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कानपुर: अखंड शिवधाम आश्रम विवाद में विहिप भी कूदा, ब्रह्मलीन महंत प्रकाशानंद की मौत को बताया साजिश, जांच की मांग
Tue, 01 Jun 2021 10:26 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 01 Jun 2021 10:26 AM IST
सार
विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंत्री और पनकी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर जितेंद्रदास ने कहा, कई जगह आश्रम की परंपराओं को दरकिनार कर कब्जे हो रहे हैं। मैंने बिठूर उत्थान समिति का गठन किया है, जो इस तरह के मामलों की निगरानी करेगी।
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बिठूर लवकुश नगर स्थित शिवधाम आश्रम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर में बिठूर के लवकुश नगर स्थित अखंड शिवधाम आश्रम पर आधिपत्य के विवाद में अब विश्व हिंदू परिषद (विहिप) भी कूद पड़ा है। सोमवार को परिषद के पदाधिकारियों ने स्वामी ब्रजानंद अवधूत का समर्थन किया। इस दौरान स्वामी ब्रजानंद ने ब्रह्मलीन महंत स्वामी स्वयं प्रकाशानंद की मौत पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से जांच की मांग की। साथ ही डॉ. रेनू तिवारी की वसीयत को गलत बताया।
उधर, डॉ. रेनू तिवारी अपने दावे पर अडिग हैं। इससे विवाद बढ़ता ही जा रहा है। दूसरी तरफ पुलिस ने राजस्व और अन्य विभागों के अफसरों की मदद से दोनों पक्षों के प्रार्थनापत्र और दस्तावेज लेकर उनके दावों की जांच शुरू कर दी है।
विवाद के पीछे आश्रम की करोड़ों की संपत्ति बताई जा रही है। रविवार को डॉ. रेनू ने प्रेसवार्ता कर अपना दावा सही ठहराया था तो सोमवार को स्वामी ब्रजानंद ने विहिप पदाधिकारियों के साथ प्रेसवार्ता की। कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद की मौत के पीछे साजिश हुई।
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इसकी जांच होनी चाहिए। आरोप लगाया कि डॉ. रेनू फर्जी वसीयत के जरिये आश्रम को हड़पना चाहती हैं। विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंत्री और पनकी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर जितेंद्रदास ने कहा, कई जगह आश्रम की परंपराओं को दरकिनार कर कब्जे हो रहे हैं।
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उधर, डॉ. रेनू तिवारी अपने दावे पर अडिग हैं। इससे विवाद बढ़ता ही जा रहा है। दूसरी तरफ पुलिस ने राजस्व और अन्य विभागों के अफसरों की मदद से दोनों पक्षों के प्रार्थनापत्र और दस्तावेज लेकर उनके दावों की जांच शुरू कर दी है।
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विवाद के पीछे आश्रम की करोड़ों की संपत्ति बताई जा रही है। रविवार को डॉ. रेनू ने प्रेसवार्ता कर अपना दावा सही ठहराया था तो सोमवार को स्वामी ब्रजानंद ने विहिप पदाधिकारियों के साथ प्रेसवार्ता की। कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद की मौत के पीछे साजिश हुई।
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इसकी जांच होनी चाहिए। आरोप लगाया कि डॉ. रेनू फर्जी वसीयत के जरिये आश्रम को हड़पना चाहती हैं। विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंत्री और पनकी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर जितेंद्रदास ने कहा, कई जगह आश्रम की परंपराओं को दरकिनार कर कब्जे हो रहे हैं।
मैंने बिठूर उत्थान समिति का गठन किया है, जो इस तरह के मामलों की निगरानी करेगी। विहिप के मठ-मंदिर प्रमुख गणेश शंकर ने कहा कि आश्रम को गलत हाथों में नहीं जाने देंगे। समिति के संयोजक अनिल द्विवेदी ने कहा कि आश्रम व्यक्तिगत पूंजी नहीं होती। एनजीओ को आश्रम में चलाना अनुचित है। ये आश्रम के व्यवसायीकरण का संकेत है।
आरोप निराधार, शव का हुआ था पोस्टमार्टम
स्वामी ब्रजानंद अवधूत के आरोपों पर डॉ. रेनू ने कहा कि स्वामी प्रकाशानंद जी बीमारी से ग्रसित थे। उनके फेफड़े खराब हो गए थे। हैलट में इलाज कराया गया था। डॉक्टरों की सलाह पर उनको वापस आश्रम लाया गया था। 10 मई की शाम सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली थी। तब पुलिस को सूचना देकर अगले दिन शव का पोस्टमार्टम कराया गया था।
डॉ. रेनू ने दूसरे पक्ष के आरोपों को पूरी तरह से निराधार करार दिया। साथ ही कहा कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं। उधर, स्वामी ब्रजानंद का कहना है कि स्वामी प्रकाशानंद की इच्छा थी कि आश्रम में ही उनकी समाधि बनाई जाए, लेकिन शरीर को समाधि स्थल पर नहीं रखा गया। डॉ. रेनू ने बताया कि बिठूर शमशान घाट पर भूसमाधि दी गई थी।
आरोप निराधार, शव का हुआ था पोस्टमार्टम
स्वामी ब्रजानंद अवधूत के आरोपों पर डॉ. रेनू ने कहा कि स्वामी प्रकाशानंद जी बीमारी से ग्रसित थे। उनके फेफड़े खराब हो गए थे। हैलट में इलाज कराया गया था। डॉक्टरों की सलाह पर उनको वापस आश्रम लाया गया था। 10 मई की शाम सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली थी। तब पुलिस को सूचना देकर अगले दिन शव का पोस्टमार्टम कराया गया था।
डॉ. रेनू ने दूसरे पक्ष के आरोपों को पूरी तरह से निराधार करार दिया। साथ ही कहा कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं। उधर, स्वामी ब्रजानंद का कहना है कि स्वामी प्रकाशानंद की इच्छा थी कि आश्रम में ही उनकी समाधि बनाई जाए, लेकिन शरीर को समाधि स्थल पर नहीं रखा गया। डॉ. रेनू ने बताया कि बिठूर शमशान घाट पर भूसमाधि दी गई थी।
दोनों पक्षों की तरफ से प्रार्थनापत्र दिए गए हैं। दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं। राजस्व और अन्य विभागों की मदद से इन दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। साक्ष्यों के आधार पर ही कोई फैसला लिया जाएगा। - दिनेश कुमार शुक्ला, एसीपी कल्याणपुर