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वोट देने को गले तक पानी में लगाए गोते
पंकज प्रसून, कानपुर
Updated Sat, 10 Oct 2015 02:09 AM IST
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जिला और क्षेत्र पंचायत के पहले चरण के चुनाव में वोट डालने के लिए ग्रामीणों में मतदान करने का जज्बा दिखा। हाथ में वोटर कार्ड लेकर नंगे वदन ककवन क्षेत्र के रिक्खापुरवा गांव के लोग निचली गंगा नहर में गले तक पानी की गहराई में भी उतरने से नहीं डरे। देखने वालों में दांतों तले उंगली दबा ली।
इसी तरह सनिगवां क्षेत्र के अंटावा, भवन नेवादा और नया नेवादा के ग्रामीणों से भरी ट्रैक्टर ट्राली से नदी मेें उतार दी। नदी और बहती नहर से इस पार आने के लिए पुल की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण पिछले कई सालों से पुल निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। इन लोगों को उम्मीद है कि यदि सही व्यक्ति चुनकर क्षेत्र आएगा तो शायद उनकी समस्या का समाधान हो सके।
रिक्खापुरवा करीब पांच सौ लोगों की जनसंख्या वाला ऐसा गांव है, जहां की 90 प्रतिशत आबादी यादव जाति की है। यही के एक बुजुर्ग ग्रामीण मुलायम सिंह यादव को तो जैसे वोट देने की इतनी जल्द थी कि, उन्होंने अपने परिवार के एक बच्चे को अपना कुर्ता-पजामा संभालकर रखने को कहा, और वोटर कार्ड लेकर अंडरवियर पहने नहर में कूद गए।
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एक बार लगा कि वे डूब जाएंगे, लेकिन वहां बांधी गई रस्सी को उन्होंने तैरकर पकड़ लिया और इस पार आ गए। अमित कुमार, संतोष कुमार, सरनाम यादव और बीरु बाथम इन सभी ग्रामीणों ने बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां इसी तरह से जद्दोजहद कर रही हैं। यही हाल पांडु नदी में उतरकर राशन की दुकान तक आने वाले सनिगवां क्षेत्र के लोगों का है। इन लोगों को पुल के रास्ते से आने के लिए छह से दस किलोमीटर का चक्क र लगाना पड़ता है।
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इसी तरह सनिगवां क्षेत्र के अंटावा, भवन नेवादा और नया नेवादा के ग्रामीणों से भरी ट्रैक्टर ट्राली से नदी मेें उतार दी। नदी और बहती नहर से इस पार आने के लिए पुल की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण पिछले कई सालों से पुल निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। इन लोगों को उम्मीद है कि यदि सही व्यक्ति चुनकर क्षेत्र आएगा तो शायद उनकी समस्या का समाधान हो सके।
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रिक्खापुरवा करीब पांच सौ लोगों की जनसंख्या वाला ऐसा गांव है, जहां की 90 प्रतिशत आबादी यादव जाति की है। यही के एक बुजुर्ग ग्रामीण मुलायम सिंह यादव को तो जैसे वोट देने की इतनी जल्द थी कि, उन्होंने अपने परिवार के एक बच्चे को अपना कुर्ता-पजामा संभालकर रखने को कहा, और वोटर कार्ड लेकर अंडरवियर पहने नहर में कूद गए।
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एक बार लगा कि वे डूब जाएंगे, लेकिन वहां बांधी गई रस्सी को उन्होंने तैरकर पकड़ लिया और इस पार आ गए। अमित कुमार, संतोष कुमार, सरनाम यादव और बीरु बाथम इन सभी ग्रामीणों ने बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां इसी तरह से जद्दोजहद कर रही हैं। यही हाल पांडु नदी में उतरकर राशन की दुकान तक आने वाले सनिगवां क्षेत्र के लोगों का है। इन लोगों को पुल के रास्ते से आने के लिए छह से दस किलोमीटर का चक्क र लगाना पड़ता है।