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कानपुर में गंगाजल खतरे में

Sun, 25 Sep 2016 06:43 PM IST
मनोज चौरसिया, कानपुर
मनोज चौरसिया, कानपुर Updated Sun, 25 Sep 2016 06:43 PM IST
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Ganga of Kanpur in danger
गंगाजल
‘कानपुर में गंगाजल’ खतरे में है। क्योंकि  टेनरियों के जहरीले पानी का शोध करने वाला सीईटीपी (कॉमन इन्फ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) बंदी की कगार पर है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर इसके संचालन के लिए बकाया 27.01 करोड़ रुपये मांगे हैं। धन न मिलने पर प्लांट बंद करने की आशंका भी जताई है। ऐसा हुआ तो जहरीला पानी सीधे गंगा में जाकर गंगाजल को प्रदूषित करेगा।
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गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई बाजिदपुर (जाजमऊ) के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में स्थापित 36 एमएलडी (3.6 करोड़ लीटर) सीईटीपी प्लांट का भी संचालन करती है। इस प्लांट में रोजाना टेनरियों से निकल रहा 0.9 करोड़ लीटर क्रोमियम युक्त जहरीला पानी और शेष सीवरेज मिलाकर शोधित किया जाता है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक एके गुप्ता के अनुसार सीईटीपी प्लांट के संचालन के मद में नगर निगम पर 31 मार्च 2016 तक 27.01 करोड़ रुपये बकाया था। चालू वित्तीय वर्ष में भी 6.20 करोड़ रुपये अवशेष हो गए हैं। भुगतान न होने से सीईटीपी प्लांट संचालन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यदि नगर निगम अपनी सुविधानुसार माहवार किश्त निर्धारित कर धन उपलब्ध करा देता है तो सीईटीपी का संचालन सुचारू रूप से होता रहेगा, वरना धनाभाव में यह प्लांट प्रभावित होने की आशंका है।
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