{"_id":"689269558c2cbb3421084222","slug":"csjmu-students-will-study-the-role-of-yagya-in-environmental-protection-changes-made-in-sanskrit-syllabus-kanpur-news-c-12-1-knp1051-1215777-2025-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएसजेएमयू : पर्यावरण संरक्षण में यज्ञ की भूमिका पढ़ेंगे छात्र, संस्कृत पाठ्यक्रम में हुआ बदलाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीएसजेएमयू : पर्यावरण संरक्षण में यज्ञ की भूमिका पढ़ेंगे छात्र, संस्कृत पाठ्यक्रम में हुआ बदलाव
विज्ञापन
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि से संबद्ध महाविद्यालयों में संचालित होने वाले संस्कृत पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। इसके तहत माइनर कोर्स को पूरी तरह बदल दिया गया है, जबकि परास्नातक में व्याकरण को शामिल किया गया है।
संस्कृत के छात्र अब पर्यावरण संरक्षण में यज्ञ की भूमिका, यज्ञ के घटकों का वैज्ञानिक महत्व, संस्कृत भाषा में विज्ञान-भूगोल, खगोल, गणित का सामान्य परिचय पढ़ेंगे। यह बदलाव इसी सत्र से लागू किया जाएगा।
पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार दीक्षित के नेतृत्व में बनारस, दिल्ली, इटावा, औरैया के प्रोफेसरों की टीम ने काम किया है। डॉ. दीक्षित ने बताया कि परास्नातक में पहली बार संस्कृत व्याकरण को लागू किया गया है। बदले पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को लेखन, वाचन और अध्ययन की दृष्टि से भाषागत दक्षता प्राप्त होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
संस्कृत के छात्र अब पर्यावरण संरक्षण में यज्ञ की भूमिका, यज्ञ के घटकों का वैज्ञानिक महत्व, संस्कृत भाषा में विज्ञान-भूगोल, खगोल, गणित का सामान्य परिचय पढ़ेंगे। यह बदलाव इसी सत्र से लागू किया जाएगा।
विज्ञापन
पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार दीक्षित के नेतृत्व में बनारस, दिल्ली, इटावा, औरैया के प्रोफेसरों की टीम ने काम किया है। डॉ. दीक्षित ने बताया कि परास्नातक में पहली बार संस्कृत व्याकरण को लागू किया गया है। बदले पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को लेखन, वाचन और अध्ययन की दृष्टि से भाषागत दक्षता प्राप्त होगी।
विज्ञापन