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Kanpur News: गिरने लगा चंबल का जलस्तर, ली राहत की सांस
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इटावा/चकरनगर। लगातार दो दिन तक चंबल का जलस्तर बढ़ने के बाद सोमवार भोर से स्थिर हो गया। सुबह से दोपहर सात घंटे तक जलस्तर स्थिर रहने के बाद दोपहर एक बजे के बाद जलस्तर घटना शुरू हो गया। बाढ़ का पानी घटने से प्रशासन व तलहटी के गांव के लोगों ने राहत की सांस ली। कोटा बैराज से तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद से चंबल खतरे के निशान 120.80 मीटर से ऊपर 123.59 मीटर पर पहुंच गया था। वर्तमान में जलस्तर 120.51 मीटर पर स्थिर है।
रविवार को शाम पांच बजे तक चंबल का जलस्तर 123.13 था तो वहीं सोमवार को भोर पांच बजे जलस्तर बढ़कर 123.59 मीटर पर पहुंचकर खतरे के निशान से 2.79 मीटर ऊपर हो गया। इसके बाद लगभग सात घंटे तक जलस्तर स्थिर बना रहा और दोपहर एक बजे से जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से घटना शुरू हो गया। शाम चार बजे चंबल तक जलस्तर तीन सेंटीमीटर घटकर 123.57 मीटर पहुंच गया। इसी प्रकार यमुना नदी का जलस्तर भी चेतावनी निशान 120.92 मीटर से नीचे 120.51 मीटर पर पहुंच गया है। दोनों नदियों के जलस्तर में वैसे तो यह मामूली गिरावट है लेकिन प्रशासन और ग्रामीण दोनों ने इससे राहत की सांस ली है। हालांकि ग्रामीण मान रहे हैं कि नदी किनारे के गांवों से बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। अभी तक चकरपुरा, हरौली बहादुरपुर, नीमाडाड़ा, निभी, खिरीटी, ककरैया, रानियां गांव का रास्ता जलमग्न हो गया था। यहां तक कि ऐतिहासिक भारेश्वर महादेव मंदिर और सिद्धनाथ मंदिर तक जाने वाले मार्ग भी बंद हो गए थे। हरौली बहादुरपुर के मुख्य रास्ते में पानी भर जाने से हरौली और नीमाडाड़ा गांव के लोगों का आना जाना मुश्किल हो गया था। चंबल के जलस्तर पर जिला व तहसील प्रशासन लगातार नजर रखे हुए है। सोमवार को एसडीएम चकरनगर ब्रह्मानंद कठेरिया ने सहसों चंबल पुल से जलस्तर का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, चंबल और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर घटने लगा है। मंगलवार तक सभी गांवों के रास्ते खुलने की उम्मीद है।
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रविवार को शाम पांच बजे तक चंबल का जलस्तर 123.13 था तो वहीं सोमवार को भोर पांच बजे जलस्तर बढ़कर 123.59 मीटर पर पहुंचकर खतरे के निशान से 2.79 मीटर ऊपर हो गया। इसके बाद लगभग सात घंटे तक जलस्तर स्थिर बना रहा और दोपहर एक बजे से जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से घटना शुरू हो गया। शाम चार बजे चंबल तक जलस्तर तीन सेंटीमीटर घटकर 123.57 मीटर पहुंच गया। इसी प्रकार यमुना नदी का जलस्तर भी चेतावनी निशान 120.92 मीटर से नीचे 120.51 मीटर पर पहुंच गया है। दोनों नदियों के जलस्तर में वैसे तो यह मामूली गिरावट है लेकिन प्रशासन और ग्रामीण दोनों ने इससे राहत की सांस ली है। हालांकि ग्रामीण मान रहे हैं कि नदी किनारे के गांवों से बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। अभी तक चकरपुरा, हरौली बहादुरपुर, नीमाडाड़ा, निभी, खिरीटी, ककरैया, रानियां गांव का रास्ता जलमग्न हो गया था। यहां तक कि ऐतिहासिक भारेश्वर महादेव मंदिर और सिद्धनाथ मंदिर तक जाने वाले मार्ग भी बंद हो गए थे। हरौली बहादुरपुर के मुख्य रास्ते में पानी भर जाने से हरौली और नीमाडाड़ा गांव के लोगों का आना जाना मुश्किल हो गया था। चंबल के जलस्तर पर जिला व तहसील प्रशासन लगातार नजर रखे हुए है। सोमवार को एसडीएम चकरनगर ब्रह्मानंद कठेरिया ने सहसों चंबल पुल से जलस्तर का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, चंबल और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर घटने लगा है। मंगलवार तक सभी गांवों के रास्ते खुलने की उम्मीद है।
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