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कमलेश तिवारी हत्याकांड: हत्यारोपियों ने दो साल पहले खरीदी थी यूसुफ से पिस्टल
Sun, 03 Nov 2019 05:08 PM IST
शिखा पांडेय
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 03 Nov 2019 05:08 PM IST
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यूसुफ खान
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में हुई हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या के आरोपियों ने शुक्रवार को कानपुर के घंटाघर चौराहे से गिरफ्तार किए गए यूसुफ खान से दो साल पहले पिस्टल खरीदी थी। आरोपियों अशफाक और मोइनुद्दीन ने इसके लिए 20 हजार रुपये दिए थे।
इसका खुलासा खुद यूसुफ ने एटीएस की पूछताछ में किया। एटीएस व एसआईटी को यह भी आशंका है कि यूसुफ कमलेश की हत्या की साजिश में भी शामिल रहा है। हालांकि अभी वह इस बात से मुकर रहा है। एटीएस अब रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।
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इसका खुलासा खुद यूसुफ ने एटीएस की पूछताछ में किया। एटीएस व एसआईटी को यह भी आशंका है कि यूसुफ कमलेश की हत्या की साजिश में भी शामिल रहा है। हालांकि अभी वह इस बात से मुकर रहा है। एटीएस अब रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।
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अशफाक व मोइनुद्दीन ने कमलेश पर चाकुओं से वार करने के अलावा पिस्टल से भी एक गोली मारी थी। यह पिस्टल हथगांव के रायपुरवा मुवारी फतेहपुर निवासी यूसुफ से खरीदी थी। यूपी व गुजरात एटीएस ने शुक्रवार को यूसुफ को गिरफ्तार कर लिया। एटीएस सूत्रों के मुताबिक यूसुफ पिछले करीब एक दशक से सूरत (गुजरात) में रह रहा था।
वह वहां काम करने गया था लेकिन अपराध की दुनिया में उतर गया। उसके खिलाफ 2016 में पहला मामला दर्ज हुआ। अब तब करीब एक दर्जन मामले दर्ज हैं। 2017 में कमलेश की हत्या के आरोपियों को पिस्टल बेचने के बाद यूसुफ तीन पिस्टल व एक तमंचे के साथ गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि तब उसने पिस्टल बेचने की बात कबूल नहीं की थी।
वह वहां काम करने गया था लेकिन अपराध की दुनिया में उतर गया। उसके खिलाफ 2016 में पहला मामला दर्ज हुआ। अब तब करीब एक दर्जन मामले दर्ज हैं। 2017 में कमलेश की हत्या के आरोपियों को पिस्टल बेचने के बाद यूसुफ तीन पिस्टल व एक तमंचे के साथ गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि तब उसने पिस्टल बेचने की बात कबूल नहीं की थी।
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ऐसे हुआ यूसुफ से संपर्क
एटीएस सूत्रों के मुताबिक अशफाक व मोइनुद्दीन जिस अपार्टमेंट में रहते थे, उसी में यूसुफ भी रहता था। इसके चलते सभी में आपस में बातचीत होेने लगी। यूसुफ जब आपराधिक घटनाओं में शामिल हुआ तो इन दोनों को भी इसकी जानकारी हुई। इस दौरान ये लोग कमलेश की हत्या की साजिश रच रहे थे। इसके बाद अशफाक ने यूसुफ से संपर्क कर पिस्टल का सौदा किया।
यूसुफ के कहने पर रेलबाजार से लिया सिम
अशफाक व मोइनुद्दीन लखनऊ जाते समय घंटाघर स्टेशन उतरे थे। रेलबाजार स्थित कान्हा टेलीकॉम दुकान से सिम व मोबाइल खरीदा था। एटीएस सूत्रों के मुताबिक दोनों आरोपी कानपुर शहर से परिचित नहीं थे। यूसुफ के बताने पर ही इस दुकान पहुंचे थे। एटीएस ने यूसुफ के तीन मोबाइल नंबरों की सीडीआर निकाली है। उसमें आरोपियों से बातचीत की पुष्टि हुई है।
एटीएस सूत्रों के मुताबिक अशफाक व मोइनुद्दीन जिस अपार्टमेंट में रहते थे, उसी में यूसुफ भी रहता था। इसके चलते सभी में आपस में बातचीत होेने लगी। यूसुफ जब आपराधिक घटनाओं में शामिल हुआ तो इन दोनों को भी इसकी जानकारी हुई। इस दौरान ये लोग कमलेश की हत्या की साजिश रच रहे थे। इसके बाद अशफाक ने यूसुफ से संपर्क कर पिस्टल का सौदा किया।
यूसुफ के कहने पर रेलबाजार से लिया सिम
अशफाक व मोइनुद्दीन लखनऊ जाते समय घंटाघर स्टेशन उतरे थे। रेलबाजार स्थित कान्हा टेलीकॉम दुकान से सिम व मोबाइल खरीदा था। एटीएस सूत्रों के मुताबिक दोनों आरोपी कानपुर शहर से परिचित नहीं थे। यूसुफ के बताने पर ही इस दुकान पहुंचे थे। एटीएस ने यूसुफ के तीन मोबाइल नंबरों की सीडीआर निकाली है। उसमें आरोपियों से बातचीत की पुष्टि हुई है।