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मनीषा को जमानत, पर रिहाई अभी नहीं
अमर उजाला कानपुर
Updated Fri, 12 Jun 2015 03:08 AM IST
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ज्योति मर्डर केस में अभियुक्त मनीषा मखीजा को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उसके अधिवक्ता ने गुरुवार को प्रभारी जिला जज की कोर्ट में रिहाई की अर्जी लगाई। प्रभारी जिला जज ने चार-चार लाख की दो जमानतों पर मनीषा की रिहाई का आदेश दिया है। इसके बावजूद अभी मनीषा को जेल में ही रहना होगा, क्योंकि अभी उसे फर्जी सिम मामले में जमानत नहीं मिली है। फर्जी सिम मामले में जमानत मिलने के बाद ही मनीषा जेल से बाहर आ सकेगी।
मनीषा मखीजा के अधिवक्ता कमलेश पाठक ने बताया कि हाईकोर्ट से मनीषा को जमानत मिल गई है। गुरुवार को हाईकोर्ट के आदेश के साथ प्रभारी जिला जज/एडीजे-5 की कोर्ट में रिहाई की अर्जी लगाई गई। इस पर कोर्ट ने चार-चार लाख की दो जमानतों पर रिहाई का आदेश कर दिया। अब शुक्रवार को जमानतें लगाई जाएंगी। उसके खिलाफ फर्जी सिम मामले में जमानत की अर्जी पर 22 जून को सुनवाई होगी। इस मामले में जमानत मिलने पर ही मनीषा की रिहाई संभव होगी।
इनसेट-
ये था मामला
27 जुलाई 2014 को पांडुनगर निवासी पीयूष श्यामदासानी की पत्नी ज्योति (27) को अगवा कर हत्या कर दी गई। वह पति के साथ सीएसए चौराहा स्थित रैना मार्केट के वरांडा रेस्टोरेंट से खाना खाकर रात 11:30 बजे कार से पति के साथ घर लौट रही थी। देर रात लगभग सवा एक बजे ज्योति का शव पनकी थाने की पीछे गली में कार के अंदर मिला। पीयूष ने दावा किया था कि चार बाइक पर सवार आठ युवकों ने उन्हें कार से बाहर फेंककर पत्नी को अगवा कर लिया था। बाद में पुलिस ने ज्योति के पति समेत छह लोगों को अभियुक्त बनाया था। पीयूष के माता-पिता और दो भाइयों को भी पुलिस को अपराध की सूचना न देने का आरोपी बनाया गया था।
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किस अभियुक्त पर कौन सी धाराएं
- पीयूष-धारा 302 (मर्डर), 120 बी (साजिश करना), 201 (साक्ष्य छिपाना) और 203 (गलत साक्ष्य देकर मुकदमा दर्ज कराना)
- मनीषा-धारा 302 (मर्डर), 120 बी (साजिश करना), 201 (साक्ष्य छिपाना)
- अवधेश, सोनू और मोनू-धारा 302 (मर्डर), 120 बी (साजिश करना), 201 (साक्ष्य छिपाना), 404 (मृतक के शरीर से कीमती सामान निकालना), 34(समान आशय)
- आशीष-धारा 302 (मर्डर), 120 बी (साजिश करना), 201 (साक्ष्य छिपाना), 364 (अपहरण), 34 (समान आशय)
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मनीषा मखीजा के अधिवक्ता कमलेश पाठक ने बताया कि हाईकोर्ट से मनीषा को जमानत मिल गई है। गुरुवार को हाईकोर्ट के आदेश के साथ प्रभारी जिला जज/एडीजे-5 की कोर्ट में रिहाई की अर्जी लगाई गई। इस पर कोर्ट ने चार-चार लाख की दो जमानतों पर रिहाई का आदेश कर दिया। अब शुक्रवार को जमानतें लगाई जाएंगी। उसके खिलाफ फर्जी सिम मामले में जमानत की अर्जी पर 22 जून को सुनवाई होगी। इस मामले में जमानत मिलने पर ही मनीषा की रिहाई संभव होगी।
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इनसेट-
ये था मामला
27 जुलाई 2014 को पांडुनगर निवासी पीयूष श्यामदासानी की पत्नी ज्योति (27) को अगवा कर हत्या कर दी गई। वह पति के साथ सीएसए चौराहा स्थित रैना मार्केट के वरांडा रेस्टोरेंट से खाना खाकर रात 11:30 बजे कार से पति के साथ घर लौट रही थी। देर रात लगभग सवा एक बजे ज्योति का शव पनकी थाने की पीछे गली में कार के अंदर मिला। पीयूष ने दावा किया था कि चार बाइक पर सवार आठ युवकों ने उन्हें कार से बाहर फेंककर पत्नी को अगवा कर लिया था। बाद में पुलिस ने ज्योति के पति समेत छह लोगों को अभियुक्त बनाया था। पीयूष के माता-पिता और दो भाइयों को भी पुलिस को अपराध की सूचना न देने का आरोपी बनाया गया था।
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किस अभियुक्त पर कौन सी धाराएं
- पीयूष-धारा 302 (मर्डर), 120 बी (साजिश करना), 201 (साक्ष्य छिपाना) और 203 (गलत साक्ष्य देकर मुकदमा दर्ज कराना)
- मनीषा-धारा 302 (मर्डर), 120 बी (साजिश करना), 201 (साक्ष्य छिपाना)
- अवधेश, सोनू और मोनू-धारा 302 (मर्डर), 120 बी (साजिश करना), 201 (साक्ष्य छिपाना), 404 (मृतक के शरीर से कीमती सामान निकालना), 34(समान आशय)
- आशीष-धारा 302 (मर्डर), 120 बी (साजिश करना), 201 (साक्ष्य छिपाना), 364 (अपहरण), 34 (समान आशय)