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Kanpur News: अंतरराष्ट्रीय किडनी कांड की जांच के लिए ईडी ने तलब किया ब्यौरा
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कानपुर। करीब सात साल पुराने और शहर के पहले अंतरराष्ट्रीय किडनी कांड की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) करेगा। निदेशालय के एडिश्नल डायरेक्टर ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल को पत्र भेजकर मामले से जुड़ी सभी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। सीपी ने बताया कि 2019 में हुए किडनी कांड से संबंधित चारों मामले बर्रा थाने में दर्ज हुए थे इसलिए डीसीपी साउथ को मामलों से जुड़ी मांगी गईं सभी जानकारियां जल्द से जल्द निदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
फरवरी 2019 में बर्रा पुलिस ने अब तक के सबसे बड़े किडनी कांड का खुलासा किया था। मामले में चारों प्राथमिकी बर्रा थाने में दर्ज की गई थीं। प्रकाश में आया था कि गिरोह से जुड़े डॉक्टर और अन्य लोग कुछ रुपये देकर उनकी किडनी निकाल लेते थे। किडनी यूपी, दिल्ली, कोलकत्ता, महाराष्ट्र के अमीरों के अलावा खाड़ी देशों, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और तुर्की तक के लोगों को मुहैया कराई जाती थी। किडनी बेचने वाले व्यक्ति को तीन से पांच लाख रुपये दिए जाते थे जबकि दिल्ली के अस्पताल में यह किडनी 30 लाख रुपये से भी ज्यादा में बेची जाती थी। वहीं, लिवर 70 से 80 लाख रुपये में बेचा जाता था। पुलिस चारों मामलों में चार्जशीट भी लगा चुकी है।
सीपी ने बताया कि निदेशालय के एडिश्नल डायरेक्टर की ओर से मांगी जानकारियों में मुख्य रूप से चारों मामलों की एफआईआर की प्रति, कौन-कौन वादी थे, मामले में चार्जशीट क्या लगाई गई, कितने लोगों के नाम इसमें शामिल थे और कितने के हटाए गए तो उसकी वजह क्या थी। पीड़ितों ने क्या बयान दिए थे, उस वक्त कितनी धनराशि सामने आई थी। इसके अलावा मामले से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। सीपी ने बताया कि शनिवार को ही पत्र आया है। सूत्राें के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय की जांच से साफ होगा कि अवैध रूप से किडनी बेचने वालों ने कितना रुपया अर्जित किया। कौन-कौन सी संपत्ति बनाई।
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ये था पूरा मामला और ये आरोपी
रैकेट का मुख्य सरगना गौरव मिश्रा लखीमपुर खीरी का निवासी था जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कोलकाता से टी. राजकुमार राव, दिल्ली से शैलेश सक्सेना और लखनऊ व कानपुर से कई अन्य दलालों की गिरफ्तारियां हुई थीं। राजकुमार तो खुद की भी किडनी बेच चुका था और लोगों को बताता था कि इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। दिल्ली के एक नामी निजी अस्पताल के सीईओ को भी जून 2019 में दिल्ली से हिरासत में लिया गया था। इस रैकेट के तहत कई अवैध ट्रांसप्लांट दिल्ली के अस्पतालों में भी डोनर्स के कागजात फर्जी बनाकर कराए जा रहे थे। गिरोह फर्जी आईडी प्रूफ और दस्तावेज तैयार कर डोनर को मरीज का रिश्तेदार दिखाकर उनकी किडनी निकालकर बड़ी कीमत में दूसरे को ट्रांसप्लांट कर देते थे।
बांदा की महिला ने की थी पहली शिकायत
पुलिस ने बताया कि बांदा की एक महिला को किडनी बेचने पर भारी रकम मिलने का लालच दिया गया। महिला को बांदा से गाजियाबाद के एक अस्पताल में भेजा गया। महिला को वहां भेजने के पहले उसके फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए गए। महिला वहां गई लेकिन बिना किडनी दिए लौट आई थी। इसके बाद से महिला पर लगातार किडनी बेचने का दबाव डाला जाने लगा। गैंग से परेशान होकर महिला ने कानपुर के बर्रा थाने में तहरीर दी।
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फरवरी 2019 में बर्रा पुलिस ने अब तक के सबसे बड़े किडनी कांड का खुलासा किया था। मामले में चारों प्राथमिकी बर्रा थाने में दर्ज की गई थीं। प्रकाश में आया था कि गिरोह से जुड़े डॉक्टर और अन्य लोग कुछ रुपये देकर उनकी किडनी निकाल लेते थे। किडनी यूपी, दिल्ली, कोलकत्ता, महाराष्ट्र के अमीरों के अलावा खाड़ी देशों, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और तुर्की तक के लोगों को मुहैया कराई जाती थी। किडनी बेचने वाले व्यक्ति को तीन से पांच लाख रुपये दिए जाते थे जबकि दिल्ली के अस्पताल में यह किडनी 30 लाख रुपये से भी ज्यादा में बेची जाती थी। वहीं, लिवर 70 से 80 लाख रुपये में बेचा जाता था। पुलिस चारों मामलों में चार्जशीट भी लगा चुकी है।
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सीपी ने बताया कि निदेशालय के एडिश्नल डायरेक्टर की ओर से मांगी जानकारियों में मुख्य रूप से चारों मामलों की एफआईआर की प्रति, कौन-कौन वादी थे, मामले में चार्जशीट क्या लगाई गई, कितने लोगों के नाम इसमें शामिल थे और कितने के हटाए गए तो उसकी वजह क्या थी। पीड़ितों ने क्या बयान दिए थे, उस वक्त कितनी धनराशि सामने आई थी। इसके अलावा मामले से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। सीपी ने बताया कि शनिवार को ही पत्र आया है। सूत्राें के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय की जांच से साफ होगा कि अवैध रूप से किडनी बेचने वालों ने कितना रुपया अर्जित किया। कौन-कौन सी संपत्ति बनाई।
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ये था पूरा मामला और ये आरोपी
रैकेट का मुख्य सरगना गौरव मिश्रा लखीमपुर खीरी का निवासी था जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कोलकाता से टी. राजकुमार राव, दिल्ली से शैलेश सक्सेना और लखनऊ व कानपुर से कई अन्य दलालों की गिरफ्तारियां हुई थीं। राजकुमार तो खुद की भी किडनी बेच चुका था और लोगों को बताता था कि इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। दिल्ली के एक नामी निजी अस्पताल के सीईओ को भी जून 2019 में दिल्ली से हिरासत में लिया गया था। इस रैकेट के तहत कई अवैध ट्रांसप्लांट दिल्ली के अस्पतालों में भी डोनर्स के कागजात फर्जी बनाकर कराए जा रहे थे। गिरोह फर्जी आईडी प्रूफ और दस्तावेज तैयार कर डोनर को मरीज का रिश्तेदार दिखाकर उनकी किडनी निकालकर बड़ी कीमत में दूसरे को ट्रांसप्लांट कर देते थे।
बांदा की महिला ने की थी पहली शिकायत
पुलिस ने बताया कि बांदा की एक महिला को किडनी बेचने पर भारी रकम मिलने का लालच दिया गया। महिला को बांदा से गाजियाबाद के एक अस्पताल में भेजा गया। महिला को वहां भेजने के पहले उसके फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए गए। महिला वहां गई लेकिन बिना किडनी दिए लौट आई थी। इसके बाद से महिला पर लगातार किडनी बेचने का दबाव डाला जाने लगा। गैंग से परेशान होकर महिला ने कानपुर के बर्रा थाने में तहरीर दी।