CSJMU Survey: रेफरल सेंटर बने CHC-PHC, 71 फीसदी लोग परेशान; कानपुर के गांवों में इलाज करेगी मोबाइल मेडिकल वैन
Kanpur News: ग्रामीण इलाकों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालयजल्द ही मोबाइल मेडिकल केयर वैन शुरू करेगा। विश्वविद्यालय की ओर से कराए गए सर्वे में सामने आया कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों को सीएचसी और पीएचसी पर आवश्यक जांच, दवाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा नहीं मिल रही है।
विस्तार
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की लाचारी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालयद्वारा कानपुर के ग्रामीण इलाकों में कराए गए एक विशेष स्वास्थ्य सर्वे में बेहद चौंकाने वाले और परेशान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को न तो समय पर दवाएं मिल पा रही हैं और न ही जरूरी जांचों की सुविधा है। आलम यह है कि छोटी से छोटी बीमारी होने पर भी सीएचसी-पीएचसी के डॉक्टर मरीजों को सीधे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर देते हैं। इस बदहाली के बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन अब ग्रामीणों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर रहा है। सीएस जेएमयू जल्द ही चिह्नित गांवों में मोबाइल मेडिकल केयर वैन सेवा शुरू करने जा रहा है।
विवि की टीम ने 5 गांवों का किया गहन सर्वे
यह महत्वपूर्ण सर्वे विश्वविद्यालय के 'स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज एंड सोशल साइंसेज' के डीन प्रो. संदीप कुमार सिंह और स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज के डॉ. दिग्विजय शर्मा की देखरेख में पूरा किया गया। टीम ने कानपुर के पांच प्रमुख गांवों फत्तेपुर, बसौसी, मलिकपुर, टोडरपुर और शेखपुरा में घर-घर जाकर जमीनी हकीकत जानी।
सर्वे में समाज के हर वर्ग को शामिल किया गया ताकि रिपोर्ट पूरी तरह सटीक हो। प्रो. संदीप कुमार सिंह ने बताया कि सर्वे में कुल 171 सामान्य ग्रामीण, 77 बुजुर्ग, 34 गर्भवती महिलाएं, 9 आशा व एएनएम कार्यकर्ता, 8 आंगनबाड़ी कार्यकत्री, 2 पीएचसी-सीएचसी अधिकारी और 3 ग्राम प्रधान व पंचायत प्रतिनिधि शामिल रहे। उम्र के लिहाज से इसमें 50 फीसदी युवा (18 से 35 वर्ष), 35 फीसदी मध्यम आयु वर्ग (36 से 60 वर्ष) और 15 फीसदी बुजुर्ग (60 वर्ष से अधिक) शामिल थे।
सर्वे के 6 सबसे बड़े और झकझोरने वाले खुलासे
सीएसजेएमयू के इस सर्वे ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की दावों की हवा निकाल दी है। मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
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सरकारी तंत्र से मोहभंग: करीब 71 फीसदी ग्रामीणों ने साफ माना कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर कोई सुविधा नहीं मिलती। इससे बेहतर है कि वे थोड़ी फीस देकर प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज करवा लें।
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रेफरल का खेल: 56 फीसदी लोगों का कहना है कि छोटी-मोटी बीमारी लेकर जाने पर भी सरकारी डॉक्टर हाथ खड़े कर लेते हैं और सीधे जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।
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दूरी और परिवहन की मार: 40 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके घर से अस्पताल की दूरी 10 किलोमीटर से भी ज्यादा है। वहीं 60 फीसदी ने यातायात के साधन न होने की बात कही।
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बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं बेबस: 82 फीसदी बुजुर्गों ने शारीरिक असमर्थता के चलते अस्पताल जाने में लाचारी जताई। वहीं 35 फीसदी गर्भवती महिलाओं ने माना कि उन्हें गर्भावस्था के दौरान जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं पाने में भारी कठिनाई होती है।
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जांचों का अभाव: दूरी और सुविधाओं की कमी के कारण 55 फीसदी ग्रामीणों ने जीवन में कभी अपना ब्लड शुगर तक टेस्ट नहीं कराया है।
मोबाइल मेडिकल वैन को लोगों ने बताया 'संजीवनी'
अस्पतालों की इस बदहाली के बीच ग्रामीणों ने सीएसजेएमयू की मोबाइल मेडिकल केयर वैन (एमएमसीवी) योजना का दिल खोलकर स्वागत किया है। सर्वे में शामिल करीब 88 फीसदी लोगों ने माना कि गांवों में ऐसी मोबाइल वैन का आना बेहद जरूरी है, जबकि 92 फीसदी लोग इस वैन के जरिए इलाज कराने और दवाएं लेने के लिए पूरी तरह तैयार दिखे। यह वैन सीधे गांवों में जाकर मरीजों की जांच करेगी और उन्हें मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराएगी।