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आतंकियों को फांसी की सजा: सात साल से था न्याय का इंतजार, पत्नी बोली-अब मिलेगी पति की आत्मा को शांति
Fri, 15 Sep 2023 01:51 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 15 Sep 2023 01:51 PM IST
सार
आतंकी आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल ने 24 अक्तूबर 2016 में रमेशबाबू शुक्ला की पहचान करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी थी। आतंकियों ने पिस्टल की टेस्टिंग के लिए हत्या की थी। वे साइकिल से स्कूल से घर लौट रहे थे। मामले की सुनवाई एनआईए कोर्ट में चल रही थी। गुरुवार को कोर्ट ने दोनों आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई।
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मृतक की पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हम बीते सात सालों से न्याय का इंतजार कर रहे थे। कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। मेरे पति के हत्यारों को फांसी की सजा का फैसला सुनने के बाद सुकून मिला है। आज दिवंगत आत्मा को शांति मिली होगी...। ये बातें चकेरी के प्योंदी गांव में आतंकियों की गोली का शिकार हुए पूर्व प्रधानाचार्य रमेशबाबू शुक्ला की पत्नी मीना शुक्ला ने कहीं।
आतंकी आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल ने 24 अक्तूबर 2016 में रमेशबाबू शुक्ला की पहचान करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी थी। आतंकियों ने पिस्टल की टेस्टिंग के लिए हत्या की थी। वे साइकिल से स्कूल से घर लौट रहे थे। मामले की सुनवाई एनआईए कोर्ट में चल रही थी।
गुरुवार को कोर्ट ने दोनों आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट का फैसला आते ही नवाबगंज, विष्णुपुरी में रहने वाला दिवंगत प्रधानाचार्य रमेशबाबू शुक्ला के परिवार के हर सदस्य की आंखों से आंसू बह निकले। प्रधानाचार्य की पत्नी मीना देवी ने कहा वो मनहूस दिन आज भी नहीं भूल पातीं, जब आतंकियों ने उनके बेगुनाह पति की जान ले ली थी।
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बोलीं, हमें ईश्वर और न्याय प्रक्रिया पर पूरा भरोसा था। आतंकियों को मौत की सजा नजीर बनेगी। रमेशबाबू के चार बच्चे हैं। बड़े बेटे सौरभ शुक्ला प्राइवेट नौकरी करते हैं। छोटे बेटे अक्षय शुक्ला प्राइमरी स्कूल में सरकारी शिक्षक हैं। बहन पूजा की शादी हो चुकी है और छोटी बहन आरती अभी पढ़ाई कर रही है। कोर्ट के फैसले पर पूरे परिवार ने रमेशबाबू शुक्ला की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
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आतंकी आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल ने 24 अक्तूबर 2016 में रमेशबाबू शुक्ला की पहचान करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी थी। आतंकियों ने पिस्टल की टेस्टिंग के लिए हत्या की थी। वे साइकिल से स्कूल से घर लौट रहे थे। मामले की सुनवाई एनआईए कोर्ट में चल रही थी।
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गुरुवार को कोर्ट ने दोनों आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट का फैसला आते ही नवाबगंज, विष्णुपुरी में रहने वाला दिवंगत प्रधानाचार्य रमेशबाबू शुक्ला के परिवार के हर सदस्य की आंखों से आंसू बह निकले। प्रधानाचार्य की पत्नी मीना देवी ने कहा वो मनहूस दिन आज भी नहीं भूल पातीं, जब आतंकियों ने उनके बेगुनाह पति की जान ले ली थी।
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बोलीं, हमें ईश्वर और न्याय प्रक्रिया पर पूरा भरोसा था। आतंकियों को मौत की सजा नजीर बनेगी। रमेशबाबू के चार बच्चे हैं। बड़े बेटे सौरभ शुक्ला प्राइवेट नौकरी करते हैं। छोटे बेटे अक्षय शुक्ला प्राइमरी स्कूल में सरकारी शिक्षक हैं। बहन पूजा की शादी हो चुकी है और छोटी बहन आरती अभी पढ़ाई कर रही है। कोर्ट के फैसले पर पूरे परिवार ने रमेशबाबू शुक्ला की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
पिता के आदर्शों पर चलकर जारी रखी पढ़ाई और पाया मुकाम
दिवंगत प्रधानाचार्य के छोटे बेटे अक्षय शुक्ला ने बताया कि पिता की हत्या के बाद से पूरा परिवार बिखर गया था। जिस वक्त यह घटना हुई थी, वे पढ़ाई कर रहे थे। अचानक मिली पिता की हत्या की सूचना ने पूरे परिवार को बिखेरकर रख दिया था। पिता के बताए हुए आदर्शों पर चलकर पढ़ाई जारी रखी।
दिवंगत प्रधानाचार्य के छोटे बेटे अक्षय शुक्ला ने बताया कि पिता की हत्या के बाद से पूरा परिवार बिखर गया था। जिस वक्त यह घटना हुई थी, वे पढ़ाई कर रहे थे। अचानक मिली पिता की हत्या की सूचना ने पूरे परिवार को बिखेरकर रख दिया था। पिता के बताए हुए आदर्शों पर चलकर पढ़ाई जारी रखी।
वर्ष 2018 में पिता के आशीर्वाद से शिक्षा विभाग में नौकरी के रूप में अपना मुकाम पाया। पिछले साल दिसंबर में शादी हुई। पत्नी भी शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने फैसले के दिन को पूरे परिवार के लिए बड़ा दिन बताया।
हिंदू पहचान कर हत्या करने वाले दो आतंकियों को फांसी की सजा
आपको बता दें कि आतंकी संगठन आईएसआईएस के सदस्य आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल को एटीएस/एनआईए के विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा ने फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर करीब 12-12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बीते दिनों कोर्ट ने दोनों को कानपुर के एक शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला के हाथ में बंधे कलेवा से हिंदू पहचान सुनिश्चित कर हत्या करने पर दोषी करार दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने भारत की अखंडता, एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पहुंचाने, दूसरे समुदाय के लोगों को मारने व साजिश रचने समेत कई अन्य अपराधों में दोषी पाया था।
आपको बता दें कि आतंकी संगठन आईएसआईएस के सदस्य आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल को एटीएस/एनआईए के विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा ने फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर करीब 12-12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बीते दिनों कोर्ट ने दोनों को कानपुर के एक शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला के हाथ में बंधे कलेवा से हिंदू पहचान सुनिश्चित कर हत्या करने पर दोषी करार दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने भारत की अखंडता, एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पहुंचाने, दूसरे समुदाय के लोगों को मारने व साजिश रचने समेत कई अन्य अपराधों में दोषी पाया था।
कोर्ट ने जुर्माने की रकम रमेश बाबू के आश्रितों को देने का आदेश दिया है। इसके पहले आतिफ और फैसल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जेल से कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि दोषियों का अपराध विरलतम से विरल श्रेणी का है। इसे सामान्य हत्या की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कहा कि इनको हाईकोर्ट से पुष्टि हो जाने के बाद फांसी दी जाएगी।