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कानपुर सेंट्रल पर ट्रेनों का लोड कम करेगा गोविंदपुरी टर्मिनल

Sun, 15 Jan 2017 02:46 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 15 Jan 2017 02:46 PM IST
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govindpuri terminal would reduce load on kanpur central
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल - फोटो : अमर उजाला
कानपुर आये रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ने बताया कि कानपुर सेंट्रल पर ट्रेनों का लोड कम करने के लिए गोविंदपुरी टर्मिनल तैयार किया जा रहा है। इसका काम तेजी से चल रहा है। जून-2017 में यह टर्मिनल काम करने लगेगा। तब कुछ ट्रेनों को वहीं से संचालित किया जाएगा। फिलहाल अभी कौन कौन सी ट्रेनें गोविंदपुरी टर्मिनल में शिफ्ट होंगी, इस बारे में मंथन चल रहा है। उन्होंने बताया कि झकरकटी और पुराना रेलवे स्टेशन के पास स्थित कोचिंग कांप्लेक्स बेहतर हैं। यहां स्टेबलिंग लाइन और बढ़ाई जाएंगी, ताकि ट्रेनों की साफ-सफाई में लगने वाला समय और कम किया जा सके। 
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सेंट्रल होगा विश्वस्तरीय 
चेयरमैन ने बताया कि देश में 400 स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाए जाने का योजना पर काम शुरू कर दिया गया। प्रथम चरण में 23 स्टेशनों पर रिडेवलपमेंट किया जाना है। इसमें कानपुर सेंट्रल भी शामिल है। इसके तहत स्टेशन की साफ-सफाई, खान-पान और यात्रियों के आवागमन के लिए स्वचलित सीढ़ियां, लिफ्ट, स्कैनर समेत सुविधाएं मुहैया होंगी। सुरक्षा के और पुख्ता इंतजाम होंगे। 
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2020 तक ट्रेनें राइट टाइम
चेयरमैन ने कहा कि ट्रेनों को राइट टाइम चलाने के लिए योजना तैयार की गई है। 2020 तक ट्रेनों का समय से संचालन करने का लक्ष्य है। इस ओर काम भी शुरू कर दिया गया है। इसी के तहत डेडीकेटेड फ्रैट कारीकोड, फ्लाईओवर और झांसी लाइन के दोहरीकरण समेत देश में विभिन्न योजनाओं पर काम चल रहा है। इसकी शुरूआत गोविंदपुरी टर्मिनल से गाडियों के संचालन के साथ होगी। 
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एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ेंगे कोच
चेयरमैन ने बताया कि हादसों में जनहानि को कम करने के लिए ट्रेनों में सीबीसी कप्लर कोच (सेंट्रल बफर कपलिंग) लगाने का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि कुल 55 हजार में से 8 हजार कोचों में सीबीसी कप्लर फिट किए जा चुके हैं। अन्य 47 हजार कोचों में यह कप्लर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। अगले साल जो भी नए कोच बनेंगे, उनमें सीबीसी कप्लर का ही इस्तेमाल होगा। उन्होंने सीबीसी कप्लर के बारे में बताते हुए कहा कि इस कप्लर के लगने से हाईस्पीड के दौरान हादसा होने पर भी कोच एक-दूसरे पर नहीं चढ़ पाएंगे। इससे जनहानि की आशंका कम रहेगी। फिलहाल इन कप्लरों को राजधानी और शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेनों में फिट किया जा चुका है। 
फ्लाईओवर बनाने का होगा प्रस्ताव 
चेयरमैन एके मित्तल ने कहा कि कानपुर एक ऐसा स्टेशन है, जहां चारों दिशाओं से ट्रेनों का आवागमन होता है। कानपुर सेंट्रल पर बांदा, झांसी, फर्रुखाबाद, लखनऊ और दिल्ली-हावड़ा की गाड़ियां आती-जाती हैं। लखनऊ से झांसी की ओर जाने वाली ट्रेन क्रास मूवमेंट के कारण दूसरे ट्रैक को प्रभावित करती हैं। इससे उस ट्रैक पर आने वाली ट्रेनों को रोके जाने से वह लेट होती हैं। ट्रेन की लेटलतीफी को कम करने और क्रास मूवमेंट का खत्म करने के लिए फ्लाईओवर बनाए जाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव आगामी बजट में शामिल किया जाएगा। फ्लाईओवर बनने से क्रास मूवमेंट की वजह ट्रेन सीधे अपने ट्रैक पर पहुंचाएंगी। 
चेयरमैन ने किया निरीक्षण
कानपुर देहात के पुखरायां, रूरा, नगर के मंधना और उन्नाव के गंगापुल पर एक के बाद एक हुए रेल हादसों को रेल मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। इसी के चलते रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अपनी टीम के साथ शुक्रवार रात शहर आए। शनिवार सुबह वह फजलगंज स्थित विद्युत लोको शेड पहुंचे। वहां का कामकाज देखा। इसके बाद विभागीय अफसरों के साथ रेल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को लेकर चर्चा की। इसके बाद फजलगंज में ही स्थित विद्युत प्रशिक्षण केंद्र पहुंचे और निरीक्षण किया। फिर वह भीमसेन स्टेशन पहुंचे और ट्राली से ट्रैक का निरीक्षण किया। 
अंदाज से नहीं, तकनीक से काम करो 
भीमसेन-पनकी में रेलवे ट्रैक और सिग्रल का निरीक्षण करने पहुंचे रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ट्रैक में खामी देख उखड़ गए और मातहतों की जमकर क्लास लगाई। कहा कि तुम लोग सब काम अंदाज से करते हो। हादसों के लिए कर्मचारी भी काफी हद तक दोषी हैं। करीब डेढ़ घंटे तक चेयरमैन ने भीमसेन स्टेशन से गोगूमऊ स्टेशन तक रेलवे ट्रैक और सिग्रल का निरीक्षण कर लौटे। 

एक इंजीनियर से सवाल किया कि मेंटीनेंस का तरीका क्या है। जबाव संतोषजनक न पाकर वह बोले, कि घर जाकर होमवर्क करो। इस दौरान कर्मचारियों से उन्होंने एक नट दिखाते हुए पूछा कि इसमें किस नंबर की रिंच फिट होगी। कर्मचारी सही जबाव नहीं दे सके तो बोले, बाइक मैकेनिक की तरह 25 रिंच लेकर काम करते हो। जानकार होने के नाते तुम लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई है, लेकिन सबकुछ अंदाज से करते हो। ऐसे काम नहीं चलेगा। उन्होंने ट्रैक और सिग्रल में कई और खामियां भी पाई तो अफसरों से बोले, जब मेरा आना तय था तब यह हाल है। वैसे तो सब काम अंदाजीगूद्दा ही होता होगा। इस दौरान उनके साथ झांसी डिवीजन के डीआरएम अशोक मिश्रा, कमांडेड आशीष मिश्रा, सीनियर डीसीएम दुर्गेश दुबे, रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य शेख मोहम्मद समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
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