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Kanpur News: सीएसजेएमयू में घटती छात्र संख्या, घटते जिलों से उपाधियां हुईं आधी
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कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि से संबद्ध डिग्री कॉलेजों में घटती छात्र संख्या का असर दीक्षांत समारोह में दी जाने वाली डिग्रियों पर दिखने लगा है। उपाधियों की संख्या पिछले दो सालों में घटकर आधी हो गई है। 2023 में जहां दो लाख से ऊपर उपाधियां दी गईं थी वहीं इस बार 17 सितंबर को समारोह में 97 हजार छात्रों को उपाधियां दी जाएंगी। विवि के सूत्रों की माने तो डिग्री कॉलेजों में घटती छात्र संख्या और घटते जिले भी कम हो रही उपाधियों का कारण है।
सीएसजेएमयू से संबद्ध छह जिलों के करीब 600 डिग्री कॉलेजों में साल दर साल छात्र संख्या कम होती जा रही है। विवि कैंपस में संचालित पाठ्यक्रमों में भले ही छात्र संख्या बढ़ती जा रही हो लेकिन डिग्री कॉलेजों का बुरा हाल है। हर साल विभिन्न कोर्स में 40 फीसदी से अधिक सीटें खाली रह जाती है। स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की हालात तो और ही खराब होती जा रही है। दाखिले के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने वाले कॉलेज सीट भर पाने में नाकाम रहे हैं। हर साल अप्रैल से लेकर सितंबर तक दाखिले की प्रक्रिया चलती है, कई बार प्रवेश की अंतिम तिथि को बढ़ाया जाता है, लेकिन नतीजा सिफर रहता है।
इन सबका साफ असर उपाधियों पर दिखाई देने लगा है। 17 सितंबर को होने वाले 40वें दीक्षांत में पीएचडी की मिलाकर कुल 97122 उपाधियां दी जाएंगी। जबकि 39वें दीक्षांत में 1,18,737 और 38वें दीक्षांत समारोह में 2,09,171 मेधावियों को उपाधियां दी गई थीं।
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14 की जगह अब छह जिले के कॉलेज ही संबद्ध
पहले जहां विवि से 14 जिलों के कॉलेज संबद्ध थे तब छात्र संख्या लाखों में होती थी। वहीं पिछले कुछ सालों में संबद्ध जिलों की संख्या घटकर 11, नौ और अब छह रह गई है। साथ ही डिग्री कॉलेजाें से छात्रों का भी मोह भंग होता जा रहा है। इस वजह से उपाधियों की संख्या में कमी आई है।
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सीएसजेएमयू से संबद्ध छह जिलों के करीब 600 डिग्री कॉलेजों में साल दर साल छात्र संख्या कम होती जा रही है। विवि कैंपस में संचालित पाठ्यक्रमों में भले ही छात्र संख्या बढ़ती जा रही हो लेकिन डिग्री कॉलेजों का बुरा हाल है। हर साल विभिन्न कोर्स में 40 फीसदी से अधिक सीटें खाली रह जाती है। स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की हालात तो और ही खराब होती जा रही है। दाखिले के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने वाले कॉलेज सीट भर पाने में नाकाम रहे हैं। हर साल अप्रैल से लेकर सितंबर तक दाखिले की प्रक्रिया चलती है, कई बार प्रवेश की अंतिम तिथि को बढ़ाया जाता है, लेकिन नतीजा सिफर रहता है।
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इन सबका साफ असर उपाधियों पर दिखाई देने लगा है। 17 सितंबर को होने वाले 40वें दीक्षांत में पीएचडी की मिलाकर कुल 97122 उपाधियां दी जाएंगी। जबकि 39वें दीक्षांत में 1,18,737 और 38वें दीक्षांत समारोह में 2,09,171 मेधावियों को उपाधियां दी गई थीं।
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14 की जगह अब छह जिले के कॉलेज ही संबद्ध
पहले जहां विवि से 14 जिलों के कॉलेज संबद्ध थे तब छात्र संख्या लाखों में होती थी। वहीं पिछले कुछ सालों में संबद्ध जिलों की संख्या घटकर 11, नौ और अब छह रह गई है। साथ ही डिग्री कॉलेजाें से छात्रों का भी मोह भंग होता जा रहा है। इस वजह से उपाधियों की संख्या में कमी आई है।