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कोरोना ने रोके हथियारों के सौदे, धनुष-शारंग जैसी तोपें आई थी खाड़ी और मध्य एशिया के देशों को पसंद
Fri, 26 Jun 2020 03:24 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 26 Jun 2020 03:24 PM IST
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कानपुर में बनी शारंग तोप
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कोरोना ने शहर की आयुध निर्माणियों को भी तगड़ा झटका दिया है। कोरोना महामारी के चलते निर्माणियों के साथ होने वाले करोड़ों के रक्षा सौदे टल गए हैं। यहां के बने उत्पाद खाड़ी और मध्य एशिया के देशों को काफी पसंद आए थे। निर्माणियों में अलग-अलग तोप और कारबाइन आदि का निर्माण किया जाता है।
दरअसल, इस वर्ष की शुरूआत में लखनऊ में डिफेंस एक्सपो लगी थी। इसमें आयुध निर्माण बोर्ड के बैनर तले शहर की निर्माणियों के उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए थे। आयुध निर्माणी कानपुर ओएफसी, फील्डगन फैक्टरी की बनी शारंग तोप समेत अन्य उत्पाद यहां पर लगाए गए थे।
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दरअसल, इस वर्ष की शुरूआत में लखनऊ में डिफेंस एक्सपो लगी थी। इसमें आयुध निर्माण बोर्ड के बैनर तले शहर की निर्माणियों के उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए थे। आयुध निर्माणी कानपुर ओएफसी, फील्डगन फैक्टरी की बनी शारंग तोप समेत अन्य उत्पाद यहां पर लगाए गए थे।
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इसमें दुनिया के कई देशों के रक्षा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इन्हें निर्माणियों में बने उत्पाद खासकर धनुष और शारंग, जेवीपीसी कारबाइन के अलावा एलएफजी लाइट फील्ड गन तोपें मध्य एशिया और खाड़ी देशों जैसे वियतनाम, थाईलैंड, म्यांम्यार, मिस्र के रक्षा प्रतिनिधियों को काफी पसंद आई थीं।
करीब 10 देशों के प्रतिनिधियों ने आयुध निर्माणी बोर्ड से संपर्क किया था। और इन देशों का प्रतिनिधिमंडल यहां आया था। उत्पादों की बनने की प्रक्रिया, गुणवत्ता के बाद करार पर बात शुरू हो गई थी। इसके बाद मार्च में कोरोना के चलते लॉकडाउन लागू हो गया। जिन देशों से बातचीत हुई थी वहां भी कोरोना फैल गया। इस कारण बातचीत को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।
निर्माणियों के सूत्रों के मुताबिक करीब 10-15 करोड़ के करार होने की संभावना थी। सबसे अच्छी बात यह थी कि इन देशों के साथ उत्पादों का निर्यात शुरू हो जाता। हालांकि जल्द ही इस संबंध में ऑनलाइन संपर्क साधने की तैयारी की जा रही है।
करीब 10 देशों के प्रतिनिधियों ने आयुध निर्माणी बोर्ड से संपर्क किया था। और इन देशों का प्रतिनिधिमंडल यहां आया था। उत्पादों की बनने की प्रक्रिया, गुणवत्ता के बाद करार पर बात शुरू हो गई थी। इसके बाद मार्च में कोरोना के चलते लॉकडाउन लागू हो गया। जिन देशों से बातचीत हुई थी वहां भी कोरोना फैल गया। इस कारण बातचीत को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।
निर्माणियों के सूत्रों के मुताबिक करीब 10-15 करोड़ के करार होने की संभावना थी। सबसे अच्छी बात यह थी कि इन देशों के साथ उत्पादों का निर्यात शुरू हो जाता। हालांकि जल्द ही इस संबंध में ऑनलाइन संपर्क साधने की तैयारी की जा रही है।