फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   eliminai in iit kanpur

आईआईटियंस मस्ती संग खोए पुरानी यादों में

Thu, 25 Dec 2014 03:53 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Thu, 25 Dec 2014 03:53 AM IST
विज्ञापन
eliminai in iit kanpur
आईआईटी की एलमनाइ मीट में हिस्सा लेने बुधवार को आए आईआईटियंस ने खूब मस्ती की। अपने परिवार के साथ हॉस्टल, मेस, क्लास रूम, लैब, लाइब्रेरी में जाकर पुरानी यादों में खो गए।
विज्ञापन


सबने आईआईटी के बदले रूप को सराहा और कहा कि यहां के स्टूडेंट्स ने दुनिया में डंका बजा रखा है। वह हर फील्ड में काम कर रहे हैं। इस बैच से आईआईटी को अच्छी गुरु दक्षिणा मिलने की उम्मीद है। इसपर गुरुवार को फैसला होगा।  
विज्ञापन


आईआईटी का दो दिवसीय एलमनाइ मीट बुधवार से शुरू हुआ है। इसका उद्घाटन डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया। फिर मौज-मस्ती का सिलसिला शुरू हुआ। एलमनाइ मीट में वर्ष 1990 बैच के स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बैच में 250 स्टूडेंट्स थे लेकिन 35 स्टूडेंट्स ही कैंपस पहुंच सके हैं। इसमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं, जो कि आईआईटी से पढ़कर निकली हैं। इन सभी ने पुरानी दिनों को याद किया और अपने बच्चों से कहा कि जो कुछ भी मिला, सब यहां के टीचर्स की देन है।

कानपुर के तिलक नगर की रहने वाली और आईआईटी से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद कनाडा में बसने वाली गीतू पाठक अपने तीन बच्चों के साथ आई हैं। इंजीनियरिंग कंपनी चलाने वाली गीतू का कहना है कि बच्चों को आईआईटी के बारे में बताया है।

अब दिखाने लायी हूं, ताकि वह आईआईटी की क्वालिटी से रूबरू हो सकें। गीतू के पति प्रशांत पाठक भी आईआईटियन हैं। उनका कहना है कि 1990 के बैच में 12 लड़कियां थीं। इसमें से चार ही एलमनाइ मीट में आ सकी हैं।

सबको देखकर मन खुश हो गया। क्योंकि उस वक्त (1990 में) लड़कियों से ज्यादा बातचीत का दौर नहीं शुरू हुआ था लेकिन बुधवार को इन सबसे खुलकर बातचीत की गई। अब किसी की रोक-टोक नहीं है।

केमिकल इंजीनियरिंग की आशा कनोई बंगलुरु में रहती हैं। बुधवार को आईआईटी आईं तो मन खुश हो गया। उनका कहना था कि आईआईटी का लुक काफी बदल गया है। पूरा कैंपस हरियाली में तब्दील हो चुका है। बिल्डिंग भी अच्छी बन गई हैं।

हालैंड से आई दिव्या जैन वाराणसी की हैं। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छे काम की उम्मीद है। उनका कहना है कि पांच साल के बाद ही मोदी के कामकाज पर टिप्पणी की जा सकती है।


हालांकि हर आईआईटियन को मोदी से अच्छे कामकाज की उम्मीद है। मऊ से आई अर्चना त्रिपाठी भी अपने परिवार के साथ आईं हैं। उनका कहना है कि लंबे समय बाद कैंपस आकर पुरानी यादें ताजा हो गई हैं।

हम सुबह उठते और नाश्ते के लिए भागते थे। जल्दी जल्दी क्लास करने, फिर मेस जाकर खाना खाने की होड़ मचती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed