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बहुत देर में पता चलता है अंडाशय का कैंसर, देर से शादी करने पर घट जाती है अंडों की क्वालिटी
Sun, 20 Oct 2019 02:09 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 20 Oct 2019 02:09 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
कानपुर में यूपी गायनी कैंसर एसोसिएशन और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग के बैनर तले आयोजित कार्यशाला में बताया गया कि अंडाशय का कैंसर बहुत देर में पता चलता है। इसमें हल्का पेट फूलने, जल्दी पेट भर जाने आदि लक्षण उभरते हैं जो दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते हैं।
इससे इसकी पहचान में देरी होती है। एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. सुधा निगम ने बताया कि दो तिहाई रोगी अस्पताल देर से आते हैं। अगर ये जल्दी आ जाएं तो इनका कारगर इलाज हो सकता है। मेडिकल कालेज के एलटी-3 में आयोजित अंडाशय के कैंसर की कार्यशाला में बताया गया कि हारमोंस की बहुत सी दवाएं बार-बार लेने पर अंडों की संख्या घट जाती है।
बार-बार असफल आईवीएफ से भी ऐसी दिक्कत का खतरा रहता है। अल्ट्रासाउंड और कुछ कैंसर मार्कर से इसे पहचाना जा सकता है। स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय ने बताया कि स्तनपान, नसबंदी, समय पर गर्भाधान अंडाशय के कैंसर के रिस्क को कम करते हैं।
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एसजीपीजीआई की डॉ. अंजू रानी ने बताया कि देर से शादी करने, कम बच्चे पैदा करने से अंडों की क्वालिटी खराब हो जाती है। इससे दिक्कतें भी पैदा होती हैं। इसके अलावा डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने स्त्री रोग विशेषज्ञों को महिला स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण के संबंध में बताया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मंत्री नीलिमा कटियार रहीं। डॉ. श्वेता गिरि, डॉ. हेम प्रभा गुप्ता, डॉ. उर्मिला सिंह, डॉ. निशा सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. पाविका लाल, डॉ. दिव्या द्विवेदी तथा संचालन डॉ. गरिमा गुप्ता और डॉ. प्रतिमा वर्मा ने किया।
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इससे इसकी पहचान में देरी होती है। एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. सुधा निगम ने बताया कि दो तिहाई रोगी अस्पताल देर से आते हैं। अगर ये जल्दी आ जाएं तो इनका कारगर इलाज हो सकता है। मेडिकल कालेज के एलटी-3 में आयोजित अंडाशय के कैंसर की कार्यशाला में बताया गया कि हारमोंस की बहुत सी दवाएं बार-बार लेने पर अंडों की संख्या घट जाती है।
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बार-बार असफल आईवीएफ से भी ऐसी दिक्कत का खतरा रहता है। अल्ट्रासाउंड और कुछ कैंसर मार्कर से इसे पहचाना जा सकता है। स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय ने बताया कि स्तनपान, नसबंदी, समय पर गर्भाधान अंडाशय के कैंसर के रिस्क को कम करते हैं।
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एसजीपीजीआई की डॉ. अंजू रानी ने बताया कि देर से शादी करने, कम बच्चे पैदा करने से अंडों की क्वालिटी खराब हो जाती है। इससे दिक्कतें भी पैदा होती हैं। इसके अलावा डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने स्त्री रोग विशेषज्ञों को महिला स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण के संबंध में बताया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मंत्री नीलिमा कटियार रहीं। डॉ. श्वेता गिरि, डॉ. हेम प्रभा गुप्ता, डॉ. उर्मिला सिंह, डॉ. निशा सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. पाविका लाल, डॉ. दिव्या द्विवेदी तथा संचालन डॉ. गरिमा गुप्ता और डॉ. प्रतिमा वर्मा ने किया।