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मशहूर अर्थशास्त्री भावना ने कहा, ‘इंडिया में अच्छी नौकरियों का संकट’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 09 Feb 2017 05:57 PM IST
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जानी मानी अर्थशास्त्री भावना गौतम
- फोटो : अमर उजाला
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तीन साल में 60 फीसदी एफडीआई में बढ़ोतरी हुई है। मांग और निवेश की प्रकृति में बदलाव हुआ है। बावजूद इसके अच्छी नौकरियों और अच्छे रोजगार का संकट है। बड़ी पढ़ाई कराने के लिए देश में लोगों के पास पैसा नहीं है। जो पढ़कर निकल रहे हैं उनके लिए देश में नौकरी नहीं है। नौकरी मिल जरूर रही है लेकिन वह अमीर और गरीब में फर्क बढ़ा रही हैं।
मुंबई से आईं देश की जानी मानी अर्थशास्त्री भावना गौतम दोशी ने मंगलवार को कानपुर मर्चेंट चैंबर सभागार में बजट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के दौरान यह बात कही। भावना वर्ष-2017-18 के आम बजट को कालाधन, भ्रष्टाचार, चुनाव फंडिंग व आर्थिक अपराध खत्म करने की सोच रखने वाला बजट करार दिया है। उन्होंने बताया कि टेक (टीईसी) इंडिया का नारा दिया गया है। टेक में टी से ट्रांसफार्मेशन (बदलाव), ई से एनर्जाइस (ऊर्जावान) व सी से क्लीन (साफ/मुक्त) के व्यापक अर्थ हैं। क्लीन इंडिया के जरिये देश में आर्थिक पारदर्शिता लाने का सपना झलक रहा है।
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मुंबई से आईं देश की जानी मानी अर्थशास्त्री भावना गौतम दोशी ने मंगलवार को कानपुर मर्चेंट चैंबर सभागार में बजट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के दौरान यह बात कही। भावना वर्ष-2017-18 के आम बजट को कालाधन, भ्रष्टाचार, चुनाव फंडिंग व आर्थिक अपराध खत्म करने की सोच रखने वाला बजट करार दिया है। उन्होंने बताया कि टेक (टीईसी) इंडिया का नारा दिया गया है। टेक में टी से ट्रांसफार्मेशन (बदलाव), ई से एनर्जाइस (ऊर्जावान) व सी से क्लीन (साफ/मुक्त) के व्यापक अर्थ हैं। क्लीन इंडिया के जरिये देश में आर्थिक पारदर्शिता लाने का सपना झलक रहा है।
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