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एचबीटीयू में एक और फर्जीवाड़ा: निरस्त जाति प्रमाणपत्र पर मिल गई नौकरी, स्क्रीनिंग कमेटी की जांच पर उठे सवाल
Thu, 23 Jun 2022 02:32 PM IST
शिखा पांडेय
शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर
शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 23 Jun 2022 02:32 PM IST
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एचबीटीयू
- फोटो : सोशल मीडिया
हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में गड़बड़ी का एक और मामला सामने आया है। विवि प्रशासन ने एक ऐसे अभ्यर्थी को सिविल इंजीनियरिंग विभाग में नौकरी दे दी जिसका जाति प्रमाणपत्र निरस्त हो चुका था। छह महीने से यह असिस्टेंट प्रोफेसर वेतन भी पा रहे हैं।
विवि में हुई भर्ती प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सबसे पहले एक ही विज्ञापन पर अलग अलग समय में विभागों में नियुक्ति की गई। इसके बाद नियुक्ति के दौरान स्क्रीनिंग कमेटी ने प्रमाण पत्रों की जांच तक को अनदेखा कर दिया। सिविल इंजीनियर विभाग में जिस अभ्यर्थी को नियुक्ति दी गई है, उसने 2009 में जारी हुआ जाति प्रमाण पत्र आवेदन के साथ लगाया था।
इस प्रमाणपत्र को डीएम कार्यालय ने 2016 में निरस्त कर दिया था। इसके बाद अभ्यर्थी ने प्रमाणपत्र को निरस्त करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामला विचाराधीन है, फिर भी विवि प्रशासन ने नियुक्ति दे दी। अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव ने बताया कि यदि दस्तावेज संबंधी मामला कोर्ट में विचाराधीन है और उस पर स्टे नहीं है तो संस्थान संबंधित दस्तावेज को प्रमाणित नहीं मान सकता है।
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विवि में हुई भर्ती प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सबसे पहले एक ही विज्ञापन पर अलग अलग समय में विभागों में नियुक्ति की गई। इसके बाद नियुक्ति के दौरान स्क्रीनिंग कमेटी ने प्रमाण पत्रों की जांच तक को अनदेखा कर दिया। सिविल इंजीनियर विभाग में जिस अभ्यर्थी को नियुक्ति दी गई है, उसने 2009 में जारी हुआ जाति प्रमाण पत्र आवेदन के साथ लगाया था।
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इस प्रमाणपत्र को डीएम कार्यालय ने 2016 में निरस्त कर दिया था। इसके बाद अभ्यर्थी ने प्रमाणपत्र को निरस्त करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामला विचाराधीन है, फिर भी विवि प्रशासन ने नियुक्ति दे दी। अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव ने बताया कि यदि दस्तावेज संबंधी मामला कोर्ट में विचाराधीन है और उस पर स्टे नहीं है तो संस्थान संबंधित दस्तावेज को प्रमाणित नहीं मान सकता है।
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प्रमाणपत्र के निरस्त होने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. समशेर, कुलपति