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किशोर न्याय बोर्ड में होगी खुशी के उम्र निर्धारण की सुनवाई
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कानपुर देहात। बिकरू कांड के बाद एनकाउंटर में ढेर हुए अमर दुबे की पत्नी खुशी तिवारी के मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। खुशी के अधिवक्ता ने उसके नाबालिग होने के साक्ष्य कोर्ट में दिए हैं। एंटी डकैती कोर्ट ने उम्र का निर्धारण करने के लिए पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को स्थानांतरित कर दी है। शादी के दो दिन बाद हत्या जैसे गंभीर आरोप में जेल भेजी गई खुशी की भूमिका पुलिस अभी तक तय नहीं कर सकी है।
खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने उसके नाबालिग होने के साक्ष्य एंटी डकैती कोर्ट में पेश किए। इस पर कोर्ट ने उम्र का निर्धारण करने के लिए पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी है। अधिवक्ता ने खुशी के आठवीं व हाईस्कूल के प्रमाण पत्र लगाए हैं। इसमें उसकी जन्म तिथि 21 अगस्त 2003 दर्ज है। दो जुलाई की रात बिकरु गांव में कुख्यात विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला हुआ था। इसमें सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हुए थे।
इसमें शामिल रहे विकास के करीबी अमर दुबे का पुलिस एनकाउंटर कर चुकी है। उसकी पत्नी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद से वह जेल में है। घटना के दो दिन पहले ही खुशी की अमर दुबे के साथ शादी हुई थी। दो दिन ससुराल में रहने के दौरान वह बिकरु कांड की आरोपी बना दी गई। पुलिस ने उस पर भी वही धाराएं लगाई हैं, जो विकास और अन्य साथियों पर लगाई गई हैं। खुशी के अधिवक्ता ने बताया कि खुशी की भूमिका का निर्धारण पुलिस अभी तक नहीं कर सकी है और न ही उसे रिमांड पर लेकर कुछ बरामद किया जा सका है। जन सूचना अधिकार के तहत खुशी के पिता श्यामलाल ने सूचना मांगी तो तब उस पर लगाई गई गंभीर धाराओं का खुलासा हुआ।
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बैकफुट पर आने के बाद पलट गई थी पुलिस
दो दिन ससुराल में रहने पर खुशी को इस जघन्य हत्याकांड का आरोपी बना दिया गया। शुरुआती दौर में इस पर सवाल उठे तो पुलिस बैकफुट पर आ गई थी। तब पुलिस ही खुशी को रिहा कराने की बात कह रही थी। हालांकि कुछ ही समय बाद पुलिस फिर पलट गई और कहा कि इस घटना में खुशी के शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य है। अब उसे रिहा कराने की कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
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खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने उसके नाबालिग होने के साक्ष्य एंटी डकैती कोर्ट में पेश किए। इस पर कोर्ट ने उम्र का निर्धारण करने के लिए पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी है। अधिवक्ता ने खुशी के आठवीं व हाईस्कूल के प्रमाण पत्र लगाए हैं। इसमें उसकी जन्म तिथि 21 अगस्त 2003 दर्ज है। दो जुलाई की रात बिकरु गांव में कुख्यात विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला हुआ था। इसमें सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हुए थे।
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इसमें शामिल रहे विकास के करीबी अमर दुबे का पुलिस एनकाउंटर कर चुकी है। उसकी पत्नी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद से वह जेल में है। घटना के दो दिन पहले ही खुशी की अमर दुबे के साथ शादी हुई थी। दो दिन ससुराल में रहने के दौरान वह बिकरु कांड की आरोपी बना दी गई। पुलिस ने उस पर भी वही धाराएं लगाई हैं, जो विकास और अन्य साथियों पर लगाई गई हैं। खुशी के अधिवक्ता ने बताया कि खुशी की भूमिका का निर्धारण पुलिस अभी तक नहीं कर सकी है और न ही उसे रिमांड पर लेकर कुछ बरामद किया जा सका है। जन सूचना अधिकार के तहत खुशी के पिता श्यामलाल ने सूचना मांगी तो तब उस पर लगाई गई गंभीर धाराओं का खुलासा हुआ।
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बैकफुट पर आने के बाद पलट गई थी पुलिस
दो दिन ससुराल में रहने पर खुशी को इस जघन्य हत्याकांड का आरोपी बना दिया गया। शुरुआती दौर में इस पर सवाल उठे तो पुलिस बैकफुट पर आ गई थी। तब पुलिस ही खुशी को रिहा कराने की बात कह रही थी। हालांकि कुछ ही समय बाद पुलिस फिर पलट गई और कहा कि इस घटना में खुशी के शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य है। अब उसे रिहा कराने की कार्रवाई नहीं की जा सकती है।