{"_id":"5814ee244f1c1b250ebc25ef","slug":"neibour-killed-innocent-child","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो लाख नहीं मिले, सिर कुलचकर मार दी गई मासूम ‘छवि’","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दो लाख नहीं मिले, सिर कुलचकर मार दी गई मासूम ‘छवि’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 30 Oct 2016 12:15 AM IST
विज्ञापन
पैसों के लिए पड़ोसियों ने ही बच्ची को मार डाला
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर के नौरैय्याखेड़ा से आठ दिन पहले अगवा डेढ़ साल की बच्ची छवि का उसके ही पड़ोसी आलोक नेे दो लाख फिरौती के लिए मुंह में कपड़ा ठूंसकर सिर पर वार करके कत्ल कर दिया। आलोक ने अपने साथी प्रतीक की मदद से शव को पनकी अर्मापुर के जंगल में फेंक दिया।
ट्रक ड्राइवर चंद्रकुमार अपनी पत्नी रागिनी और बच्ची छवि के साथ डेढ़ माह पहले ही फतेहपुर जफरगंज से यहां रहने आया था। वह नौरैय्याखेड़ा में विनोद सिंह के हातानुमा मकान में किराए पर रहता है। बगल के कमरों में चंद्रकुमार, आलोक और प्रतीक आदि रहते हैं। 21 अक्तूबर की रात रागिनी छवि के साथ कमरे में सो रही थी। चंद्रकुमार बाहर गया हुआ था। रागिनी के कमरे के दरवाजे खुले थे। रात में किसी समय कोई छवि को चारपाई से उठा ले गया था। सुबह इसका पता चला था। एसएसपी आकाश कुलहरि ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि बच्ची का अपहरण और हत्या पड़ोसी आलोक और प्रतीक ने की थी। अगल-बगल रहने के दौरान आलोक ने पहले रागिनी से ताल्लुकात बढ़ाए और उसके व पति के बैंक खातों में जमा रुपयों की जानकारी कर ली। 21 अक्तूबर की रात जब रागिनी कमरे का दरवाजा खोलकर छवि के साथ सो रही थी, तभी बगल के कमरे में रहने वाला आलोक उसे उठा कर अपने कमरे में ले गया।
बकौल आलोक, बच्ची कमरे में आते ही जाग गई और रोने लगी तो उसने अपनी कमीज फाड़कर उसके हाथ-पैर बांधे और मुंह में कपड़ा ठूंसकर सिर पर वार किया। फिर उसे कमरे की दोछत्ती पर फेंक दिया। अगले दिन जब उसने दोछत्ती से छवि को उतारा तो उसकी मौत हो चुकी थी। इस पर उसने बगल में रहने वाले प्रतीक को बुलाया फिर बैग में छवि के शव को भरकर उसे जंगल में फेंक आया।
विज्ञापन
आलोक ने बताया कि शव ठिकाने लगाने के बाद उसने नीचे के कमरे में रहने वाले किराएदार कमलेश का मोबाइल चोरी किया, फिर उसी से चंद्रकुमार को फोन कर बेटी के बदले दो लाख फिरौती की मांग की। सीओ ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक आलोक पिछले कुछ समय से बेरोजगार था। सर्विलांस की मदद से आलोक और प्रतीक को दबोचा गया और फिर उनकी निशानदेही पर आलोक के कमरे से बैग और छवि का शव जंगल से बरामद किया गया।
विज्ञापन
ट्रक ड्राइवर चंद्रकुमार अपनी पत्नी रागिनी और बच्ची छवि के साथ डेढ़ माह पहले ही फतेहपुर जफरगंज से यहां रहने आया था। वह नौरैय्याखेड़ा में विनोद सिंह के हातानुमा मकान में किराए पर रहता है। बगल के कमरों में चंद्रकुमार, आलोक और प्रतीक आदि रहते हैं। 21 अक्तूबर की रात रागिनी छवि के साथ कमरे में सो रही थी। चंद्रकुमार बाहर गया हुआ था। रागिनी के कमरे के दरवाजे खुले थे। रात में किसी समय कोई छवि को चारपाई से उठा ले गया था। सुबह इसका पता चला था। एसएसपी आकाश कुलहरि ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि बच्ची का अपहरण और हत्या पड़ोसी आलोक और प्रतीक ने की थी। अगल-बगल रहने के दौरान आलोक ने पहले रागिनी से ताल्लुकात बढ़ाए और उसके व पति के बैंक खातों में जमा रुपयों की जानकारी कर ली। 21 अक्तूबर की रात जब रागिनी कमरे का दरवाजा खोलकर छवि के साथ सो रही थी, तभी बगल के कमरे में रहने वाला आलोक उसे उठा कर अपने कमरे में ले गया।
विज्ञापन
बकौल आलोक, बच्ची कमरे में आते ही जाग गई और रोने लगी तो उसने अपनी कमीज फाड़कर उसके हाथ-पैर बांधे और मुंह में कपड़ा ठूंसकर सिर पर वार किया। फिर उसे कमरे की दोछत्ती पर फेंक दिया। अगले दिन जब उसने दोछत्ती से छवि को उतारा तो उसकी मौत हो चुकी थी। इस पर उसने बगल में रहने वाले प्रतीक को बुलाया फिर बैग में छवि के शव को भरकर उसे जंगल में फेंक आया।
विज्ञापन
आलोक ने बताया कि शव ठिकाने लगाने के बाद उसने नीचे के कमरे में रहने वाले किराएदार कमलेश का मोबाइल चोरी किया, फिर उसी से चंद्रकुमार को फोन कर बेटी के बदले दो लाख फिरौती की मांग की। सीओ ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक आलोक पिछले कुछ समय से बेरोजगार था। सर्विलांस की मदद से आलोक और प्रतीक को दबोचा गया और फिर उनकी निशानदेही पर आलोक के कमरे से बैग और छवि का शव जंगल से बरामद किया गया।