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जानें क्या है ददुआ के राइट हैण्ड राधे का ‘इलेक्शन प्लान’, जेल से जारी कर सकता फरमान
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 02 Feb 2017 01:46 AM IST
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डकैत राधे
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खूंखार डाकू ददुआ का दाहिना हाथ रहा राधे अपने गैंग के दो डकैतों के साथ जेल में जरूर बंद है लेकिन वह अपना ‘इलेक्शन प्लान’ सलाखों के पीछे ही तैयार कर रहा है। विधानसभा चुनाव में उसके फरमान जारी होते रहे हैं। इस बार भी चुनाव में डाकू राधे जेल के अंदर से फरमान जारी कर सकता है। सूत्र बताते हैं कि अपने चहते प्रत्याशी के लिए गांवों के प्रधानों को पत्र भेजकर या संदेश देकर सपोर्ट करने के लिए कह सकता है। कारण यह है कि पहले कुछ चुनाव में ऐसा हो चुका है। इसे लेकर पुलिस भी सक्रिय हो गयी है। जब कभी दस्यु राधे की न्यायायल में पेशी होती है तो उस पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
ददुआ के मारे जाने के बाद भले ही डाकू राधे जेल में सजा काट रहा हो लेकिन आज भी जिले के पाठा क्षेत्र में उसके नाम से लोग कांपते है। जब दस्यु राधे बागी था तो डाकू ददुआ ने इसी को सारी जिम्मेदारी सौंप रखी थी। चौथ वसूलने से लेकर राजनीति दलों के नेताओं से चुनाव में फरमान जारी करने का सौदा किया करता था। जब सौदा तय हो जाता था तो वह जेल में बंद अन्य दो डाकू रोहणी उर्फ तहसीलदार और भोंडा सहित एक दर्जन गैंग के सदस्यों के साथ बीहड़ के जंगलों में बसे गांवों में अपने पसंद के उम्मीदवार को जिताने के लिए फरमान जारी कर देता था। जिसमें कोई ग्रामीण आनाकानी करता था तो उसकी लाठियों से इतनी पिटाई की जाती थी कि वह चलने फिरने के लायक नहीं रहता था।
यही कारण था कि जिस गांव में दस्यु राधे फरमान जारी कर था। सुबह से मतदाता लाइन लगाकर उसके फरमान के हिसाब से वोट डाला करते थे। इस समय डाकू राधे व उसके दो साथी जेल के अंदर जरूर पहुंच गये हैं लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यह जेल के अदंर से ही जिस गांव में एक पत्र या संदेश भेजते हैं वहां मतदान में प्रभाव जरूर पड़ जाता है। चुनाव आते ही डाकू राधे की चर्चा फिर होने लगी है। संभावना जताई गई है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही दस्यु राधे का फरमान जारी हो सकता है। जिससे प्रत्याशियों का समीकरण बिगड़ सकता है। हलांकि पुलिस पूरी तरह से सक्रिय है। पुलिस अधीक्षक ने डीपी सिंह ने बताया कि जेल से लेकर पेशी के दौरान चुनाव तक पुलिस कर्मी डाकू राधे समेत अन्य पर निगरानी कर रहे हैं। चुनाव में डकैतों के हस्तक्षेप रोकने का हर प्रयास किया जा रहा है।
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ददुआ के मारे जाने के बाद भले ही डाकू राधे जेल में सजा काट रहा हो लेकिन आज भी जिले के पाठा क्षेत्र में उसके नाम से लोग कांपते है। जब दस्यु राधे बागी था तो डाकू ददुआ ने इसी को सारी जिम्मेदारी सौंप रखी थी। चौथ वसूलने से लेकर राजनीति दलों के नेताओं से चुनाव में फरमान जारी करने का सौदा किया करता था। जब सौदा तय हो जाता था तो वह जेल में बंद अन्य दो डाकू रोहणी उर्फ तहसीलदार और भोंडा सहित एक दर्जन गैंग के सदस्यों के साथ बीहड़ के जंगलों में बसे गांवों में अपने पसंद के उम्मीदवार को जिताने के लिए फरमान जारी कर देता था। जिसमें कोई ग्रामीण आनाकानी करता था तो उसकी लाठियों से इतनी पिटाई की जाती थी कि वह चलने फिरने के लायक नहीं रहता था।
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यही कारण था कि जिस गांव में दस्यु राधे फरमान जारी कर था। सुबह से मतदाता लाइन लगाकर उसके फरमान के हिसाब से वोट डाला करते थे। इस समय डाकू राधे व उसके दो साथी जेल के अंदर जरूर पहुंच गये हैं लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यह जेल के अदंर से ही जिस गांव में एक पत्र या संदेश भेजते हैं वहां मतदान में प्रभाव जरूर पड़ जाता है। चुनाव आते ही डाकू राधे की चर्चा फिर होने लगी है। संभावना जताई गई है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही दस्यु राधे का फरमान जारी हो सकता है। जिससे प्रत्याशियों का समीकरण बिगड़ सकता है। हलांकि पुलिस पूरी तरह से सक्रिय है। पुलिस अधीक्षक ने डीपी सिंह ने बताया कि जेल से लेकर पेशी के दौरान चुनाव तक पुलिस कर्मी डाकू राधे समेत अन्य पर निगरानी कर रहे हैं। चुनाव में डकैतों के हस्तक्षेप रोकने का हर प्रयास किया जा रहा है।
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