हमीरपुर जिला कारागार में बहू की हत्या में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दंपति के 4 साल के बेटे को जेल की चहारदीवारी से पांच घंटे की निजात मिलेगी। बच्चा अब अपने हम उम्र बच्चों के साथ खेलेगा और शिक्षा ग्रहण करेगा। जेल प्रशासन ने बच्चे का एक स्कूल में दाखिला कराया है। मंगलवार से वह यूनिफार्म पहनकर स्कूल गया तो उसे देख मां-बाप की आंखों से आंसू छलक पड़े। मामला यूपी के हमीरपुर जिले का है।
2016 से बच्चा भी आरोपियों के साथ जिला कारागार में है
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जिला कारागार के मुख्य गेट पर यूनिफार्म पहने खड़ा किशना जेल अधिकारियों के साथ।
जिला कारागार के जेलर प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया हेलापुर गांव निवासी गुड़िया व उसके पति नरेंद्र निषाद हत्या के मामले में 10 जनवरी 2016 से कारागार में बंद हैं। बताया नरेंद्र के छोटे भाई सुरेंद्र की पत्नी संगीता की 31 दिसंबर 2015 को मौत हो गई थी। कोतवाली पुलिस ने गुड़िया व नरेंद्र के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। बाद में पुलिस ने विवेचना के दौरान घटना को हत्या में तरमीम किया।
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जिला कारागार के मुख्य गेट पर यूनिफार्म पहने खड़ा किशना जेल अधिकारियों के साथ।
डिप्टी जेलर अजय कुलवंत व जेल के शिक्षक अखिलेश शुक्ला ने बताया दंपति को न्यायालय ने बीते सात अप्रैल आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों बंदी जिला कारागार में बंद हैं। जिस समय आरोपी दंपति कारागार में निरुद्ध हुए तब वह अपने साथ किशना उर्फ किशन को भी लाए थे। तबसे बच्चा भी आरोपियों के साथ जिला कारागार में है। उन्होंने बताया अब किशना चार वर्ष को हो गया है। उसे अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए मुख्यालय के एक प्राइवेट स्कूल में दाखिला कराया गया है। मंगलवार को किशना यूनिफार्म में एक सुरक्षा कर्मी के साथ स्कूल गया।
स्कूल से छुट्टी होने के बाद सुरक्षा कर्मी किशना को स्कूल से लाकर उसे उसके माता पिता के सुपुर्द किया। बंदी नरेंद्र ने बताया उसके तीन बच्चे हैं। जिसमें पुत्री मोहनी (7) कक्षा चार में व नैंसी कक्षा तीन में है। वह गांव में मां कलावती के साथ रहकर पढ़ाई कर रही हैं। पुत्र किशना के स्कूल जाने की बात पूछने पर नरेंद्र की आंखें भर आईं। उसने कहा जेल में रहते हुए उसके बच्चे के लिए जो किया गया वह एक बड़ी बात है और वह बहुत खुश है।
छह साल तक शिक्षा दिलाएगा जेल प्रशासन
जेलर पीके त्रिपाठी ने बताया किसी बंदी के साथ कारागार आने वाले बच्चे को उसकी छह वर्ष की आयु तक ही जेल में रखे जाने का प्राविधान है। बच्चा छह वर्ष का हो जाएगा तो इसकी परवरिश व अन्य जिम्मेदारी के लिए बंदी के परिजनों को सौंपा दिया जाएगा। यदि बच्चे को परिजन नहीं लेते हैं तो उसे किसी संस्था के सुपुर्द किया जाएगा।