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गायत्री रेप मामले की विवेचक सीओ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करना पड़ गया मंहगा
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 08 Apr 2017 01:03 AM IST
सार
-उच्चाधिकारियों को सूचित न करना पड़ा महंगा,
-पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के दुष्कर्म मामले की विवेचक हैं महिला सीओ
-कोतवाल ने रेप पीड़िता की तहरीर पर दर्ज की थी रिपोर्ट
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गायत्री प्रजापति (फाइल फोटो)
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विस्तार
महिला सीओ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करना कोतवाल को महंगा पड़ गया। पुलिस अधीक्षक डीपी सिंह ने उन्हें निलंबित कर दिया है। आरोप है कि कोतवाल ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति से जुड़े रेप मामले की विवेचक सीओ अमिता सिंह पर रेप पीड़िता की दो बच्चियों के अपहरण की रिपोर्ट उच्चाधिाकारियों को सूचना दिए बगैर दर्ज कर ली।
बस फिर क्या था... इस मामले में डीआईजी लखनऊ रेंज प्रवीण कुमार का बयान आ गया। उन्होंने साफ कर दिया कि सीओ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए मामले की विवेचना की है। उनके इस बयान से अपहरण की बात गलत सिद्ध हो गई। जिन्हें भी बयान के लिए लखनऊ लाया गया, उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
अगर किसी को जबरन लाया गया होता तो कोर्ट के सामने सच आ जाता। इधर पुलिस अधीक्षक का कहना है कि नियमानुसार किसी भी अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने से पहले, रिपोर्ट दर्ज करते समय या तत्काल बाद में उच्चाधिकारियों को सूचना देनी चाहिए। कोतवाल ने इस नियम का उल्लंघन किया है। मीडिया से सूचना मिलने पर उन्हें रिपोर्ट की जानकारी हो सकी। इसी आधार पर कार्रवाई कर जांच शुरू की गई है।
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मालूम हो कि शहर कोतवाली में बुधवार रात दुष्कर्म पीड़िता ने लखनऊ की सीओ अमिता सिंह व तीन अज्ञात पर 31 मार्च को दो नाबालिग पुत्रियों का अपहरण कर साजिशन पूर्व मंत्री के पक्ष में बयान दर्ज कराने का आरोप लगाया था। जिन दो बेटियों का अपहरण किया गया, उनमें एक कथित तौर पर दुष्कर्म पीड़िता भी है। इस पर कोतवाल सत्यपाल सिंह ने महिला सीओ व तीन अज्ञात पर अपहरण समेत तीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी।
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बस फिर क्या था... इस मामले में डीआईजी लखनऊ रेंज प्रवीण कुमार का बयान आ गया। उन्होंने साफ कर दिया कि सीओ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए मामले की विवेचना की है। उनके इस बयान से अपहरण की बात गलत सिद्ध हो गई। जिन्हें भी बयान के लिए लखनऊ लाया गया, उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
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अगर किसी को जबरन लाया गया होता तो कोर्ट के सामने सच आ जाता। इधर पुलिस अधीक्षक का कहना है कि नियमानुसार किसी भी अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने से पहले, रिपोर्ट दर्ज करते समय या तत्काल बाद में उच्चाधिकारियों को सूचना देनी चाहिए। कोतवाल ने इस नियम का उल्लंघन किया है। मीडिया से सूचना मिलने पर उन्हें रिपोर्ट की जानकारी हो सकी। इसी आधार पर कार्रवाई कर जांच शुरू की गई है।
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मालूम हो कि शहर कोतवाली में बुधवार रात दुष्कर्म पीड़िता ने लखनऊ की सीओ अमिता सिंह व तीन अज्ञात पर 31 मार्च को दो नाबालिग पुत्रियों का अपहरण कर साजिशन पूर्व मंत्री के पक्ष में बयान दर्ज कराने का आरोप लगाया था। जिन दो बेटियों का अपहरण किया गया, उनमें एक कथित तौर पर दुष्कर्म पीड़िता भी है। इस पर कोतवाल सत्यपाल सिंह ने महिला सीओ व तीन अज्ञात पर अपहरण समेत तीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी।