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‘हत्या में पीयूष के मां-पिता, भाइयों की सहमति थी’
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 02 May 2015 03:03 AM IST
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ज्योति मर्डर केस में शुक्रवार को पीयूष के पिता, मां और भाइयों को हत्या और हत्या की साजिश का अभियुक्त बनाए जाने की अर्जी पर जिला जज अरुण कुमार गुप्ता की कोर्ट में सुनवाई हुई। अभियोजन ने कई तर्क रखते हुए कहा कि ज्योति की हत्या में इन सभी की सहमति थी। बचाव पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई।
अब इस मामले पर चार मई को सुनवाई होगी। ज्योति की हत्या के अिभयुक्त पति पीयूष श्यामदासानी, मनीषा मखीजा, अवधेश, सोनू, रेनू और आशीष को कड़ी सुरक्षा में जेल से कोर्ट लाया गया।
शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र पाल सिंह और ज्योति के पिता शंकर नागदेव के अधिवक्ता दामोदर मिश्र ने बताया कि शुक्रवार को पीयूष श्यामदासानी के पिता ओम प्रकाश, मां पूनम, चचेरे भाई मुकेश और कमलेश को हत्या, हत्या की साजिश करने और साक्ष्य छिपाने का आरोपी बनाने की अर्जी पर सुनवाई हुई।
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पुलिस ने इन चारों को सिर्फ धारा 202 (अपराध जानते हुए छिपाने) का आरोपी बनाया है। यह सभी हत्या की साजिश में शामिल थे। अभियोजन ने कहा कि 27 जुलाई 2013 को हत्या से पहले भी ज्योति को दो बार और मारने का प्रयास हुआ था।
मजिस्ट्रेट को दिए बयानों में कहा गया था कि पंडित त्रिवेदी शंकर दीक्षित से पीयूष की मां ने कहा था कि बहू और बेटे के संबंध अच्छे नहीं हैं। यह बात भी मजिस्ट्रेट को दिए बयानों में इन लोगों ने कही थी कि मुझे संदेह था कि पीयूष ने गलती तो नहीं कर दी।
ओम प्रकाश ने कहा था कि वह घटना के दिन बाहर जा रहे थे तभी 11:42 बजे मुकेश के फोन पर पीयूष ने कहा था कि ज्योति को बदमाश उठा ले गए है। लेकिन मुकेश के फोन की लोकेशन दूसरी जगह की निकली थी। इससे साफ होता है कि इन लोगों ने बयान में झूठ कहा।
हकीकत में इन्हें सब कुछ मालूम था। ज्योति के अपहरण की खबर के बाद भी किसी ने भी ज्योति के फोन पर कॉल नहीं की और आपस में एक-दूसरे को 68 कॉल की गईं। इन सभी बातों से साफ होता है कि यह सभी हत्या की साजिश में शामिल थे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सईद नकवी ने इस पर आपत्ति जताते हुए इन बातों से इनकार किया।
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अब इस मामले पर चार मई को सुनवाई होगी। ज्योति की हत्या के अिभयुक्त पति पीयूष श्यामदासानी, मनीषा मखीजा, अवधेश, सोनू, रेनू और आशीष को कड़ी सुरक्षा में जेल से कोर्ट लाया गया।
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शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र पाल सिंह और ज्योति के पिता शंकर नागदेव के अधिवक्ता दामोदर मिश्र ने बताया कि शुक्रवार को पीयूष श्यामदासानी के पिता ओम प्रकाश, मां पूनम, चचेरे भाई मुकेश और कमलेश को हत्या, हत्या की साजिश करने और साक्ष्य छिपाने का आरोपी बनाने की अर्जी पर सुनवाई हुई।
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पुलिस ने इन चारों को सिर्फ धारा 202 (अपराध जानते हुए छिपाने) का आरोपी बनाया है। यह सभी हत्या की साजिश में शामिल थे। अभियोजन ने कहा कि 27 जुलाई 2013 को हत्या से पहले भी ज्योति को दो बार और मारने का प्रयास हुआ था।
मजिस्ट्रेट को दिए बयानों में कहा गया था कि पंडित त्रिवेदी शंकर दीक्षित से पीयूष की मां ने कहा था कि बहू और बेटे के संबंध अच्छे नहीं हैं। यह बात भी मजिस्ट्रेट को दिए बयानों में इन लोगों ने कही थी कि मुझे संदेह था कि पीयूष ने गलती तो नहीं कर दी।
ओम प्रकाश ने कहा था कि वह घटना के दिन बाहर जा रहे थे तभी 11:42 बजे मुकेश के फोन पर पीयूष ने कहा था कि ज्योति को बदमाश उठा ले गए है। लेकिन मुकेश के फोन की लोकेशन दूसरी जगह की निकली थी। इससे साफ होता है कि इन लोगों ने बयान में झूठ कहा।
हकीकत में इन्हें सब कुछ मालूम था। ज्योति के अपहरण की खबर के बाद भी किसी ने भी ज्योति के फोन पर कॉल नहीं की और आपस में एक-दूसरे को 68 कॉल की गईं। इन सभी बातों से साफ होता है कि यह सभी हत्या की साजिश में शामिल थे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सईद नकवी ने इस पर आपत्ति जताते हुए इन बातों से इनकार किया।