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कोविड हॉस्पिटल: गेट पर रोगी को शिफ्ट करने की व्यवस्था नहीं, इमरजेंसी से आए दो मरीजों की हो चुकी मौत
Thu, 13 Aug 2020 10:36 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 13 Aug 2020 10:36 AM IST
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हैलट संक्रमण विभाग
- फोटो : amar ujala
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कानपुर हैलट के न्यूरो साइंसेज कोविड अस्पताल पहुंचने पर रोगी को तत्काल वार्ड में शिफ्ट करने की व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है। मरीज जब यहां पहुंचता है तो वार्ड से कर्मचारी को बुलाना पड़ता है। ऐसे में अगर कर्मचारी किसी अन्य मरीज की साफ-सफाई या कोई शव लेकर मोर्चुरी गया है तो फिर शिफ्टिंग में देर हो जाती है।
इस वजह से दो मरीजों की मौत हो चुकी है। इनको हैलट परिसर में ही इमरजेंसी से कोविड अस्पताल भेजा गया था। कोविड अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि गेट पर एक स्ट्रेचर और एक वार्ड ब्वॉय के रहने की व्यवस्था बनाई गई है लेकिन इस पर अमल नहीं हो पा रहा है।
पिछले दिनों एक मरीज की गेट पर एंबुलेंस में ही मौत होने के बाद यहां एक वार्ड ब्वॉय की ड्यूटी लगाई गई थी लेकिन वह एक दिन के बाद ही भाग गया। स्थिति अब भी वही है, जबकि अस्पताल में लगातार गंभीर मरीज आ रहे हैं। पिछले दिनों लखनऊ से आई शासन की टीम ने भी इसे लेकर हिदायत दी थी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि स्टाफ की कमी है, लेकिन व्यवस्था की गई है।
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इस वजह से दो मरीजों की मौत हो चुकी है। इनको हैलट परिसर में ही इमरजेंसी से कोविड अस्पताल भेजा गया था। कोविड अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि गेट पर एक स्ट्रेचर और एक वार्ड ब्वॉय के रहने की व्यवस्था बनाई गई है लेकिन इस पर अमल नहीं हो पा रहा है।
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पिछले दिनों एक मरीज की गेट पर एंबुलेंस में ही मौत होने के बाद यहां एक वार्ड ब्वॉय की ड्यूटी लगाई गई थी लेकिन वह एक दिन के बाद ही भाग गया। स्थिति अब भी वही है, जबकि अस्पताल में लगातार गंभीर मरीज आ रहे हैं। पिछले दिनों लखनऊ से आई शासन की टीम ने भी इसे लेकर हिदायत दी थी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि स्टाफ की कमी है, लेकिन व्यवस्था की गई है।
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