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Kanpur News: हर घर नल-हर घर जल योजना की हकीकत पता कर रही सीएसजेएमयू की टीम
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कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि के समाज कार्य विभाग के छात्र और शिक्षकों की टीम हर घर नल-हर घर जल योजना का सर्वेक्षण कर रही है। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के तहत कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, फर्रुखाबाद, इटावा और औरैया में सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी है। वर्तमान में कानपुर नगर का सर्वे पूरा हो गया है।
मुख्य सर्वेक्षक डॉ. किरण झा की अगुवाई में डॉ. एसपी वर्मा, डॉ. एपी सिंह, डॉ. उर्वशी सिंह, डॉ. बुसरा बरकाती, अभय प्रताप सिंह, आर्यन सचान, तान्या त्रिवेदी, स्नेहा दुबे, शिप्रा द्विवेदी, बृजेश कुमार की टीम छह जिलों के गांवों में अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार कर रही है। डॉ. किरण झा ने बताया कि कानपुर के विभिन्न ब्लॉक के 15 गांवों में सर्वेक्षण किया जा चुका है।
सर्वे में ग्रामीणों से रोस्टर आधारित जल आपूर्ति, भंडारण प्रणाली, पानी में क्लोरीन की उपलब्धता, घरेलू जल उपयोग तथा फिल्टर की कार्यप्रणाली से संबंधित जानकारी ली गई। इसकी जानकारी अधिशासी अभियंता को दी गई है। अध्ययन में पता चला कि योजना से गांवों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बढ़ी है, महिलाओं के श्रम एवं समय की बचत हुई है तथा बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आ रहे हैं। टीम ने विद्यालय समय, ठंड एवं कोहरे के मौसम को ध्यान में रखते हुए जल आपूर्ति रोस्टर में परिवर्तन का सुझाव दिया है।
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मुख्य सर्वेक्षक डॉ. किरण झा की अगुवाई में डॉ. एसपी वर्मा, डॉ. एपी सिंह, डॉ. उर्वशी सिंह, डॉ. बुसरा बरकाती, अभय प्रताप सिंह, आर्यन सचान, तान्या त्रिवेदी, स्नेहा दुबे, शिप्रा द्विवेदी, बृजेश कुमार की टीम छह जिलों के गांवों में अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार कर रही है। डॉ. किरण झा ने बताया कि कानपुर के विभिन्न ब्लॉक के 15 गांवों में सर्वेक्षण किया जा चुका है।
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सर्वे में ग्रामीणों से रोस्टर आधारित जल आपूर्ति, भंडारण प्रणाली, पानी में क्लोरीन की उपलब्धता, घरेलू जल उपयोग तथा फिल्टर की कार्यप्रणाली से संबंधित जानकारी ली गई। इसकी जानकारी अधिशासी अभियंता को दी गई है। अध्ययन में पता चला कि योजना से गांवों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बढ़ी है, महिलाओं के श्रम एवं समय की बचत हुई है तथा बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आ रहे हैं। टीम ने विद्यालय समय, ठंड एवं कोहरे के मौसम को ध्यान में रखते हुए जल आपूर्ति रोस्टर में परिवर्तन का सुझाव दिया है।
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