{"_id":"61ae551ce5112277cf465e47","slug":"due-to-the-strike-of-junior-doctors-patients-who-came-to-hallet-opd-suffered","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल: हैलट अस्पताल की ओपीडी बंद कराई, मरीज लेकर भागते रहे तीमारदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल: हैलट अस्पताल की ओपीडी बंद कराई, मरीज लेकर भागते रहे तीमारदार
Mon, 06 Dec 2021 11:55 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 06 Dec 2021 11:55 PM IST
सार
मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा की ओपीडी में इक्का-दुक्का रोगी रहे। पर्चे पर दवाएं लिखने के लिए सिर्फ एक इंटर्न छात्रा रही।
विज्ञापन
हैलट अस्पताल
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण हैलट ओपीडी आए रोगियों को बहुत तकलीफ झेलनी पड़ी। पर्चा काउंटर बीच में ही बंद करा दिया गया। लाइन में लगे रोगी डॉक्टरों को नहीं दिखा सके। इससे नाराज होकर ओपीडी में हंगामा किया।
गंभीर रोगियों को लेकर लोग इमरजेंसी भागे और पर्चा बनवाकर भर्ती कराया। फर्रुखाबाद, उन्नाव, औरैया आदि जिलों से आए रोगी भी पर्चा न बनने के कारण मायूस लौट गए। जूनियर डॉक्टरों ने डॉक्टर चैंबर में जमा पर्चों को भी वापस करा दिया।
इसके बाद इंटर्न छात्रों के साथ चैंबर में बैठे रहे। सीनियर रेजीडेंट ने भी हड़ताल के समर्थन में ओपीडी का बहिष्कार कर दिया। हैलट की ओपीडी में सोमवार को जैसे ही रोगियों की भीड़ बढ़नी शुरू हुई, हड़ताली जूनियर डॉक्टरों ने परचा काउंटर बंद करवा दिया।
विज्ञापन
इसी वक्त रोगियों की सबसे अधिक भीड़ रहती है। इस पर तीमारदार भड़क गए। जिन रोगियों के सुबह पर्चे बन गए थे, उनमें से कुछ तो डॉक्टरों से जांच कराते रहे। बाद में जूनियर डॉक्टरों ने पर्चों को लौटा दिया। जो रोगी गंभीर हालत में आए थे, उनके परिजन रोगी को लेकर इमरजेंसी भागे।
विज्ञापन
गंभीर रोगियों को लेकर लोग इमरजेंसी भागे और पर्चा बनवाकर भर्ती कराया। फर्रुखाबाद, उन्नाव, औरैया आदि जिलों से आए रोगी भी पर्चा न बनने के कारण मायूस लौट गए। जूनियर डॉक्टरों ने डॉक्टर चैंबर में जमा पर्चों को भी वापस करा दिया।
विज्ञापन
इसके बाद इंटर्न छात्रों के साथ चैंबर में बैठे रहे। सीनियर रेजीडेंट ने भी हड़ताल के समर्थन में ओपीडी का बहिष्कार कर दिया। हैलट की ओपीडी में सोमवार को जैसे ही रोगियों की भीड़ बढ़नी शुरू हुई, हड़ताली जूनियर डॉक्टरों ने परचा काउंटर बंद करवा दिया।
विज्ञापन
इसी वक्त रोगियों की सबसे अधिक भीड़ रहती है। इस पर तीमारदार भड़क गए। जिन रोगियों के सुबह पर्चे बन गए थे, उनमें से कुछ तो डॉक्टरों से जांच कराते रहे। बाद में जूनियर डॉक्टरों ने पर्चों को लौटा दिया। जो रोगी गंभीर हालत में आए थे, उनके परिजन रोगी को लेकर इमरजेंसी भागे।
चमनगंज की शादमा बेगम अपनी मां को गोदी में उठाकर इमरजेंसी लाईं। रोगी की डायलिसिस होनी थी। दोपहर 12 बजे हैलट पहुंचे फर्रुखाबाद के रोगी अमित कुमार (32) ने बताया कि उन्हें पेट की तकलीफ है। पर्चा ही नहीं बना। इसी तरह उन्नाव के रामकिशोर तिवारी अपने रोगी को ओपीडी में नहीं दिखा सके तो निजी अस्पताल लेकर चले गए।
औरैया के दिलशाद सिद्दीकी की पोस्ट कोविड रोगी मां अनीसा खातून (65) को सांस की तकलीफ रही। पर्चा बनवाने के लिए इमरजेंसी दौड़ते रहे। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा की ओपीडी में इक्का-दुक्का रोगी रहे। पर्चे पर दवाएं लिखने के लिए सिर्फ एक इंटर्न छात्रा रही।
औरैया के दिलशाद सिद्दीकी की पोस्ट कोविड रोगी मां अनीसा खातून (65) को सांस की तकलीफ रही। पर्चा बनवाने के लिए इमरजेंसी दौड़ते रहे। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा की ओपीडी में इक्का-दुक्का रोगी रहे। पर्चे पर दवाएं लिखने के लिए सिर्फ एक इंटर्न छात्रा रही।