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खड़कपुर अस्थायी गोशाला में गाय की मौत, हरा चारा नहीं मिलने व खुले में रहने से कमजोर हो रहे मवेशी
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खड़कपुर गोशाला में खुले में बैठे गोवंश। संवाद
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। जिले के अफसरों के दावों के बाद भी गोशालाओं में अव्यवस्थाएं हावी हैं। शनिवार को अस्थायी खड़कपुर गोशाला में कमजोरी से एक गाय की मौत हो गई। वहीं हरा चारा न मिलने व खुले में रहने से कई गाय कमजोर व बीमार हैं।
अकबरपुर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत निबौली के मजरा खड़कपुर में छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए अस्थायी गोशाला बनी है। 50 गोवंशों की क्षमता के बावजूद यहां मौजूद समय में यहां 53 मवेशी रखे गए थे।
काफी समय से हरा चारा व चोकर आदि न मिलने के कारण अधिकांश गाय कमजोर होकर बीमार हैं। वहीं ठंड शुरू होने के बाद भी गोवंश खुले में रह रहे हैं। कमजोरी व बीमार रहने से शनिवार को एक गाय की मौत हो गई।
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सूचना पर पहुंचे पशु चिकित्सक ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। ग्रामीणों का कहना है कि गोशाला में पर्याप्त साफ-सफाई तक नहीं की जाती है। हरा चारा न मिलने के कारण मवेशियों को सिर्फ सूखा भूसा ही दिया जाता है।
जिससे गोवंश कमजोर हो रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. आईए सिद्दीकी ने बताया कि कमजोरी के कारण गाय की मौत हुई है। पिछले दिनों विभाग से जई का बीज हरे चारे की बुआई के लिए दिया गया था, लेकिन बारिश के कारण वह बह गया। फिर से बरसीम की बुआई कराई गई है। जो दिसंबर तक उपलब्ध हो सकेगी।
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अकबरपुर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत निबौली के मजरा खड़कपुर में छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए अस्थायी गोशाला बनी है। 50 गोवंशों की क्षमता के बावजूद यहां मौजूद समय में यहां 53 मवेशी रखे गए थे।
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काफी समय से हरा चारा व चोकर आदि न मिलने के कारण अधिकांश गाय कमजोर होकर बीमार हैं। वहीं ठंड शुरू होने के बाद भी गोवंश खुले में रह रहे हैं। कमजोरी व बीमार रहने से शनिवार को एक गाय की मौत हो गई।
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सूचना पर पहुंचे पशु चिकित्सक ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। ग्रामीणों का कहना है कि गोशाला में पर्याप्त साफ-सफाई तक नहीं की जाती है। हरा चारा न मिलने के कारण मवेशियों को सिर्फ सूखा भूसा ही दिया जाता है।
जिससे गोवंश कमजोर हो रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. आईए सिद्दीकी ने बताया कि कमजोरी के कारण गाय की मौत हुई है। पिछले दिनों विभाग से जई का बीज हरे चारे की बुआई के लिए दिया गया था, लेकिन बारिश के कारण वह बह गया। फिर से बरसीम की बुआई कराई गई है। जो दिसंबर तक उपलब्ध हो सकेगी।