फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   ganga sanitation resolution day

आज गंगा स्वच्छता संकल्प दिवस, हकीकत सबके सामने, देखें-‘कैसे गंगा हो रहीं मैली’

Thu, 04 May 2017 03:15 PM IST
सुरजीत तिवारी, अमर उजाला, कानपुर
सुरजीत तिवारी, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 04 May 2017 03:15 PM IST
विज्ञापन
ganga sanitation resolution day
कानपुर में इस तरह गंगा में गिर रहे गंदे नाले

गंगा को मैला करने का सबसे बड़ा कारण वो नाला जिसका खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। भीषण बदबूदार फैक्ट्रियों और टेनरियों से निकलने वाला ये गंदा पानी पवित्र गंगा जल को अपवित्र करने में तुला हुआ है। ये दृश्य गंगा की बिगड़ती हालत को बयां कर रहे हैं। यूपी के कानपुर शहर में जाजमऊ के एसटीपी प्लांट से निकलने वाला ‘काला पानी’ हर रोज गंगा में हानिकारक तत्वों को घोलता जा रहा है। जिससे आये दिन मछलियां बड़ी संख्या में मर रही हैं। गौर फरमाने वाली बात तो ये है कि आज गंगा स्वच्छता संकल्प दिवस है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक यूपी सिंह समेत जिला प्रशासन के तमाम अधिकारी गंगा स्वच्छता की बात कह कर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं लेकिन असलियत तो सबके सामने यही है।  

विज्ञापन

डीजल बचाने के लिए जाजमऊ के एसटीपी प्लांट से पानी को बिना फिल्टर किए ही गंगा में भेजा जा रहा है। तमाम दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। ये एयरफोर्स के इमरजेंसी नाले से बहाया जा रहा है। पानी का ओवर फ्लो होने की दशा पर ही इस इमरजेंसी नाले का प्रयोग कर पानी को सीधा गंगा में पहुंचाने के लिए इस नाले को खोला जाता है लेकिन इस इमरजेंसी नाले का दुरुपयोग कर टेनरियों का गंदा पानी उसी हालत में सीधा गंगा में फेंक दिया जा रहा है। ऐसे में गंगा सफाई की बातें करना मजाक सी लगती हैं।  
विज्ञापन

 

वाजिदपुर, जाजमऊ में बना है ये प्लांट

ganga sanitation resolution day
कानपुर की गंगा में गिर रहे गंदे नाले
सीवरेज वाटर ट्रीटमेन्ट प्लांट (एसटीपी) जाजमऊ के वाजिदपुर में बना हुआ है। आसपास के 12 गांवों - पेंओंदी, जाना, किशनपुर, कुलगांव, शेखपुर, अलौलापुर आदि से निकला गंदा पानी इस ट्रीटमेन्ट प्लांट में जाता है। इसके अलावा टेनरियों और फैक्ट्रियों का पानी भी इसी में जाता है। नियम ये कहते हैं कि ट्रीटमेन्ट प्लांट में पानी से हानिकारक तत्वों को हटाकर इसे गंगा में भेजा जाये लेकिन लापरवाही और डीजल बचाने के लिए ट्रीटमेन्ट प्लांट को महीने में दो या तीन बार ही चालू किया जाता है बाकी दिन डायरेक्ट गंदा पानी गंगा में प्रवाहित कर दिया जाता है।  

 

गंगा की तस्वीर अभी बदरंग

ganga sanitation resolution day
गंगा प्रदूषण इस तरह से कानपुर में हो रहा

फिलहाल, गंगा की तस्वीर अभी बदरंग है। कानपुर में गंगा का जल अमृत नहीं जहर हो गया है। वहां उसका एक घूंट जल भी गले के नीचे उतारना जहर पीने जैसा ही होगा। कानपुर का सिद्धनाथ घाट हो या रानी घाट याद ही नहीं आता कि गंगा के इस घाट पर पहले कब डुबकी लगायी थी। अब तो स्नान की कौन कहे, इसके जल का आचमन करने का भी मन नहीं होता है। जानते हैं क्यों? इसलिये कि अब लोग इस सच को अच्छी तरह से जानने लगे हैं।  

