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बंदी की मौत पर परिजनों का डीएम दफ्तर पर हंगामा
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बंदी की मौत पर डीएम दफ्तर पर हंगामा
कानपुर देहात। माती जेल के विचाराधीन बंदी श्याम सुंदर (35) की बुधवार को हैलट में उपचार के दौरान मौत हो गई। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजन श्याम सुंदर का शव लेकर डीएम के दफ्तर पहुंच गए। वहां शव रखकर हंगामा किया। परिजन जेल में बंद श्याम सुंदर की पत्नी हीरा देवी व अन्य लोगों को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल देने की मांग की। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने मामला कोर्ट में होने की बात कहकर मांग पूरी कर पाने में असमर्थता जता दी। तब करीब एक घंटे बाद डीएम दफ्तर से परिजन शव लेकर चले गए।
श्याम सुंदर मंगलपुर के जसापुर गांव का रहने वाला था। उसके परिवार में पत्नी हीरा देवी, बेटे अमित, अंकित और मनोज हैं। भाई रामशंकर ने बताया कि 10 जून को सट्टी निवासी मरजात सिंह का शव मंगलपुर के मैथलापुर गांव में पेड़ पर लटकता मिला था। इस मामले में मरजात के परिजनों ने श्याम सुंदर, उसकी पत्नी हीरा देवी, श्याम सुंदर के भाई राजेश, चाची बालदेवी, चचेरी बहन मंजू और बहनोई अमर सिंह पर मरजात की हत्या कर शव फांसी पर लटकाने का आरोप लगाया। इस मामले में मरजात के परिजनों की तरफ से हत्या और साक्ष्य छिपाने की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने सभी आरोपियों को 16 जून को गिरफ्तार कर माती जेल भेजा था। तब से सभी आरोपियों जेल में निरुद्ध हैं। बकौल रामशंकर 4 सितंबर को परिवार के लोग श्याम सुंदर व अन्य आरोपियों से जेल में मुलाकात करने गए, लेकिन जेल प्रशासन ने श्याम की तबियत ठीक न होने के बारे कुछ नहीं बताया। साथ ही जेल से बाहर आने पर जेल के कर्मचारियों ने परिजनों से सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बाद चार सितंबर को ही श्याम की हैलट में इलाज के दौरान मौत होने की बात बताई। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद परिजन श्याम का शव लेकर कानपुर नगर से सीधे माती स्थित डीएम दफ्तर पहुंचे। वहां गेट पर शव रखकर हंगामा किया। आरोप है कि जेल प्रशासन ने श्याम के इलाज में लापरवाही बरती, जिससे उसकी मौत हो गई। साथ ही श्याम की मौत की सूचना जेल में बंद उसकी पत्नी या अन्य लोगों को जेल प्रशासन ने नहीं दी। आक्रोशित परिजनों ने मरजात हत्याकांड और श्याम की मौत के मामले की जांच कराए जाने की मांग करते हुए एसडीएम सदर आनंद सिंह को अर्जी दी। साथ ही श्याम के अंतिम संस्कार के लिए जेल में बंद परिजनों को पैरोल दिलाए जाने की बात भी कही। एसडीएम और सीओ अकबरपुर अर्पित कपूर ने परिजनों को बताया कि मामला कोर्ट में चल रहा है। इसलिए पुलिस या प्रशासनिक अफसर पैरोल के बारे में कोई फैसला नहीं कर सकते हैं। जेल में बंद लोगों की पैरोल के लिए कोर्ट में अर्जी दें। अफसरों की बात सुनने के बाद परिजन श्याम का शव टेंपो से लेकर वहां से चले गए। एसडीएम का कहना है कि हत्या के आरोप में माती जेल में बंद श्याम सुंदर बीमार था। जेल प्रशासन ने उसे इलाज के लिए हैलट भेजा था। वहां बुधवार रात उसकी मौत हो गई। परिजनों ने डीएम दफ्तर के गेट पर शव रखकर हो-हल्ला किया। समझाने पर लोग शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर चले गए।
