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बच्ची की मौत पर जिला अस्पताल में हंगामा
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ईएमओ से नाराजगी जताती महिला। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। जिला अस्पताल में शुक्रवार को झींझक सीएचसी से रेफर होकर आई बच्ची की मौत हो गई। बच्चोंके परिवार के लोगों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीमारदार को समझाया।
सिकंदरा निवासी मजदूर नौशाद खान के परिवार पत्नी आशा बेगम, बेटी आशफा, उमेरा, रुही (2) और बेटा अशद है। रुही पिछले दो दिन से बीमार थी। परिवार के लोग झींझक के निजी अस्पताल में इलाज के लिए उसे ले गये। वहां से डॉक्टर ने सीएचसी झींझक ले जाने की सलाह दी। रुही की हालत को देखते हुए झींझक सीएचसी से उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। दोपहर करीब एक बजे नौशाद, आशा और रिश्तेदार शबनम, शायरा जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां ईएमओ डॉ. पवन पारया ने इमरजेंसी वार्ड में रुही को भर्ती कराया। इसके बाद रुही को जिला अस्पताल में बंद पड़ी एनआईसीयू के लिए रेफर कर दिया। वह बंद मिला तो तीमारदार इमरजेंसी आये, तब तक रुही ने दम तोड़ दिया था। परिजनों का आरोप है कि लंच के नाम पर डॉक्टर एक घंटे तक अपनी सीट से गायब रहे, उन्होंने दवा बहुत देर से लिखी थी। परिजनों का कहना है कि जब दवा रुही को पिलाई तो उसकी मौत हो चुकी थी। इससे नाराज परिजनों ने जमकर हंगामा किया। यह देखकर ईएमओ डॉ. पवन पारया अपनी सीट से उठकर रेस्ट रुम में चले गए। सूचना पर अकबरपुर कोतवाली की पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को किसी तरह समझा-बुझाकर शांत किया। इसके बाद परिजन शव लेकर चले गए।
जिला अस्पताल में पर्याप्त दवा नहीं होने की वजह से चिकित्सक बाहर मेडिकल स्टोर की दवा लिखते हैं। रुही को भी डॉक्टर ने दवा लिखी थी। उसकी मौत से नाराज बुआ शबनम ने ईएमओ की टेबल पर दवा फेंक कर खरी-खोटी सुनाई।
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बच्ची को निमोनिया था। झींझक सीएचसी से वह गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल आई थी। न्यूबिलाइजर देकर उसे एनआईसी भेजा गया था। वह बंद मिला तो उसे कानपुर रेफर किया गया था। परिजन उसे वहां नहीं ले गए। इससे मौत हो गई।
-डॉ. पवन पारया, ईएमओ
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सिकंदरा निवासी मजदूर नौशाद खान के परिवार पत्नी आशा बेगम, बेटी आशफा, उमेरा, रुही (2) और बेटा अशद है। रुही पिछले दो दिन से बीमार थी। परिवार के लोग झींझक के निजी अस्पताल में इलाज के लिए उसे ले गये। वहां से डॉक्टर ने सीएचसी झींझक ले जाने की सलाह दी। रुही की हालत को देखते हुए झींझक सीएचसी से उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। दोपहर करीब एक बजे नौशाद, आशा और रिश्तेदार शबनम, शायरा जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां ईएमओ डॉ. पवन पारया ने इमरजेंसी वार्ड में रुही को भर्ती कराया। इसके बाद रुही को जिला अस्पताल में बंद पड़ी एनआईसीयू के लिए रेफर कर दिया। वह बंद मिला तो तीमारदार इमरजेंसी आये, तब तक रुही ने दम तोड़ दिया था। परिजनों का आरोप है कि लंच के नाम पर डॉक्टर एक घंटे तक अपनी सीट से गायब रहे, उन्होंने दवा बहुत देर से लिखी थी। परिजनों का कहना है कि जब दवा रुही को पिलाई तो उसकी मौत हो चुकी थी। इससे नाराज परिजनों ने जमकर हंगामा किया। यह देखकर ईएमओ डॉ. पवन पारया अपनी सीट से उठकर रेस्ट रुम में चले गए। सूचना पर अकबरपुर कोतवाली की पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को किसी तरह समझा-बुझाकर शांत किया। इसके बाद परिजन शव लेकर चले गए।
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जिला अस्पताल में पर्याप्त दवा नहीं होने की वजह से चिकित्सक बाहर मेडिकल स्टोर की दवा लिखते हैं। रुही को भी डॉक्टर ने दवा लिखी थी। उसकी मौत से नाराज बुआ शबनम ने ईएमओ की टेबल पर दवा फेंक कर खरी-खोटी सुनाई।
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बच्ची को निमोनिया था। झींझक सीएचसी से वह गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल आई थी। न्यूबिलाइजर देकर उसे एनआईसी भेजा गया था। वह बंद मिला तो उसे कानपुर रेफर किया गया था। परिजन उसे वहां नहीं ले गए। इससे मौत हो गई।
-डॉ. पवन पारया, ईएमओ