{"_id":"590079fd4f1c1bb526c0c451","slug":"found-a-dead-body-of-a-newborn-baby","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस प्रकरण ने ममता को कर दिया शर्मसार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस प्रकरण ने ममता को कर दिया शर्मसार
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 26 Apr 2017 05:25 PM IST
विज्ञापन
डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में बेटी बचाव बेटी पढाव का प्रचार चाहे जितना ज़ोर शोर से किया जाय लेकिन लगता है इसका असर समाज पर कुछ भी नही हो रहा है आज भी लोग बेटी को अभिशाप मानकर उसे पैदा होने से पहले ही मार डालते हैं। ऐसी ही मानवता को शर्मशार कर देने वाली घटना कानपुर के हरबंश मोहाल थाना क्षेत्र के गडरिया मोहाल में सामने आई है। यहां एक नवजात का शव मिला है।
इस नवजात बच्ची का शव नाली के एक गड्ढे में पड़ा मिल। स्थानीय लोगो ने इसकी सूचना स्थानी थाने में दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
सरकार नारा देती है। "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" लेकिन इस शर्मानक घटना को देखकर सभी मायने बेमाने साबित हो रहे है। यह घटना सभी को मुंह चिढ़ा रही है। इस नवजात को सिर्फ इसलिए नााली में फेंक दिया गया क्योंकी वो एक लड़की थी। जहां केंद्र और राज्य दोनों सरकारे बेटियो को पढ़ाने और बचाने के लिए कई सारी योजनाए चलाती है वही कुछ नासमझ लोग बेटियो के पैदा होने पर आज भी उसे मार देते है।
विज्ञापन
इस घटना को देखते हुए कई सवाल उठते है। क्या उस मां की ममता बिलकुल नहीं पसीजी जिसने उस नवजात को नाले में फेंक दिया। क्या वो मां परिवार से मजबूर थी ऐसा कदम उठाने को। क्या बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा टीवी चैनलों और अखबारों पर ही खत्म हो जायेगा। आखिर बेटियों को मारने वालों पर कब और कैसे कार्यवाही होगी।
विज्ञापन
इस नवजात बच्ची का शव नाली के एक गड्ढे में पड़ा मिल। स्थानीय लोगो ने इसकी सूचना स्थानी थाने में दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
विज्ञापन
सरकार नारा देती है। "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" लेकिन इस शर्मानक घटना को देखकर सभी मायने बेमाने साबित हो रहे है। यह घटना सभी को मुंह चिढ़ा रही है। इस नवजात को सिर्फ इसलिए नााली में फेंक दिया गया क्योंकी वो एक लड़की थी। जहां केंद्र और राज्य दोनों सरकारे बेटियो को पढ़ाने और बचाने के लिए कई सारी योजनाए चलाती है वही कुछ नासमझ लोग बेटियो के पैदा होने पर आज भी उसे मार देते है।
विज्ञापन
इस घटना को देखते हुए कई सवाल उठते है। क्या उस मां की ममता बिलकुल नहीं पसीजी जिसने उस नवजात को नाले में फेंक दिया। क्या वो मां परिवार से मजबूर थी ऐसा कदम उठाने को। क्या बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा टीवी चैनलों और अखबारों पर ही खत्म हो जायेगा। आखिर बेटियों को मारने वालों पर कब और कैसे कार्यवाही होगी।