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पीएफ में देरी पर नियोजकों को नहीं देनी होगी क्षतिपूर्ति, लॉकडाउन के चलते दी गई राहत
Mon, 25 May 2020 03:45 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 25 May 2020 03:45 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने कंपनियों, प्रतिष्ठान संचालकों को बड़ी राहत दी है। इन संस्थानों ने यदि लॉकडाउन के दौरान का अंशदान नहीं जमा किया है तो क्षतिपूर्ति नहीं देनी होगी। हालांकि 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा। इस संबंध में विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिया है।
पीएफ विभाग के दायरे में आने वाली कंपनी, फर्म, प्रतिष्ठान के कर्मचारियों का अंशदान दूसरे महीने की 15 तारीख तक जमा करना होता है। देरी पर क्षतिपूर्ति और ब्याज देना होता है। चूंकि 25 मार्च से 31 मई तक लॉकडाउन घोषित है। इस वजह से कंपनियों को क्षतिपूर्ति में छूट दी गई है। कर्मचारी कल्याण समन्वय समिति उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला ने कहा कि इससे लॉकडाउन के दौरान नियोजकों को लाभ होगा।
इस तरह लगती है क्षतिपूर्ति
2 महीने देरी पर: पांच प्रतिशत
2 से 4 महीने देरी पर: 15 प्रतिशत
4 से 6 महीने देरी पर 25 प्रतिशत
6 महीने से अधिक की देरी पर: 100 प्रतिशत
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पीएफ विभाग के दायरे में आने वाली कंपनी, फर्म, प्रतिष्ठान के कर्मचारियों का अंशदान दूसरे महीने की 15 तारीख तक जमा करना होता है। देरी पर क्षतिपूर्ति और ब्याज देना होता है। चूंकि 25 मार्च से 31 मई तक लॉकडाउन घोषित है। इस वजह से कंपनियों को क्षतिपूर्ति में छूट दी गई है। कर्मचारी कल्याण समन्वय समिति उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला ने कहा कि इससे लॉकडाउन के दौरान नियोजकों को लाभ होगा।
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इस तरह लगती है क्षतिपूर्ति
2 महीने देरी पर: पांच प्रतिशत
2 से 4 महीने देरी पर: 15 प्रतिशत
4 से 6 महीने देरी पर 25 प्रतिशत
6 महीने से अधिक की देरी पर: 100 प्रतिशत