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ग्राउंड रिपोर्ट: वीरान हो गया हंसता-खेलता गांव कुरसौली, मकानों में लगा ताला, 10 लोगों की हो चुकी है मौत

Thu, 16 Sep 2021 10:08 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 16 Sep 2021 10:08 AM IST
सार

बुखार और डेंगू ने इस गांव की अर्थव्यवस्था भी तोड़ दी। गांववालों का कहना है कि कारोबार बंद है और कुरसौली का नाम बताने पर बाहर भी काम नहीं मिल रहा है। नहर पटरी से बाएं घूमते ही कल्याणपुर ब्लॉक के इस गांव की व्यथा सामने आ जाती है।

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Ground report: Village Kursauli laughing deserted, houses locked, 10 people have died
वीरान हो गया हंसता-खेलता गांव कुरसौली - फोटो : amar ujala

विस्तार

हंसता-खेलता कुरसौली गांव बुखार और डेंगू से वीरान हो गया है। 26 दिन में 10 मौतों से गांव वालों का हौसला टूट गया है। वे अब गांव छोड़कर भाग रहे हैं। गांव के 80 फीसदी घर खाली हो गए हैं। गांव में करीब 500 घर हैं। जिन गलियों में बुजुर्गों और बच्चों की जमघट लगती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
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बुखार और डेंगू ने इस गांव की अर्थव्यवस्था भी तोड़ दी। गांववालों का कहना है कि कारोबार बंद है और कुरसौली का नाम बताने पर बाहर भी काम नहीं मिल रहा है। नहर पटरी से बाएं घूमते ही कल्याणपुर ब्लॉक के इस गांव की व्यथा सामने आ जाती है। गांव में घुसते ही रास्ते के दाएं-बाएं बने घरों पर ताला लगा है।
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बच्चे, महिलाएं नजर नहीं आते। एक-दो घरों की दालान में बीमार व कराहते बुजुर्ग दिख जाते हैं। बरगदवाली गली के घरों के बच्चे अब नहीं हैं, परिजनों ने उन्हें ननिहाल या किसी रिश्तेदार के यहां भेज दिया है। जिस गली में मौत हुई, वे मरघट सी नजर आ रही हैं। जो इक्का-दुक्का घर खुले हैं, उनकी दहलीज पर बैठे लोग यहां आने वाले आगंतुक को फटी-फटी आंखों से देखने लगते हैं।
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Ground report: Village Kursauli laughing deserted, houses locked, 10 people have died
घर छोड़ कर जा रहे लोग - फोटो : amar ujala
गांव के संजय, ज्वाला, अभिषेक बताते हैं कि फॉगिंग न होने से लोगों का हौसला टूट गया। उनकी जान की किसी को परवाह नहीं है। प्रमुख सचिव अनिल गर्ग के आने के एक दिन पहले फॉगिंग हुई तो लगा कि बीमारी खत्म होगी। इसके बाद प्रधान अमित सिंह ही जो करा पा रहे हैं, कर रहे हैं।

फॉगिंग न होने से घबराहट होने लगी और मौतें तो लगातार हो ही रही हैं। लोगों ने बताया कि आधे गांव के लोग प्लंबर का काम करते हैं, अब जब काम के लिए जा रहे हैं, तो उनसे कुछ दिन बाद आने के लिए कहा जा रहा। नहर पटरी मार्केट बंद है। गांववालों की दुकानें बंद हैं। राशन कोटेदार चंदन के बच्चे भी बुखार की चपेट में हैं, इससे राशन की दुकान भी नहीं खुल रही है।

गांव में फॉगिंग कराई जा रही है। बुधवार को नहीं हुई है। इसकी रिपोर्ट भी मंगाते हैं। जहां नहीं हुई बताएं, वहां करवा देते हैं।
सुरेश निगम, एडीओ पंचायत

