानपुरवा और पालपुरवा से 10 पानी के सैंपल लिए थे। वहीं दूसरे दिन पांच फरवरी को उमरन, रहीमपुर, रामदीन का पुरवा से चार पानी सैंपल लेकर जांच के लिए विभागीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इसके साथ ही लोगों से पानी के स्रोत व आ रही समस्या के बारे में जानकारी जुटाई गई। टीम को उमरन गांव में कई हैंडपंप लगे मिले। जिनसे लोग पानी का इस्तेमाल कर रहे थे। इस पर टीम ने हैंडपंप से पानी इस्तेमाल न किए जाने की सलाह दी थी। वहीं ग्रामीणों ने टंकी से पर्याप्त पानी न मिलने की समस्या बताई थी।
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क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि उमरन में लगे हैंडपंप हटवाने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र लिखा गया है। साथ ही लोगों की समस्या को देखते हुए खानचंद्रपुर में एक नई टंकी बनाने की जरूरत समझी गई है। जिससे लोगों को पर्याप्त पानी मिल सके। इसको लेकर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी जा रही है। जिसमें जल निगम से टंकी निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराया जा सके।
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क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में नियमित 15-15 दिन में पानी की जांच की जा रही है। जहां हैंडपंप लगे हैं, उन्हें पूरी तरह बंद कराने की जरूरत है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के साथ हैंडपंप हटवाने के लिए डीपीआरओ को पत्र लिखा गया है। अभी पानी की जांच रिपोर्ट आनी है, जो सैंपल लेकर भेजे गए हैं उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नगर निकाय को भी नियमित पानी की आपूर्ति कराने व टंकी की साफ सफाई के लिए पत्राचार किया गया है। - मनोज चौरसिया, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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दूषित पानी पर पूरी तरह से लगवाना है प्रतिबंध
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विभाग के सर्वे में ग्रामीणों ने गांव व घर में लगे हैंडपंप का पानी इस्तेमाल करते मिले लेकिन किसी ने कोई दिक्कत व बीमारी न हाेने की बात कही। क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि यही वजह है कि लोग हैंडपंप से निकल रहे दूषित पानी का कपड़े धोने, पशुओं को पिलाने के साथ अन्य कार्यों में इस्तेमाल कर रहे है लेकिन इसका पूरी तरह से प्रतिबंध लगवाना है। जिससे किसी भी तरह से दूषित पानी का प्रयोग न किया जा सके। जबकि ग्रामीणों को सिर्फ टैंकर व टंकी से मिलने वाले पानी का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है।
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समय से मिले पानी, रखे जीपीएस रिकार्ड
सर्वे में खानचंद्रपुर व उमरन के ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को बताया कि उन्हें शुद्ध पानी पर्याप्त नहीं मिल रहा है। खानचंद्रपुर के लोगों ने बताया कि टंकी का पानी भी कभी कभी गंदा आता है। उमरन में एक घंटे के लिए आपूर्ति की जाती है। इस पर क्षेत्रीय अधिकारी ने नगर निकाय रनियां को पत्र लिख टंकी की समय समय पर सफाई कराने व टैंकर से आपूर्ति करते समय जीओ टैग (जीपीएस) रिकार्ड रखने के लिए कहा है। साथ ही उमरन में आपूर्ति का समय बढ़ाते हुए डेढ़ से दो घंटे किए जाने की बात कही है।