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GST Commissioner case: एक दिन में नहीं पनपा भ्रष्टाचार, जानें कैसे "कुंद हुई जीएसटी की धार"
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 07 Feb 2018 02:01 PM IST
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संसार चंद्र
- फोटो : अमर उजाला
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सेंट्रल जीएसटी कार्यालय का भ्रष्टाचार कोई एक दिन में नहीं पनपा। दरअसल, सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स (सीबीईसी) के सिस्टम में ही खामी है। इसी का फायदा उठाकर संसार चंद ने यहां दो साल में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को चरम पर पहुंचा दिया। नतीजा ये रहा कि इसी सिस्टम ने जीएसटी की धार को कुंद कर दिया।
संसार चंद्र
सेंट्रल जीएसटी कार्यालय में बीते दो साल से एडिशनल कमिश्नर रैंक के तीन पद खाली हैं। कमिश्नर से एक पद नीचे वाले अधिकारियों के न होने का फायदा संसार चंद ने खूब उठाया। संसार चंद ने अपने सहयोगी अधीक्षकों को छोड़करअन्य अफसरों पर इतना रुतबा झाड़ रखा था कि कोई उनके कामकाज पर दखल देने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।
डेमो पिक
संसार चंद के काम का तरीका था कि जो काम के नहीं हैं उनसे दूरी बनाकर रखी जाए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि संसार चंद ने अपनी पहुंच का फायदा उठाकर ही कानपुर में तीन एडिशनल कमिश्नर के खाली पदों में से एक में भी किसी दूसरे को नहीं आने दिया। इसके पीछे अलग अलग कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग बोर्ड को भी दोषी ठहरा रहे हैं। सेंट्रल जीएसटी कार्यालय में जूनियर और सीनियर अफसरों के बीच गैप होने की वजह से ही संसार चंद मनमर्जी करते थे।
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क्या करता रहा विभाग का विजिलेंस विंग
पकड़े गए आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स का नाम अब बदल गया है। इसी बजट में सरकार ने इसका नाम सेंट्रल बोर्ड ऑफ इन डायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम्स रखा है। नाम भले ही बदल गया हो लेकिन कार्य पद्धति पहले जैसी ही है। अफसरों की मानसिकता और काम के तरीके में बदलाव नहीं आया। विभागीय अफसर भी मानते हैं कि सीबीईसी में आयुक्तालयों की निगरानी की व्यवस्था बहुत लचर है। विभाग का खुद का विजिलेंस विंग होने के बाद भी कानपुर आयुक्तालय में अनवरत भ्रष्टाचार होता रहा, लेकिन इसकी भनक तक नहीं किसी को नहीं लगी। बताते हैं कि इसकी भनक जानबूझ नहीं लगने दी गई।