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खुली ‘ट्रिपल मर्डर मिस्ट्री की लाल डायरी’, कई पत्रकार और पुलिसवाले पाते थे हफ्ता
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 28 Nov 2016 08:34 PM IST
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पुलिस इन लोगाें पर भी शिकंजा कसने को तैयारी में है
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उरई जालौन के मातापुरा में पिछले दिनों हुए तिहरे हत्याकांड में पुलिस के हाथ कुछ चौंकाने वाले तथ्य लगे हैं। इनमें एक लाल डायरी भी शामिल है जिसमें कई पत्रकार व पुलिस कर्मियाें के नाम दर्ज हैं। खुद एसपी डा. राकेश सिंह ने माना कि कुछ पुलिस कर्मी व पत्रकार भी स्मैक तस्करी का पैसा लेते थे। पुलिस इन लोगाें पर भी शिकंजा कसने को तैयारी में है।
शहर कोतवाली के मुहल्ला मातापुरा में रहने वाली अभिलाषा तिवारी, उसके पति सुरेंद्र तिवारी व पुत्र कार्तिक तिवारी पर स्मैक कारोबार करने का आरोप था। इनकी पिछले दिनों हत्या कर दी गई थी। उनके घर से मिली लाल डायरी में कई ऐसे राज कैद हैं जिनसे पुलिस व मीडिया का असली चेहरा सामने आ सकता है। पुलिस ऐसे संदिग्धाें की पड़ताल कर रही है जो इनके गोरखधंधे में शामिल रहे हैं। पुलिस को कुछ पुलिस कर्मियाें के मोबाइल नंबर भी मिले है जो इनके धंधे में सहयोग करते थे।
स्वयं एसपी ने स्वीकार किया कि इस लाल डायरी में कई पुलिस और मीडिया कर्मियों के नाम लिखे हैं। एसपी डा. राकेश सिंह ने भी स्वीकार किया है कि कई संदिग्ध लोग है जो इनके काले कारोबार में संलिप्त थे। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि वह कौन कौन पुलिस कर्मी व पत्रकार है जो इस काले कारोबार में उनका साथ देते थे। पुलिस ग्वालियर व झांसी में भी तिहरे हत्याकांड के आरोपियों की तलाश कर रही है।
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हत्या के बाद भी आता रहा फोन
पुलिस इंटेलिजेंस के अनुसार मरने के बाद भी मृतकों के फोन पर कई काल आती रहीं। पुलिस के अनुसार हो सकता है ये वे लोग हों जो उनके साथ स्मैक के धंधे में साझीदार रहे हों। पुलिस इनकी काल डीटेल खंगाल रही है। पुलिस सर्विलांस टीम भी मोबाइल काल की लोकेशन व इसके मालिकों की धरपकड़ के लिए अपना जाल बिछा रही है।
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शहर कोतवाली के मुहल्ला मातापुरा में रहने वाली अभिलाषा तिवारी, उसके पति सुरेंद्र तिवारी व पुत्र कार्तिक तिवारी पर स्मैक कारोबार करने का आरोप था। इनकी पिछले दिनों हत्या कर दी गई थी। उनके घर से मिली लाल डायरी में कई ऐसे राज कैद हैं जिनसे पुलिस व मीडिया का असली चेहरा सामने आ सकता है। पुलिस ऐसे संदिग्धाें की पड़ताल कर रही है जो इनके गोरखधंधे में शामिल रहे हैं। पुलिस को कुछ पुलिस कर्मियाें के मोबाइल नंबर भी मिले है जो इनके धंधे में सहयोग करते थे।
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स्वयं एसपी ने स्वीकार किया कि इस लाल डायरी में कई पुलिस और मीडिया कर्मियों के नाम लिखे हैं। एसपी डा. राकेश सिंह ने भी स्वीकार किया है कि कई संदिग्ध लोग है जो इनके काले कारोबार में संलिप्त थे। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि वह कौन कौन पुलिस कर्मी व पत्रकार है जो इस काले कारोबार में उनका साथ देते थे। पुलिस ग्वालियर व झांसी में भी तिहरे हत्याकांड के आरोपियों की तलाश कर रही है।
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हत्या के बाद भी आता रहा फोन
पुलिस इंटेलिजेंस के अनुसार मरने के बाद भी मृतकों के फोन पर कई काल आती रहीं। पुलिस के अनुसार हो सकता है ये वे लोग हों जो उनके साथ स्मैक के धंधे में साझीदार रहे हों। पुलिस इनकी काल डीटेल खंगाल रही है। पुलिस सर्विलांस टीम भी मोबाइल काल की लोकेशन व इसके मालिकों की धरपकड़ के लिए अपना जाल बिछा रही है।