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Kanpur News: औद्योगिक स्वरूप को बढ़ावा देने के लिए नया निवेश लाए सरकार

Wed, 17 Sep 2025 02:38 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 17 Sep 2025 02:38 AM IST
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Government should bring new investment to boost industrial structure
आईआईए भवन में अमर उजाला एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव कार्यक्रम में सम्मनित मुख्य अथिति कैबिनेट मं - फोटो : अमर उजाला
कानपुर। अमर उजाला की ओर से आयोजित एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में उद्घाटन सत्र के बाद अलग-अलग उद्योग संगठनों से जुड़े उद्यमियों का पैनल डिस्कशन हुआ। इसमें उद्यमियों ने कैबिनेट मंत्री और उद्योग विभाग के अफसरों के सामने बेबाकी से अपनी बात रखी। एमएसएमई को बढ़ाने से जुड़े तमाम सुझाव दिए। समस्याओं को बताया। कहा कि एमएसएमई इकाइयां शहर के उद्योगों की रीढ़ हैं जो सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देती हैं। इस दौरान शहर में आईटी पार्क, इलेक्टि्रक व्हीकल (ईवी), डिफेंस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा निवेश लाने, विभाग की कार्यशैली में सुधार लाने, एयरपोर्ट में सुविधाएं बढ़ाने, बड़े शहरों के लिए नियमित और सुबह की उड़ानें शुरू कराने की बात कही गई।
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पहले सत्र में स्थानीय चुनौतियां और अवसर विषय पर चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद ईराकी ने कहा कि एमएसएमई शहर की ग्रोथ इंजन हैं। चर्म उद्योग शहर का बड़ा उद्योग है। मौजूदा समय में ब्यूरोक्रेसी एक बड़ी चुनौती है। उद्योग से जुड़ी क्लीयरेंस आसान प्रक्रिया होनी चाहिए। सिंगल क्लीयरेंस पोर्टल सुविधा लागू हो। इसके अलावा अनुशासित और कुशल श्रमिक उद्योगों को मिलें। इस संबंध में उन्होंने चीन का उदाहरण दिया। उद्यमियों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाने की बात कही। इस दौरान निर्यातकों के लिए लाई गई निर्यात नीति की सराहना की।
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आईआईए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने कहा कि कानपुर का औद्योगिक स्वरूप पीछे हो गया है। शहर में बाहरी निवेश नहीं आ रहा है जो भी निवेश है स्थानीय निवेश है। शहरी नागरिक सुविधाएं बढ़ाई जाएं। बंद पड़ी मिलों की जमीनों का उपयोग किया जाए। आईटी जोन या पार्क, टेक्सटाइल जोन बनाया जाए।
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सीआईआई के चेयरमैन अमित अग्रवाल ने कहा कि शहर में कहने के लिए नाम का एयरपोर्ट है। उद्यमियों को उड़ता हुआ एयरपोर्ट दिया जाए। दिल्ली जाने के लिए सुबह फ्लाइट की सुविधा दी जाए। उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया जाए। तकनीकी रिसर्च पर ज्यादा काम करने की जरूरत है। पीएलआई बहुत अच्छी योजना है। इसका विस्तार और होना चाहिए।
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बड़े उद्योगों को सस्ती, एमएसएमई को महंगी मिलती है जमीन
कानपुर। दूसरे सत्र में कल के एमएसएमई विषय पर पीआईए के मनोज बंका ने कहा कि शहर में भूमि की दरें ज्यादा हैं। बड़े उद्योगों को तो सस्ती लेकिन एमएसएमई को बहुत महंगी जमीन मिलती है। यूपीसीडा की जमीन एमएसएमई की पहुंच से बाहर हैं। 120 करोड़ से ज्यादा की लागत से बना टूल रूम तो सफेद हाथी है। इसकी उपयोगिता पर ही सवाल खड़े हो चुके हैंं। मर्चेंट चैंबर ऑफ उप्र की इंडस्ट्रियल कमेटी के चेयरमैन सुशील शर्मा ने कहा कि एमएसएमई को सरकारी खरीद में बैंक गारंटी से छूट दी जाए। पारस्परिक लोन सुविधा सरल हो। जीएसटी में सरकार ने कुछ राहत दी है। इंजीनियरिंग, केमिकल, प्लास्टिक उद्योग पर भी राहत मिले। डिफेंस सप्लाई पर जीएसटी की दर पांच प्रतिशत की जाए। 50 कर्मचारी वाली यूनिट श्रम कानूनों से बाहर हों।
लघु उद्योग भारती की महिला विंग अध्यक्ष प्रेरणा वर्मा ने कहा कि महिला उद्यमिता को और बढ़ावा दिया जाए। इस क्षेत्र में सफल महिलाओं को रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इससे महिलाएं उद्यमिता के प्रति और प्रेरित होंगी। कॉलेज स्तर से ही उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि बैंकों से लोन मिलना आज भी बेहद कठिन है। नियमों का सरलीकरण किया जाए।
पीआईए के नगर अध्यक्ष सुनील गुप्ता ने कहा कि सरकार उद्यमियों से सारी सब्सिडी वापस ले ले लेकिन नई मशीनों की खरीद पर सब्सिडी दे। इसके अलावा 10 रुपये तक के एफएमसीजी के उत्पादों को सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए आरक्षित कर दें। इससे गांव-गांव में पांच रुपये में मिलने वाले बिस्कुट, साबुन, नमकीन जैसी चीजों के छोटे उद्यम लग सकेंगे।

