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आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर को है 'जान जाने का डर', जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ उनके साथ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 07 Sep 2018 02:23 PM IST
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आईआईटी कानपुर
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आईआईटी कानपुर में दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला के उत्पीड़न मामले में शुक्रवार को बोर्ड आफ गर्वनेंस (बीओजी) की बैठक में बहस के बाद बोर्ड चेयरमैन आरसी भार्गव ने चारों सीनियर प्रोफेसरों को नोटिस भेजकर 15 दिनों में जवाब तलब किया है। जवाब मिलने के बाद उसे एक अक्टूबर को फिर होने वाली बीओजी की बैठक में रखा जाएगा। सर्विस रूल्स के उल्लंघन में चारों प्रोफेसरों को सस्पेंड किया जा सकता है। यही कारण है कि आईआईटी के कई प्रोफेसरों ने चारों सीनियर प्रोफेसरों के समर्थन में खुला ऐलान कर दिया है। प्रोफेसरों ने पूरे प्रकरण को साजिश ठहराते हुए कहा कि अगर किसी पर भी कोई कार्रवाई होती है तो सामूहिक तौर पर कई लोग इस्तीफा दे देंगे।
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अभी तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगेंगे
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बीओजी बैठक के मिनट्स अभी नहीं आए हैं। इस मामले में आईआईटी कानपुर के सीनियर प्रोफेसर व आईआईटी धनबाद के निदेशक डॉ. राजीव शेखर, प्रो. सीएस उपाध्याय, प्रो. ईशान शर्मा और प्रो. संजय मित्तल आरोपी हैं। उधर, नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) ने मामले में आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर को 10 सितंबर को तलब किया है। निदेशक से आयोग अध्यक्ष पूरे मामले में अभी तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगेंगे।
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डॉ. सडरेला बोले, वो बड़े लोग, मेरी जान भी ले सकते
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बीओजी की बैठक के बाद डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि आरोपी चारों प्रोफेसरों की पहुंच ऊपर तक है। वो बड़े लोग हैं और मेरी जान भी ले सकते हैं। आरोप लगाया कि बोर्ड के सदस्य दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। वह 10 को एनसीएससी में अपना दर्द बयां करेंगे। अगर आयोग से भी कुछ नहीं होगा तो वह मामले में कोर्ट जाएंगे।