विज्ञापन

सीएम योगी के ऐतिहासिक फैसले पर कब होगा एक्शन

ganga sanitation resolution day
गंगा में गिर रहे नाले

कानपुर में गंगा की प्रदूषण से मुक्ति के लिये मुख्यमंत्री ने साहसिक ही नहीं, ऐतिहासिक फैसला भी लिया था। इस फैसले के तहत वह कानपुर शहर की सारी टेनरियों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर शिफ्ट कराने की तैयारी थी। इसके लिये उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रयूबनल(एन.जी.टी.) को दिये गये अपने शपथपत्र में कहा है कि वह कानपुर में गंगा के किनारेे बनी चार सौ टेनरियों को (गैरसरकारी आंकडों के अनुसार सात सौ) हटाने के लिये तैयार हैं। इस मकसद से नई जगह को तलाश करने का प्रस्ताव विचाराधीन हुआ।  पिछली अखिलेश सरकार के समय में भी कानपुर में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिये ऐसा ही प्रस्ताव लाया गया था। लेकिन, वह अखिलेश यादव की सरकार थी और यह योगी की है।  

टेनरी मालिकों की आपत्ति

ganga sanitation resolution day
कानपुर में गंगा प्रदूषण की ये है हालत

टेनरियों के मालिकों का यह कहना रहा है कि इफ्रास्ट्रक्चर के तैयार हुए बिना ही यदि शिफ्टिंग हुई, तो उनके उद्योग की हत्या हो जायेगी। इनकी यह भी दलील है कि बीमार का इलाज किया जाता है। लेकिन, उसे मारा नहीं जाता हैं। कानपुर के चमडा उद्योग से लगभग दो लाख लोगों को रोजगार मिलता है। अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 20 लाख लोग इस उद्योग से अपनी रोजीरोटी चला रहे हैं। इस संबंध में स्माल टेनर्स एसोसियेशन के सचिव नैयर जमाल ने कहा है कि सरकार को चाहिये कि वह पहले आधारभूत ढांचा तैयार करें। इसके बाद बेस बनाने और शिफ्ंटिग में लगभग दस साल लग जायेंगे। इसी के साथ इन्होंने यह सवाल भी उठाना चाहा है कि क्या नइ्र्र जगह पर लोग उन्हें स्वीकार कर सकेंगे? वहां के लोग भी हम पर अपने इलाके को नरक बनाने का आरोप लगायेंगे। इतने बडे फैसले किये जा रहे हैं। लेकिन, इस इंडस्ट्री की बात सुनने के लिये भी कोई तैयार नहीं है। 
 

‘ट्रैस ब्रूम स्टीमर सिस्टम’ से कैसे निर्मल होंगी गंगा

ganga sanitation resolution day
गंगा प्रदूषण की ये हालत

नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा की गंदगी को साफ करने के लिए कानपुर के सीसामऊ नाले में अत्याधुनिक सिस्टम लगाया जा रहा है। यहां ट्रैस ब्रूम स्टीमर सिस्टम से नदी की ऊपरी सतह की गंदगी साफ होगी। यह सिस्टम चार-पांच दिन में काम करना शुरू कर देगा। यह एक तरह की छलनी जैसा है जो गंगा से गंदगी को छान-छान कर इकट्ठा करेगा। केंद्र सरकार की तरफ से गंगा की सफाई के लिए कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी सहित पांच शहरों में विशेष तरह की मशीनें लगाई जा रही हैं। इन्हें लगाने और तीन साल तक संचालन करने की जिम्मेदारी कांफीडेंट इंजीनियरिंग इंडिया लिमिटेड कंपनी को सौंपी गई है। इस कंपनी के अधिकारी हर्ष कुमार ने बताया कि सीसामऊ नाले के आगे गोलाई में 30 मीटर लंबा ट्रैस बूम लगाया जा रहा है। ट्रैस बूम में ऊपर की तरफ बैलून की तरह फूला हुआ हिस्सा होता है, जो उससे टकराने वाली गंदगी को वहीं रोकेगा, जबकि उसमें नीचे की तरफ डेढ़ फीट लंबी जाली लगी होती है।यह जाली ट्रेस बूम को उसी स्थान पर स्थिर रखती है। इसमें टकराकर हल्का कूड़ा, पॉलीथिन आदि भी पानी की सतह पर आ जाते हैं। ट्रेस स्टीमर से सतह का कूड़ा एकत्रित किया जाएगा। इस कूड़े-कचरे को गंगा से 50 मीटर दूर एकत्रित किया जाएगा, जहां से नगर निगम इसे उठाकर ले जाएगा। नगर निगम अफसरों ने बताया कि यह सिस्टम शहर के सबसे बड़े नाले सीसामऊ नाले में लगाया जा रहा है। इस व्यवस्था और इसके फायदों का आकलन कर केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed