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पॉक्सो कोर्ट में फर्जीवाड़ा: जमानत निरस्त...फिर भी जेल से बाहर आरोपी, जज से शिकायत के बाद हुई जांच में खुलासा

Sun, 20 Aug 2023 06:40 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 20 Aug 2023 06:40 PM IST
सार

Kanpur News: अधिवक्ता नरेश मिश्रा ने बताया कि 10 अगस्त को जिला जज से मामले की शिकायत की गई थी, जिस पर जिला जज ने जांच अधिकारी की नियुक्ति कर संबंधित फाइल को सील करा दिया था।

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Forgery in POCSO court, Bail cancelled still accused out of jail, investigation revealed after complaint to ju
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में पॉक्सो कोर्ट में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कोर्ट द्वारा जमानत निरस्त करने के आदेश की कूटरचना कर जमानत स्वीकृत का आदेश बनाया गया और जमानतें स्वीकृत कराकर आरोपी को जेल से रिहा करवा दिया गया। पीडि़ता के अधिवक्ता की शिकायत पर जिला जज ने जांच कराई।

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इस पर कोर्ट के पेशकार की मिलीभगत सामने आने पर उसे निलंबित कर दिया गया है। पीड़ित की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कोतवाली में तहरीर भी दी गई है। गुजैनी के पिपौरी निवासी लड़की के साथ छह जून को पड़ोसी नरेंद्र सचान ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया था।
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पीड़िता के पिता ने गुजैनी थाने में नरेंद्र के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने नरेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था। नरेंद्र ने अपर जिला जज 25 की विशेष पॉक्सो अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

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ऑनलाइन ई-कोर्ट में भी अपलोड था आदेश
कोर्ट का आदेश ऑनलाइन ई-कोर्ट में भी अपलोड कर दिया गया। इसके बावजूद एक सप्ताह में ही नरेंद्र जमानत पर जेल से बाहर आ गया और पीड़िता के घर पहुंचकर उसे धमकाया। पीड़िता ने जब अपने अधिवक्ता नरेश मिश्रा के माध्यम से कोर्ट में जानकारी की, तो हैरान रह गए।

जेल भिजवा दिया गया रिहाई परवाना
उन्हें पता चला कि संबंधित न्यायालय के पेशकार अश्वनी, नरेंद्र के पैरोकार व अधिवक्ता की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा कर जमानत निरस्त के आदेश को जमानत स्वीकृत के आदेश में बदल दिया गया और नरेंद्र की जमानत दाखिल कराकर उसका रिहाई परवाना जेल भिजवा दिया गया।

फाइल सील, अभियुक्त दे रहे धमकी
अधिवक्ता नरेश मिश्रा ने बताया कि 10 अगस्त को जिला जज से मामले की शिकायत की गई थी, जिस पर जिला जज ने जांच अधिकारी की नियुक्ति कर संबंधित फाइल को सील करा दिया था। इसके बाद फर्जीवाड़े में लिप्त अभियुक्तों द्वारा लगातार धमकियां दी जा रही थीं।

सेवानिवृत्त हो चुके हैं न्यायाधीश
इसकी शिकायत भी जिला जज से की गई। जांच में दोषी पाए जाने पर कोर्ट के पेशकार अश्वनी को निलंबित कर दिया गया है। जिन न्यायाधीश के कार्यकाल में यह फर्जीवाड़ा हुआ वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विस्तृत जांच कराई जा रही है। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएग।

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