आईआईटी से आए एक्सपर्ट संदीप पाटिल ने बताया कि एडवांस तकनीक पर काम करने की बहुत जरूरत है। यहां रिवर्स इंजीनियरिंग कोई करना नहीं चाहता है। एमएसएमई में रिसर्च एंड डेवलपमेंट फंड की कमी है। इसका फंड सरकार को बढ़ाना चाहिए जिससे एडवांस टेक्नोलॉजी पर काम हो सके। आज भी उद्योग 10 साल पुरानी मशीनों पर काम कर रहे हैं। आज के काम के लिए अगली पीढ़ी की आधुनिक मशीनों की जरूरत हैं। एक आरएंडडी फंड की जरूरत है जो एमएसएमई फंड को सहयोग करे।
हेड कम्युनिकेशन ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन की अंकिता द्विवेदी ने कहा कि आज से पांच दस साल पहले किसी को भी नहीं पता था कि बिजनेस को आगे बढ़ाने में सोशल मीडिया इतना प्रभाव डालने वाला होगा। इसलिए आजकल एआई, एमएल, आईओटी जैसी आधुनिक तकनीक आ गई हैं। इन्हें एमएसएमई उद्यमी भी प्रयोग करें। एआई, एमएल कोई बड़ी चीज नहीं है। इनका प्रयोग कर सोशल मीडिया के प्रयोग के साथ छोटे-छोटे उद्यमी सिंगल हैंडेड बड़े बिजनेस कर रहे हैं। हमारे एमएसएमई इन तकनीक से वंचित हैं। उसके लिए कोर्स चलाए जाएं उन्हें प्रशिक्षित किया जाए।
आईआईए कानपुर चैप्टर अध्यक्ष आर के अग्रवाल ने कहा कि तकनीक के लिए एकेडमी को साथ आना होगा। कुशल श्रमिकों की समस्या का समाधान बेहद जरूरी है। एमएसएमई को बढ़ावा देने की दिशा में ये बेहद जरूरी है।
यूपी सर्विसेज लीग के अध्यक्ष व रक्षा उत्पाद उद्यमी मेजर योगेंद्र सिंह ने कहा कि एमएसएमई में अपार संभावनाएं हैं। सुझाव है कि सेना से रिटायर्ड काबिल कर्मी हैं जिन्हें उद्यमिता से जोड़कर उनका प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए एक बोर्ड बने जिसमें सेना के रिटायर्ड कर्मी शामिल हों।
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ओडीओपी 2.0 को ड्राफ्ट हो रहा तैयार
कानपुर। उपायुक्त उद्योग एसपी यादव ने बताया कि उद्योगों में तकनीक को बढ़ावा देने, इनकी वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ओडीओपी 2.0 का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा कुशल श्रमिकों को तैयार करने के लिए आईटीआई में पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए भी काम किया जा रहा ौ। उद्योग आधारित पाठ्यक्रमों पर कार्य किया जा रहा है। उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह ने बताया कि जरूरत पड़ने पर ही उद्योग स्थापना होती है। कानपुर में सैन्य छावनी बनी तो सैडलरी बनने लगी, कोलकाता से सूती कपड़ों को लाने में दिक्कत हुई तो शहर में सूती मिलों की स्थापना हुई। शहर में उद्यम की अपार संभावनाएं हैं। जो भी समस्याएं हैं उन्हें दूर कराया जाएगा। संयुक्त निदेशक, एमएसएमई विकास संस्थान कानपुर, वीके वर्मा ने कहा कि सरकारी नियमों का सरलीकरण किया जा रहा है। टूल रूम की उपयोगिता बढ़ाई जाएगी। तकनीक अपग्रेडेशन पर काम किए जाने की आवश्यकता है।

मंथन में आए सुझाव
-कानपुर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी बढ़ाई जाए। दिल्ली के लिए सुबह की फ्लाइट हो।
-उद्योग स्थापना के लिए सस्ती दरों पर जमीनें मिले। श्रम कानून से छोटे उद्योगों को मुक्ति मिले
-शहर में बड़ा निवेश लाया जाए। आईटी, ईवी, टेक्सटाइल पार्क बनाया जाए रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा मिले।
-सरकारी खरीद में एमएसएमई को और वरीयता मिले। डिफेंस सप्लाई में जीएसटी की दर कम से कम हो।
-उद्यमियों के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर हो, महिला उद्यमिता को और बढ़ावा दिया जाए।
-नए-नए सेक्टरों में उद्योग की संभावना के लिए रिसर्च को बढ़ावा दिया जाए।
-रिसर्च एंड डेवलेपमेंट फंड बनाया जाए। उत्पादन पर खास जोर दिया जाए।
-बैंक लोन देने में बैंक अफसरों की मनमानी रोकी जाए।
कैबिनेट मंत्री, उद्यमियों ने की शुरुआत
कानपुर। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश राकेश सचान, विशिष्ट अतिथि ज्वाइंट डायरेक्टर एमएसएमई विकास केंद्र वीके वर्मा, उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष आईआईए आरके अग्रवाल, उपायुक्त उद्योग एसपी यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। संचालन फियो के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान बलराम नरूला, अभिषेक अग्रवाल, अक्षय श्रीवास्तव, सुचेता वाही, आलोक अग्रवाल, हर्षल अग्रवाल, बृजेश अवस्थी, शिव कुमार गुप्ता के अलावा आईआईए, आईआईए महिला विंग, पीआईए, लघु उद्योग भारती, सीआईआई, मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश, चर्म निर्यात परिषद से जुड़े पदाधिकारी, उद्यमी मौजूद रहे।
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