UP: डॉक्टर ने वीडियो बना किया था महिला से दुष्कर्म, कोर्ट ने कहा- विवेचना में लापरवाही...विवेचक पर हो कार्रवाई
Kanpur News: आरोपी डॉक्टर को बचाने के लिए साथ काम करने वाले पांच डॉक्टरों समेत छह शपथपत्र विवेचक को सौंपे गए, जिसमें आरोपी डॉक्टर की साफ-सुथरी छवि का बखान किया गया था। इसके अलावा भी तीन बिंदु ऐसे थे जिन्होंने विवेचना की पोल खोल कर रख दी।
विस्तार
कानपुर में दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में भी विवेचक ने सही विवेचना नहीं की, सबूत इकट्ठा करने की कोई कोशिश नहीं की। विवेचना के सिद्धांतों व सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी पालन नहीं किया। विवेचक ने विवेचना ऐसे की कि अंतिम आख्या लगाई जा सके। सीएमएम सूरज मिश्रा ने सख्त टिप्पणी के साथ डॉक्टर पर लगे दुष्कर्म के आरोप की विवेचना करने वाले विवेचक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए पुलिस आयुक्त को निर्देशित किया।
साथ ही स्वरूप नगर थाना प्रभारी को मुकदमे की दोबारा विवेचना के निर्देश भी दिए हैं। हैलट अस्पताल में तैनात रहे डॉ.प्रेम सिंह के खिलाफ कल्याणपुर के आवास विकास निवासी एक महिला ने स्वरूप नगर थाने में दुष्कर्म व जानमाल की धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि स्तन में गांठ की परेशानी पर वह वर्ष 2018 में इलाज के लिए हैलट अस्पताल गई थी।
मानसिक रूप से बीमार हो गई थी पीड़िता
यहां डॉ. प्रेम सिंह ने मोबाइल टार्च की रोशनी से ही सही जांच होने का झांसा देकर अर्द्धनग्न हालत में उसका वीडियो बना लिया और फिर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर कई बार दुष्कर्म किया। जानमाल की धमकी भी दी, जिससे वह मानसिक रूप से बीमार हो गई। वर्ष 2021 में डॉ. प्रेम सिंह का गैर जनपद में स्थानांतरण होने के बाद भी वह कानपुर आकर महिला से दुष्कर्म करता रहा।
शपथपत्रों के आधार पर एफआर लगाकर कोर्ट भेज दी
जनशिकायत प्रकोष्ठ में की गई शिकायत के बाद पुलिस कमिश्रर के आदेश पर पीडि़ता की रिपोर्ट दर्ज की गई थी लेकिन विवेचक ने पीड़िता के पुलिस व मजिस्ट्रेट को दिए बयानों को दरकिनार करते हुए आरोपी डॉक्टर के पक्ष में अन्य डॉक्टरों द्वारा दिए गए शपथपत्रों के आधार पर एफआर लगाकर कोर्ट भेज दी। पीडि़ता के अधिवक्ता अमिताभ सिंह सेंगर ने प्रोटेस्ट दाखिल किया। इसमें लिखे तर्कों के आधार पर कोर्ट ने विवेचना में खामियां पाते हुए मुकदमे की अग्रिम विवेचना के साथ विवेचक पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
पांच डॉक्टरों ने शपथपत्र देकर आरोपी को बताया था पाक-साफ
आरोपी डॉक्टर को बचाने के लिए साथ काम करने वाले पांच डॉक्टरों समेत छह शपथपत्र विवेचक को सौंपे गए, जिसमें आरोपी डॉक्टर की साफ-सुथरी छवि का बखान किया गया था। इसके अलावा भी तीन बिंदु ऐसे थे जिन्होंने विवेचना की पोल खोल कर रख दी।
बिंदु -1
डॉ. आरती लाल चंदानी, डॉ. सुष्मिता, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. धनंजय चौधरी, डॉ. अरविंद कुमार एवं लिपकान हेल्थकेयर कंपनी के महाप्रबंधक कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव ने डॉ. प्रेम सिंह के पक्ष में शपथपत्र दिए हैं। सभी छह शपथपत्रों की भाषा लगभग एक जैसी ही है। सभी शपथपत्रों के स्टांप एक ही तारीख को एक ही स्टांप विक्रेता से खरीदे गए और एक ही नोटरी से सत्यापित कराए गए। शपथपत्रों में न तो घटना का समर्थन किया गया और न ही विरोध बल्कि आरोपी डॉक्टर की छवि साफ-सुथरी बताने की कोशिश की गई।
बिंदु -2
घटना के दिन पीडि़ता की बहन भी नाक, कान, गला के डॉक्टर को दिखाने हैलट गई थी। उसने पुलिस को बयान भी दिया लेकिन विवेचक ने ओपीडी विवरण को जांचने की कोशिश नहीं की कि साक्षी सही कह रही है या गलत। बल्कि उसके बयान को नकार दिया।
बिंदु -3
आरोपी के मोबाइल से वीडियो बनाने की बात कही गई थी लेकिन विवेचक ने आरोपी का मोबाइल जब्त कर उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजना भी उचित नहीं समझा। न यह जानने की कोशिश की कि उसमें कोई वीडियो था भी या नहीं। अगर डिलीट है तो उसे रिकवर कराने की कोशिश भी नहीं की गई।
बिंदु -4
पीडि़ता ने अपनी आपत्ति में कहा कि मेडिकल कराने के दौरान बिना उसकी मर्जी के लिख दिया गया कि वह आंतरिक परीक्षण नहीं कराना चाहती और उसका अंगूठा निशान लगवा लिया गया था।