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दहेज उत्पीड़न में तीन साल की कैद
Updated Wed, 30 Aug 2017 11:48 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। दहेज उत्पीड़न के मामले में अदालत ने पति, जेठ व जेठानी को तीन साल की कैद और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दो माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अर्थदंड की आधी राशि पीड़िता को मिलेगी। कोर्ट ने 17 साल बाद फैसला सुनाया है।
मटौंध थाना व कस्बा निवासी अनीसा पत्नी उस्मान खां ने 22 अगस्त 2000 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पुत्री शमा की शादी एक साल पहले मटौंध के ही कुतुबुद्दीन उर्फ कुदउवा पुत्र कल्लू खां के साथ हुई थी। 25 हजार रुपये नकद व सामान दिया था।
जेठ निजाम व जेठानी सुफिया दहेज में 50 हजार रुपये व एक स्कूटर, फ्रिज की मांग लेकर प्रताड़ित करते रहे। उत्पीड़न की जानकारी मिलने पर पुत्री को मायके ले आई। खलिहान लीपने के बहाने ससुरालवाले शमा को ले गए और कुएं में धकेल दिया। रेलवे कर्मियों व मोहल्लेवासियों ने बचाया। तहरीर में पुलिस ने 498 ए के तहत मामला पंजीकृत कर विवेचना शुरू की।
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विवेचक ने अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किए। सुनवाई प्रथम अपर मुख्य दंडाधिकारी की अदालत में शुरू की गई। अभियोजन अधिकारी रविकरन सिंह ने चार गवाह पेश किए।
अभियुक्तों के अधिवक्ताओं व अभियोजन पक्ष के तर्क सुनने के बाद बुधवार को प्रथम एसीजेएम हिमांशु कुमार सिंह ने पति कुतुबुद्दीन, जेठ निजाम व जेठानी सुफिया को दोषी पाते हुए धारा 498 ए में 3-3 साल का सश्रम कारावास व प्रत्येक को 10-10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को दी जाएगी। अदा न करने की दशा में दो माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
दहेज उत्पीड़न में पति, जेठ व जेठानी को 3 साल की कैद
10-10 हजार रुपये जुर्माना या दो माह और जेल
17 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला
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बांदा। दहेज उत्पीड़न के मामले में अदालत ने पति, जेठ व जेठानी को तीन साल की कैद और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दो माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अर्थदंड की आधी राशि पीड़िता को मिलेगी। कोर्ट ने 17 साल बाद फैसला सुनाया है।
मटौंध थाना व कस्बा निवासी अनीसा पत्नी उस्मान खां ने 22 अगस्त 2000 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पुत्री शमा की शादी एक साल पहले मटौंध के ही कुतुबुद्दीन उर्फ कुदउवा पुत्र कल्लू खां के साथ हुई थी। 25 हजार रुपये नकद व सामान दिया था।
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जेठ निजाम व जेठानी सुफिया दहेज में 50 हजार रुपये व एक स्कूटर, फ्रिज की मांग लेकर प्रताड़ित करते रहे। उत्पीड़न की जानकारी मिलने पर पुत्री को मायके ले आई। खलिहान लीपने के बहाने ससुरालवाले शमा को ले गए और कुएं में धकेल दिया। रेलवे कर्मियों व मोहल्लेवासियों ने बचाया। तहरीर में पुलिस ने 498 ए के तहत मामला पंजीकृत कर विवेचना शुरू की।
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विवेचक ने अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किए। सुनवाई प्रथम अपर मुख्य दंडाधिकारी की अदालत में शुरू की गई। अभियोजन अधिकारी रविकरन सिंह ने चार गवाह पेश किए।
अभियुक्तों के अधिवक्ताओं व अभियोजन पक्ष के तर्क सुनने के बाद बुधवार को प्रथम एसीजेएम हिमांशु कुमार सिंह ने पति कुतुबुद्दीन, जेठ निजाम व जेठानी सुफिया को दोषी पाते हुए धारा 498 ए में 3-3 साल का सश्रम कारावास व प्रत्येक को 10-10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को दी जाएगी। अदा न करने की दशा में दो माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
दहेज उत्पीड़न में पति, जेठ व जेठानी को 3 साल की कैद
10-10 हजार रुपये जुर्माना या दो माह और जेल
17 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला