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अलसी, मसूर, राई और तोरिया की नई प्रजातियां विकसित, किसानों को खूब होगा फायदा
Thu, 22 Aug 2019 05:32 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 22 Aug 2019 05:32 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वैज्ञानिकों ने अलसी, मसूर, राई और तोरिया फसलों की चार नई प्रजातियां विकसित की हैं। बुधवार को लखनऊ स्थित कृषि निदेशालय में प्रमुख सचिव कृषि ने इन प्रजातियों का विमोचन किया।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि मसूर की नई प्रजाति का विकास डॉ. मनोज कटियार ने किया है। इसे शेखर-8 नाम दिया गया है। मसूर की यह फसल बुंदेलखंड के किसानों के लिए काफी लाभदायक होगी। इसके दानों का आकार बड़ा होगा और रंग भूरा होगा। डॉ. कटियार ने बताया कि अगर इसकी समय से बुआई की जाए तो 16 से 18 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज होगी।
खास बात है कि 105 से 115 दिनों में ही यह फसल तैयार हो जाएगी। यह प्रजाति उकटा और रतुआ रोग रोधी भी है। डॉ. कटियार ने बताया कि अभी तक जो फसलें होती थीं उन्हें तैयार होने में 130 से 150 दिन लग जाते थे। चारों नई प्रजातियों को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों को कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन ने बधाई दी।
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विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि मसूर की नई प्रजाति का विकास डॉ. मनोज कटियार ने किया है। इसे शेखर-8 नाम दिया गया है। मसूर की यह फसल बुंदेलखंड के किसानों के लिए काफी लाभदायक होगी। इसके दानों का आकार बड़ा होगा और रंग भूरा होगा। डॉ. कटियार ने बताया कि अगर इसकी समय से बुआई की जाए तो 16 से 18 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज होगी।
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खास बात है कि 105 से 115 दिनों में ही यह फसल तैयार हो जाएगी। यह प्रजाति उकटा और रतुआ रोग रोधी भी है। डॉ. कटियार ने बताया कि अभी तक जो फसलें होती थीं उन्हें तैयार होने में 130 से 150 दिन लग जाते थे। चारों नई प्रजातियों को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों को कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन ने बधाई दी।
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बगैर सिंचाई के अलसी की करें खेती
तिलहनी फसलों में अलसी की नई प्रजाति डॉ. नलिनी तिवारी ने विकसित की है। इसे अनु नाम दिया गया है। डॉ. नलिनी ने बताया कि यह ऐसी फसल है जिसकी अगर समय से बुआई की जाए तो सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। उपज के मामले में भी काफी अच्छी फसल है। इसकी उपज प्रति हेक्टेयर 11.54 कुंतल होती है। इस प्रजाति में तेल की मात्रा 39 प्रतिशत होती है। फसल 128 दिनों में तैयार हो जाएगी।
'आजाद महक' राई में कोई रोग नहीं लगेगा
राई की नई प्रजाति ‘आजाद महक’ डॉ. महक सिंह ने तैयार की है। डॉ. महक ने बताया कि यह फसल 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाएगी। इस प्रजाति में तेल की मात्रा 42.4 प्रतिशत है। समय से बुआई करने पर 22 से 25 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक इसकी उपज होगी। खास बात यह है कि इस फसल में किसी तरह का रोग नहीं लगेगा।
तिलहनी में तोरिया का भी बड़ा काम
डॉ. महक ने ही तिलहनी में तोरिया की नई प्रजाति आजाद चेतना भी विकसित की है। यह प्रजाति 90 से 95 दिनों में तैयार हो जाती है। इसमें 44.6 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है। 12 से 14.5 कुंतल प्रति हेक्टेयर इसकी उपज होती है। इसमें भी किसी भी तरह के रोग या कीड़े नहीं लगते हैं।
तिलहनी फसलों में अलसी की नई प्रजाति डॉ. नलिनी तिवारी ने विकसित की है। इसे अनु नाम दिया गया है। डॉ. नलिनी ने बताया कि यह ऐसी फसल है जिसकी अगर समय से बुआई की जाए तो सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। उपज के मामले में भी काफी अच्छी फसल है। इसकी उपज प्रति हेक्टेयर 11.54 कुंतल होती है। इस प्रजाति में तेल की मात्रा 39 प्रतिशत होती है। फसल 128 दिनों में तैयार हो जाएगी।
'आजाद महक' राई में कोई रोग नहीं लगेगा
राई की नई प्रजाति ‘आजाद महक’ डॉ. महक सिंह ने तैयार की है। डॉ. महक ने बताया कि यह फसल 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाएगी। इस प्रजाति में तेल की मात्रा 42.4 प्रतिशत है। समय से बुआई करने पर 22 से 25 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक इसकी उपज होगी। खास बात यह है कि इस फसल में किसी तरह का रोग नहीं लगेगा।
तिलहनी में तोरिया का भी बड़ा काम
डॉ. महक ने ही तिलहनी में तोरिया की नई प्रजाति आजाद चेतना भी विकसित की है। यह प्रजाति 90 से 95 दिनों में तैयार हो जाती है। इसमें 44.6 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है। 12 से 14.5 कुंतल प्रति हेक्टेयर इसकी उपज होती है। इसमें भी किसी भी तरह के रोग या कीड़े नहीं लगते हैं।