{"_id":"5fd2a8926b0def5c7759d1c5","slug":"elevated-track-will-be-constructed-from-delhi-to-varanasi","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली से वाराणसी तक बनेगा एलिवेटेड ट्रैक, 320 किमी तक की रफ्तार से दौड़ सकेंगी ट्रेनें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली से वाराणसी तक बनेगा एलिवेटेड ट्रैक, 320 किमी तक की रफ्तार से दौड़ सकेंगी ट्रेनें
Fri, 11 Dec 2020 04:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सुहेल खान, अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
सुहेल खान, अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 11 Dec 2020 04:30 AM IST
सार
- 13 दिसंबर से हेलिकॉप्टर से शुरू होगा लिडार सर्वे
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को जोड़ने के लिए अलग से एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाएगा। ट्रैक पर कुछ जगह अंडरग्राउंड रेलवे लाइन भी होगी। इस ट्रैक पर अधिकतम 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। इसके लिए 13 दिसंबर से हेलिकॉप्टर से लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (लिडार) सर्वे शुरू किया जाएगा। इस तकनीक से 800 किमी. का सर्वे 12 हफ्तों में पूरा हो जाएगा, जबकि इसी तरह के मानवीय सर्वेक्षण में एक साल तक लग जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कानपुर-लखनऊ मार्ग भी शामिल होंगे
यह ट्रैक इस हिसाब से बनाया जाएगा कि न सिर्फ कानपुर बल्कि लखनऊ को भी इससे जोड़ा जा सके। इसके लिए कुछ स्टेशन भी बनेंगे। यह बेहद प्रारंभिक प्रक्रिया है। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट रेलवे मंत्रालय को भेजी जाएगी। स्वीकृति के बाद डीपीआर बनेगी और टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। यह काम रेलवे मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) से करा रहा है।
विज्ञापन
बेहद सटीक सर्वे करता है लिडार
लिडार तकनीक मूलत: लेजर लाइटों और सेंसर पर आधारित होती है। इस तकनीक का इस्तेमाल पहले मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सर्वेक्षण में किया जा चुका है। इसका सर्वेक्षण डाटा बेहद सटीक होता है। हेलिकॉप्टर में अत्याधुनिक हाई रिजोल्यूशन कैमरे लगते हैं। लेजर डाटा, जीपीएस डाटा, फ्लाइट पैरामीटर और वास्तविक तस्वीरों से मिली जानकारी के आधार पर काम किया जाता है।
रक्षा मंत्रालय ने 13 दिसंबर से हवाई सर्वेक्षण कराने की मंजूरी दे दी है। दिल्ली से वाराणसी तक घनी आबादी होने, खेत, नदियां होने की वजह से हवाई सर्वेक्षण सटीक और आसान है।
- सुषमा गौड़, पीआरओ, एनएचएसआरसीएल