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जरूरत की 23 चीजों पर जीएसटी दर हुई कम, जानिए अब क्या-क्या हुआ सस्ता
Sun, 23 Dec 2018 01:42 PM IST
दुष्यंत शर्मा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 23 Dec 2018 01:42 PM IST
सार
- 28 प्रतिशत से घटकर 18 और 12 हुआ जीएसटी, 20 से 30 रुपये सस्ती होगी सीमेंट
- जीएसटी काउंसिल के फैसले से उपभोक्ता खुश, महंगाई से मिलेगी निजात
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जीएसटी
विस्तार
जरूरत की 23 वस्तुओं पर जीएसटी दर कम करने के फैसले पर कानपुर शहर के लोगों ने खुशी जताई है। जीएसटी काउंसिल के इस फैसले को विपक्ष भले ही चुनावी तैयारियों का आगाज कहे, लेकिन कम हुआ टैक्स आम आदमी को राहत जरूर पहुंचाएगा। सबसे बड़ी राहत सीमेंट से टैक्स की दर कम करना है। सीमेंट पर अब 28 के बजाय 18 फीसदी ही टैक्स देना होगा।
यानी सीमेंट की बोरी अब 20 से 30 रुपये सस्ती होगी। टैक्स कम होने से सीमेंट की कालाबाजारी भी रुकेगी। जीएसटी काउंसिल ने शनिवार को 23 वस्तुओं से जीएसटी की दर 28 से घटाकर 18 और 12 कर दी। अब 28 फीसदी की दर में सिर्फ वही वस्तुएं हैं, जो विलासिता की श्रेणी में हैं। जैसे तंबाकू, सिगरेट जैसी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक चीजें। जिन वस्तुओं पर टैक्स कम हुआ है, उनमें इलेक्ट्रॉनिक, कृषि, भवन निर्माण सामग्री आदि शामिल हैं।
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यानी सीमेंट की बोरी अब 20 से 30 रुपये सस्ती होगी। टैक्स कम होने से सीमेंट की कालाबाजारी भी रुकेगी। जीएसटी काउंसिल ने शनिवार को 23 वस्तुओं से जीएसटी की दर 28 से घटाकर 18 और 12 कर दी। अब 28 फीसदी की दर में सिर्फ वही वस्तुएं हैं, जो विलासिता की श्रेणी में हैं। जैसे तंबाकू, सिगरेट जैसी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक चीजें। जिन वस्तुओं पर टैक्स कम हुआ है, उनमें इलेक्ट्रॉनिक, कृषि, भवन निर्माण सामग्री आदि शामिल हैं।
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महंगाई का बोझ सहन करना पड़ रहा था
जीएसटी
कानपुर शहर की जनता ने इसे हाथों-हाथ लिया है। अनिल कुमार शुक्ला ने कहा कि उपभोक्ताओं की जरूरत वाली वस्तुओं पर 28 फीसदी टैक्स लेना किसी लिहाज से ठीक नहीं था। इससे जनता को बिना वजह महंगाई का बोझ सहन करना पड़ रहा था। जनता को राहत देने लिए जीएसटी काउंसिल का यह फैसला उचित है।
प्रवीण मिश्रा ने कहा कि जीएसटी की बढ़ी दरों का असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा था। शनिवार को 23 वस्तुओं से टैक्स की दर कम करना राहत देने वाला है। अभी भी यह देखना होगा कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर टैक्स की दर पांच फीसदी से ज्यादा न हो। शिवांगी अवस्थी ने कहा कि डीजल और पेट्रोल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए ताकि जीएसटी काउंसिल उपभोक्ताओं के हित में इसके बढ़ते दामों पर नियंत्रण लगा सके।
प्रवीण मिश्रा ने कहा कि जीएसटी की बढ़ी दरों का असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा था। शनिवार को 23 वस्तुओं से टैक्स की दर कम करना राहत देने वाला है। अभी भी यह देखना होगा कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर टैक्स की दर पांच फीसदी से ज्यादा न हो। शिवांगी अवस्थी ने कहा कि डीजल और पेट्रोल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए ताकि जीएसटी काउंसिल उपभोक्ताओं के हित में इसके बढ़ते दामों पर नियंत्रण लगा सके।
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टैक्स की दर कम करना राहत देने वाला
जीएसटी
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों पर अधिक से अधिक टैक्स लगे ताकि उसका इस्तेमाल कम हो। वहीं अदिति शुक्ला ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद भी रोज इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के दाम में कोई कमी नहीं आई थी।
दरअसल टैक्स की दर इतनी ज्यादा थी कि जीएसटी का लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा था। सरकार ने इस ओर ध्यान दिया यह अच्छा है। भविष्य में भी टैक्स दरें नियंत्रित रहें तभी उपभोक्ताओं को महंगाई से थोड़ी राहत मिलेगी।
दरअसल टैक्स की दर इतनी ज्यादा थी कि जीएसटी का लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा था। सरकार ने इस ओर ध्यान दिया यह अच्छा है। भविष्य में भी टैक्स दरें नियंत्रित रहें तभी उपभोक्ताओं को महंगाई से थोड़ी राहत मिलेगी।