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इटावा: 18 साल से गांव में रह रही गाय की मौत, हर आंख हुई नम, लोगों ने किया अंतिम संस्कार
Sun, 06 Jun 2021 04:45 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 06 Jun 2021 04:45 PM IST
सार
इटावा के एक गांव में गाय की मौत से पूरा गांव शोक में डूब गया। गाय पिछले कई सालों से गांव में रह रही थी। उसकी मौत पर पूरे गांव की आंख से आंसू बहे।
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गांव के लोगों ने किया गाय का अंतिम संस्कार
- फोटो : amar ujala
विस्तार
इटावा के सैफई ब्लॉक के नगला नरिया गांव में 18 साल से गांव में रहने वाली एक गाय की शनिवार को मौत हो गई। इस पर पूरा गांव शोक में डूब गया। गांव के लोगों ने एकजुट होकर नम आंखों से हिंदू परंपरा के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया।
कहा जाता है कि कुछ रिश्ते खून से बढ़कर होते हैं और मां तो आखिर मां होती है। मां का स्वरूप गाय में देखने वाले नगला नरिया गांव के लोगों में उस समय शोक की लहर फैल गई, जब उन्हें पता चला कि गांव में रहने वाली एक गाय का निधन हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 18 वर्षों से यह गाय गांव में ही रहती थी।
सुबह व शाम को घर घर जाकर अपना पेट भरती थी। गांव के बच्चों व महिलाओं को इस गाय से बहुत अधिक लगाव था। इस वजह से गाय की मौत की खबर सुनकर गांव भर की महिलाएं इकट्ठा हुईं। उन्होंने साड़ियां गाय के मृत शरीर पर ओढ़ाईं। लगभग दस हजार रुपये का चढ़ावा भी चढ़ाया।
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इसके बाद चरण स्पर्श के साथ अंतिम दर्शन कर लोगों ने फूल मालाएं अर्पित की। ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार को गाय फतेह सिंह यादव के दरवाजे के पास बनी नाली में गिर जाने से घायल हो गई थी। गाय के अंतिम संस्कार में पूर्व प्रधान सुखबीर सिंह यादव, प्रधान महंत सिंह, संतोष बाबा, मोहित यादव, बबलू यादव, प्रदीप यादव, छोटे लाल, राकेश, सत्यवीर, अचंभे लाल, लाखन सिंह समेत तमाम लोग शामिल रहे। इस दौरान बच्चों व महिलाओं को सुबगते हुए देखा गया।
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कहा जाता है कि कुछ रिश्ते खून से बढ़कर होते हैं और मां तो आखिर मां होती है। मां का स्वरूप गाय में देखने वाले नगला नरिया गांव के लोगों में उस समय शोक की लहर फैल गई, जब उन्हें पता चला कि गांव में रहने वाली एक गाय का निधन हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 18 वर्षों से यह गाय गांव में ही रहती थी।
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सुबह व शाम को घर घर जाकर अपना पेट भरती थी। गांव के बच्चों व महिलाओं को इस गाय से बहुत अधिक लगाव था। इस वजह से गाय की मौत की खबर सुनकर गांव भर की महिलाएं इकट्ठा हुईं। उन्होंने साड़ियां गाय के मृत शरीर पर ओढ़ाईं। लगभग दस हजार रुपये का चढ़ावा भी चढ़ाया।
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इसके बाद चरण स्पर्श के साथ अंतिम दर्शन कर लोगों ने फूल मालाएं अर्पित की। ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार को गाय फतेह सिंह यादव के दरवाजे के पास बनी नाली में गिर जाने से घायल हो गई थी। गाय के अंतिम संस्कार में पूर्व प्रधान सुखबीर सिंह यादव, प्रधान महंत सिंह, संतोष बाबा, मोहित यादव, बबलू यादव, प्रदीप यादव, छोटे लाल, राकेश, सत्यवीर, अचंभे लाल, लाखन सिंह समेत तमाम लोग शामिल रहे। इस दौरान बच्चों व महिलाओं को सुबगते हुए देखा गया।