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सताने वाली बहू को बाहर निकालने का आदेश

Mon, 22 Aug 2016 12:51 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो अमर उजाला कानपुर Updated Mon, 22 Aug 2016 12:51 AM IST
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Daughter in law to persecute evacuation order
कोर्ट
कानपुर। बाबा और दादी को परेशान करने में पौत्रवधु पर जिला प्रशासन ने एक्शन लिया है। एसडीएम सदर डीडी वर्मा ने रविवार को नजीराबाद पुलिस से पौत्रवधु को तीन दिन में उस घर से बलपूर्वक हटाने को कहा है। वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत शहर में यह पहली कार्रवाई है। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा को इस एक्ट के तहत एक्शन लेने को कहा था। कौशलपुरी नजीराबाद निवासी 86 साल के चाननलाल अजमानी और उनकी पत्नी कृष्णा देवी (82) ने पोते की पत्नी के उत्पीड़न करने पर हाईकोर्ट की शरण ली थी। दोनों का कहना था कि उनके बेटे विजय अजमानी का निधन हो चुका है। इसके बाद से पोता अमित और उसकी पत्नी आरती उनका उत्पीड़न करते हैं। ये दोनों उनकी संपत्ति हड़पना चाहते हैं। दूसरा घर होने के बाद भी आरती उनके यहां आकर जबरन रहती है। इस पर हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण टंडन और जस्टिस यशवंत वर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी को आदेश दिया था कि बिना देरी किए वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर को कार्रवाई को कहा था।
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देखभाल जरूरी
अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 में 60 साल या इससे ऊपर की उम्र के लोगों को सीनियर सिटीजन माना गया है। बेटा, बेटी, पौत्र और पौत्री पर इनकी देखभाल करने का प्रावधान है। अगर किसी के बच्चे नहीं है तो प्रापर्टी पर क्लेम करने वाले रिश्तेदारों को देखभाल करनी होगी। अगर कोई अपने मां-पिता, बाबा या दादी की देखभाल नहीं करता है तो एसडीएम दस हजार रुपये तक प्रतिमाह भत्ता दिला सकते हैं। न देने पर तीन माह की कैद, पांच हजार रुपये तक जुर्र्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।
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तो वसीयत शून्य
अगर कोई मां-बाप अपने बच्चों के नाम प्रापर्टी की वसीयत कर देता है और उसके बाद बच्चे उनकी देखभाल नहीं करते हैं तो वसीयत शून्य घोषित हो सकती है। मां-बाप इसके लिए एसडीएम के यहां अर्जी देंगे। कोर्ट भी जा सकते हैं।
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