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कानपुर: दादा नगर क्रॉसिंग बंद, जाम में फंसी एंबुलेंस, बुजुर्ग की मौत, ट्रैफिक पुलिस भी कुछ न कर सकी
Wed, 21 Jul 2021 09:06 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 21 Jul 2021 09:06 AM IST
सार
राकेश ने बताया कि काकादेव के एक निजी अस्पताल में दिखाया पर डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से नौबस्ता के एक अस्पताल ले जाने लगे। राकेश के मुताबिक सुबह करीब 11:30 बजे दादानगर क्रासिंग बंद हो गई।
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दादा नगर में लगा जाम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर में चौतरफा फैलीं रेलवे क्रासिंग पर लगने वाला जाम जानलेवा साबित हो रहा है। मंगलवार सुबह दादानगर रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से एक एंबुलेंस आधा घंटे से ज्यादा देर तक फंसी रही। इस बीच एंबुलेंस में मौजूद वृद्धा मरीज की मौत हो गई।
परिजन उन्हें काकादेव के अस्पताल से रेफर कराकर साउथ सिटी के एक अस्पताल ले जा रहे थे। बांदा के महेश्वरी देवी चौराहे के पीछे रहने वाले राकेश कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब पांच बजे उनकी मां गिनिया (62) घर में अचानक गिर गईं।
इसके बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। वे लोग मां को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे तो कानपुर ले जाने को कहा। राकेश ने बताया कि काकादेव के एक निजी अस्पताल में दिखाया पर डॉक्टरों ने जवाब दे दिया।
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इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से नौबस्ता के एक अस्पताल ले जाने लगे। राकेश के मुताबिक सुबह करीब 11:30 बजे दादानगर क्रासिंग बंद हो गई। इसके बाद वाहनों की लंबी लाइन लग गई। 20 मिनट बाद क्रासिंग खुली लेकिन जाम से निकलने में 15-20 मिनट और लग गए।
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परिजन उन्हें काकादेव के अस्पताल से रेफर कराकर साउथ सिटी के एक अस्पताल ले जा रहे थे। बांदा के महेश्वरी देवी चौराहे के पीछे रहने वाले राकेश कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब पांच बजे उनकी मां गिनिया (62) घर में अचानक गिर गईं।
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इसके बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। वे लोग मां को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे तो कानपुर ले जाने को कहा। राकेश ने बताया कि काकादेव के एक निजी अस्पताल में दिखाया पर डॉक्टरों ने जवाब दे दिया।
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इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से नौबस्ता के एक अस्पताल ले जाने लगे। राकेश के मुताबिक सुबह करीब 11:30 बजे दादानगर क्रासिंग बंद हो गई। इसके बाद वाहनों की लंबी लाइन लग गई। 20 मिनट बाद क्रासिंग खुली लेकिन जाम से निकलने में 15-20 मिनट और लग गए।
राकेश के मुताबिक उन लोगों ने एंबुलेंस से उतरकर आसपास के वाहन सवारों से मिन्नतें भी की लेकिन कोई रास्ता देने को तैयार नहीं था। इस बीच मां की सांसें थम गईं। राकेश ने कहा कि अस्पताल पहुंच जाते तो शायद मां की जान बच जाती। इसके बाद परिवार शव लेकर बांदा चला गया।
राहगीर और ट्रैफिक पुलिस भी कुछ न कर सकी
वृद्धा की हालत बिगड़ने पर परिजन एंबुलेंस से नीचे उतर आए। जाम से निकलने का रास्ता खोजने लगे। यह देख राहगीर और ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी प्रयास में जुट गए कि किसी तरह से एंबुलेंस निकल जाए लेकिन सफलता नहीं मिली। चौतरफा वाहन फंसे रहे।
राहगीर और ट्रैफिक पुलिस भी कुछ न कर सकी
वृद्धा की हालत बिगड़ने पर परिजन एंबुलेंस से नीचे उतर आए। जाम से निकलने का रास्ता खोजने लगे। यह देख राहगीर और ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी प्रयास में जुट गए कि किसी तरह से एंबुलेंस निकल जाए लेकिन सफलता नहीं मिली। चौतरफा वाहन फंसे रहे।