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कानपुर देहात। माती जेल के विचाराधीन बंदी श्याम सुंदर (35) की बुधवार को हैलट में उपचार के दौरान मौत हो गई। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजन श्याम सुंदर का शव लेकर डीएम के दफ्तर पहुंच गए। वहां शव रखकर हंगामा किया। परिजन जेल में बंद श्याम सुंदर की पत्नी हीरा देवी व अन्य लोगों को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल देने की मांग की। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने मामला कोर्ट में होने की बात कहकर मांग पूरी कर पाने में असमर्थता जता दी। तब करीब एक घंटे बाद डीएम दफ्तर से परिजन शव लेकर चले गए।
श्याम सुंदर मंगलपुर के जसापुर गांव का रहने वाला था। उसके परिवार में पत्नी हीरा देवी, बेटे अमित, अंकित और मनोज हैं। भाई रामशंकर ने बताया कि 10 जून को सट्टी निवासी मरजात सिंह का शव मंगलपुर के मैथलापुर गांव में पेड़ पर लटकता मिला था। इस मामले में मरजात के परिजनों ने श्याम सुंदर, उसकी पत्नी हीरा देवी, श्याम सुंदर के भाई राजेश, चाची बालदेवी, चचेरी बहन मंजू और बहनोई अमर सिंह पर मरजात की हत्या कर शव फांसी पर लटकाने का आरोप लगाया। इस मामले में मरजात के परिजनों की तरफ से हत्या और साक्ष्य छिपाने की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने सभी आरोपियों को 16 जून को गिरफ्तार कर माती जेल भेजा था। तब से सभी आरोपियों जेल में निरुद्ध हैं। बकौल रामशंकर 4 सितंबर को परिवार के लोग श्याम सुंदर व अन्य आरोपियों से जेल में मुलाकात करने गए, लेकिन जेल प्रशासन ने श्याम की तबियत ठीक न होने के बारे कुछ नहीं बताया। साथ ही जेल से बाहर आने पर जेल के कर्मचारियों ने परिजनों से सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बाद चार सितंबर को ही श्याम की हैलट में इलाज के दौरान मौत होने की बात बताई। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद परिजन श्याम का शव लेकर कानपुर नगर से सीधे माती स्थित डीएम दफ्तर पहुंचे। वहां गेट पर शव रखकर हंगामा किया। आरोप है कि जेल प्रशासन ने श्याम के इलाज में लापरवाही बरती, जिससे उसकी मौत हो गई। साथ ही श्याम की मौत की सूचना जेल में बंद उसकी पत्नी या अन्य लोगों को जेल प्रशासन ने नहीं दी। आक्रोशित परिजनों ने मरजात हत्याकांड और श्याम की मौत के मामले की जांच कराए जाने की मांग करते हुए एसडीएम सदर आनंद सिंह को अर्जी दी। साथ ही श्याम के अंतिम संस्कार के लिए जेल में बंद परिजनों को पैरोल दिलाए जाने की बात भी कही। एसडीएम और सीओ अकबरपुर अर्पित कपूर ने परिजनों को बताया कि मामला कोर्ट में चल रहा है। इसलिए पुलिस या प्रशासनिक अफसर पैरोल के बारे में कोई फैसला नहीं कर सकते हैं। जेल में बंद लोगों की पैरोल के लिए कोर्ट में अर्जी दें। अफसरों की बात सुनने के बाद परिजन श्याम का शव टेंपो से लेकर वहां से चले गए। एसडीएम का कहना है कि हत्या के आरोप में माती जेल में बंद श्याम सुंदर बीमार था। जेल प्रशासन ने उसे इलाज के लिए हैलट भेजा था। वहां बुधवार रात उसकी मौत हो गई। परिजनों ने डीएम दफ्तर के गेट पर शव रखकर हो-हल्ला किया। समझाने पर लोग शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर चले गए।
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