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चुटकियों में ऑनलाइन पेपर सॉल्व करा देते थे ये शातिर हैकर्स
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 25 Oct 2016 12:22 AM IST
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साफ्टवेयर हैक करके विभिन्न सरकारी नौकरियों की ऑनलाइन परीक्षा में धांधली करने वाले गैंग का खुलासा करते हुए यूपी एसटीएफ ने 10 युवकों को गिरफ्तार किया
- फोटो : अमर उजाला
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साफ्टवेयर हैक करके विभिन्न सरकारी नौकरियों की ऑनलाइन परीक्षा में धांधली करने वाले गैंग का खुलासा करते हुए यूपी एसटीएफ ने 10 युवकों को गिरफ्तार किया है। सोमवार को कानपुर पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि सभी आरोपियों को थाना कल्याणपुर के लखनपुर में एक फ्लैट से गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों से 19 मोबाइल, चार कारें, पांच लैपटाप, तीन हार्ड डिस्क, 13 ड्राइविंग लाइसेंस, 33 पैन कार्ड, 289 निर्वाचन कार्ड, 23 बैंक पासबुक, 200 शैक्षिक प्रमाणपत्र और 9.5 लाख रुपये नगद बरामद हुए हैं। इन जालसाजों ने 35 से ज्यादा अभ्यर्थियों को फर्जीवाड़े से परीक्षाओं में पास करवाया है। कल्याणपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है जिसकी विवेचना लखनऊ के साइबर थाने द्वारा की जाएगी। डीजीपी जावीद अहमद ने खुलासा करने वाली टीम को 50 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी नौकरियों की ऑनलाइन परीक्षाओं में सेंध लगाने वाले गैंग का खुलासा यूपी एसटीएफ ने किया है। एसएसपी के मुतबिक 22अप्रैल 2016 को इलाहाबाद में रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की परीक्षा के दौरान संयोगिता इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट एंड टेक्नोलाजी में साल्वर गैंग का खुलासा हुआ था। वहां से मिली जानकारियों पर काम करने पर कानपुर का गैंग प्रकाश में आया जिसकी गिरफ्तारी रविवार देर रात हुई। गिरफ्तार आरोपी कानपुर स्वरूपनगर निवासी कृष्णन प्रसन्ना उर्फ केपी, फतेहपुर निवासी रविकांत वर्मा, वैशाली बिहार निवासी रूपेश कुमार शर्मा, कन्नौज निवासी आलोक प्रताप सिंह, फतेहपुर निवासी रवींद्र प्रताप सिंह, घाटमपुर कानपुर निवासी अभिषेक कुमार, कानपुर देहात निवासी अंकुर कुमार उर्फ अमित कटियार, सीतापुर निवासी सुनील कुमार और घाटमपुर कानपुर निवासी रजत सचान हैं।
करोड़ों कमाए
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी केपी, रविकांत और आलोक ने इलाहाबाद, गोरखपुर, गोंडा, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, मुरादाबाद, रूड़की, देहरादून में कई सेंटरों और ओटीपी को अपने गैंग में मिला रखा है। इन लोगों ने वीरेंद्र स्वरूप कालेज उन्नाव-कानपुर, सूर्या कालेज, ग्लोब एजुकेशन सेंटर, रायल पीजी लखनऊ सहित एक दर्जन आई ऑन डिजिटल सेंटरों को अपने गैंग में जोड़ रखा था। इस गैंग ने पिछले छह महीने में इस धंधे से ही पांच करोड़ रुपये कमाए हैं। इस रकम से गैंग ने कई शहरों में अचल संपत्ति भी खरीदी है। ये गैंग बैंक पीओ परीक्षा के लिए 10-15 लाख और क्लर्क के लिए 5-8 लाख रुपये लेता था। 28 नवंबर को बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पीओ का ऑनलाइन इम्तिहान इस गैंग के निशाने पर था।
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राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी नौकरियों की ऑनलाइन परीक्षाओं में सेंध लगाने वाले गैंग का खुलासा यूपी एसटीएफ ने किया है। एसएसपी के मुतबिक 22अप्रैल 2016 को इलाहाबाद में रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की परीक्षा के दौरान संयोगिता इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट एंड टेक्नोलाजी में साल्वर गैंग का खुलासा हुआ था। वहां से मिली जानकारियों पर काम करने पर कानपुर का गैंग प्रकाश में आया जिसकी गिरफ्तारी रविवार देर रात हुई। गिरफ्तार आरोपी कानपुर स्वरूपनगर निवासी कृष्णन प्रसन्ना उर्फ केपी, फतेहपुर निवासी रविकांत वर्मा, वैशाली बिहार निवासी रूपेश कुमार शर्मा, कन्नौज निवासी आलोक प्रताप सिंह, फतेहपुर निवासी रवींद्र प्रताप सिंह, घाटमपुर कानपुर निवासी अभिषेक कुमार, कानपुर देहात निवासी अंकुर कुमार उर्फ अमित कटियार, सीतापुर निवासी सुनील कुमार और घाटमपुर कानपुर निवासी रजत सचान हैं।
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पूछताछ में सामने आया कि आरोपी केपी, रविकांत और आलोक ने इलाहाबाद, गोरखपुर, गोंडा, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, मुरादाबाद, रूड़की, देहरादून में कई सेंटरों और ओटीपी को अपने गैंग में मिला रखा है। इन लोगों ने वीरेंद्र स्वरूप कालेज उन्नाव-कानपुर, सूर्या कालेज, ग्लोब एजुकेशन सेंटर, रायल पीजी लखनऊ सहित एक दर्जन आई ऑन डिजिटल सेंटरों को अपने गैंग में जोड़ रखा था। इस गैंग ने पिछले छह महीने में इस धंधे से ही पांच करोड़ रुपये कमाए हैं। इस रकम से गैंग ने कई शहरों में अचल संपत्ति भी खरीदी है। ये गैंग बैंक पीओ परीक्षा के लिए 10-15 लाख और क्लर्क के लिए 5-8 लाख रुपये लेता था। 28 नवंबर को बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पीओ का ऑनलाइन इम्तिहान इस गैंग के निशाने पर था।
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