Ground report: Village Kursauli laughing deserted, houses locked, 10 people have died
सूनी पड़ी गांव की गलियां - फोटो : amar ujala
अभी तक नहीं हुई कुरसौली के पानी की जांच
बुखार और डेंगू से तबाह हो रहे कुरसौली के पानी की अभी तक जांच नहीं की गई। जो रोगी मरे हैं, उनकी डेंगू, मलेरिया और कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है। ऐसी स्थिति में स्क्रब टाइफस के साथ लैप्टोस्पायरोसिस की भी डॉक्टर आशंका जता रहे हैं। लैप्टोस्पायरोसिस संक्रमित पानी से फैलता है। जांच में हद दरजे की लापरवाही की गई है। पानी की एक बोतल जांच के लिए नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग तक नहीं भेजी जा सकी।

डीपीआरओ कमल किशोर का कहना है कि पानी की जांच कराना उनकी जिम्मेदारी नहीं है, यह स्वास्थ्य विभाग कराता है। सीएचसी प्रभारी डॉ. अविनाश यादव ने बताया कि दवा का छिड़काव कराया जा रहा है लेकिन पानी का सैंपल नगर निगम ने नहीं भेजा गया। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पानी की जांच कराने की जिम्मेदारी बिठूर नगर पंचायत की है। 

कुरसौली में हुई मौतें
1-तन्नू पुत्री शिवलाल प्रजापति (मौत-20 अगस्त)
2-शिवराम प्रजापति पुत्र स्व. मालीराम (मौत-3 सितंबर)
3-जूली गौतम पुत्री हरिशंकर (मौत-4 सितंबर)
4-पार्वती पत्नी जगन्नाथ (मौत-5 सितंबर
5-लक्ष्मी प्रजापति पत्नी राधेश प्रजापति (मौत-7 सितंबर)
6- सोनाली गौतम पुत्री राकेश गौतम (मौत-8 सितंबर)
7-लक्ष्मी गौतम (आशा कार्यकर्ता) पत्नी शिव बालक (मौत-9 सितंबर)
8 क्षमा तिवारी पत्नी भुल्लू तिवारी (मौत-10 सितंबर)
9  निर्मला तिवारी पत्नी चंद्रशेखर तिवारी (मौत-14 सितंबर)
10 वैष्णवी (वैभवी) (8) पुत्री पिंटू गुप्ता (मौत-14 सितंबर)

बीमारी कुरसौली में, दवा बांटी पड़ोसी गांवों में
कुरसौली में रोग बढ़ने के पीछे स्वास्थ्य विभाग की गलत रणनीति भी है। जब कुरसौली में बीमारी फैली तो स्वास्थ्य विभाग ने कुरसौली पर ध्यान केंद्रित करने के बजाए आसपास के गांवों को बचाने की फिक्र में ऊर्जा खराब कर दी। कुरसौली पर ध्यान नहीं दिया गया और रोग बढ़ता गया। बिना यह जाने कि कौन सा रोग लोगों की जान ले रहा है, महकमा अपनी ख्याली रणनीति पर काम करने में जुट गया।

कुरसौली में जब एक के बाद एक मौत होने लगी तो स्वास्थ्य विभाग घबरा गया। कुरसौली को बचाने के बजाए यह कोशिश में सारा अमला जुट गया कि कहीं रोग दूसरे गांवों में न फैल जाए। कुरसौली में स्थायी रूप से रातो-दिन कैंप करने के बजाए आसपास के गांवों में कैंप लगने लगे। कुरसौली में एक दिन छोड़कर सामान्य तरीके एक डॉक्टर फार्मासिस्ट के साथ दवा लेकर बैठ जाता।

इससे घबराए गांवों वालों को लगा स्वास्थ्य विभाग उनके प्रति लापरवाह है। कैंप में कुछ लोग सामान्य दवाएं लेने गए और जो गंभीर रूप से बीमार पड़ा, वे सीधे निजी अस्पतालों में गया। गांववाले दिखाने के लिए सीएचसी तक नहीं गए। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह का तर्क है कि कुरसौली में इलाज के साथ आसपास के गांवों को बचाना जरूरी है जिससे रोग अन्य गांवों न फैले। 
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